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अमर उजाला के कांपैक्ट ने दैनिक जागरण के आई-नेक्स्ट को पछाड़ा

आई-नेक्स्ट टांय टांय फिस्स साबित होता जा रहा है. ताजी सूचना के मुताबिक अमर उजाला के शिशु अखबार कांपैक्ट ने दैनिक जागरण के बच्चा अखबार आई-नेक्स्ट को यूपी में काफी पीछे छोड़ रखा है. इंडियन रीडरशिप के ताजा सर्वे से पता चलता है कि यूपी में आई-नेक्स्ट से बहुत ज्यादा पाठक कांपैक्ट के हैं. इस बाबत अमर उजाला ने अपने पन्नों पर विज्ञापन छाप कर कांपैक्ट की सफलता की कहानी अपने पाठकों के सामने बयां की है.

आई-नेक्स्ट टांय टांय फिस्स साबित होता जा रहा है. ताजी सूचना के मुताबिक अमर उजाला के शिशु अखबार कांपैक्ट ने दैनिक जागरण के बच्चा अखबार आई-नेक्स्ट को यूपी में काफी पीछे छोड़ रखा है. इंडियन रीडरशिप के ताजा सर्वे से पता चलता है कि यूपी में आई-नेक्स्ट से बहुत ज्यादा पाठक कांपैक्ट के हैं. इस बाबत अमर उजाला ने अपने पन्नों पर विज्ञापन छाप कर कांपैक्ट की सफलता की कहानी अपने पाठकों के सामने बयां की है.

जानकारों का कहना है कि आई-नेक्स्ट की हालत इन दिनों बेहद खराब है. कंटेंट के नाम पर पुरानी स्टोरीज को धो पोंछ कर छापा जा रहा है. लेआउट के मामले में भी यह अखबार वर्षों पुराना अपना कलेवर ढो रहा है. आई-नेक्स्ट में अब न तो इन्नोवेशन करने वाले लोग हैं और न ही पत्रकारिता की बुनियादी समझ इनके पास है. इस कारण इनका कोई पाठक वर्ग नहीं डेवलप हो पा रहा है. यह शिशु अखबार अपने पिता अखबार दैनिक जागरण के कंधों पर सवार होकर अस्तित्व में है. बताया जा रहा है कि आई-नेक्स्ट को संचालित करने वाले शीर्ष लोगों का संपादकीय बैकग्राउंड का न होना आई-नेक्स्ट में काम करने वाले पत्रकारों के लिए बवाल-ए-जान साबित हो रहा है. पत्रकारिता की समझ न रखने के कारण ये शीर्ष नेतृत्व अटपटे डिमांड और काम को ज्यादा तरजीह देता है, जिसे यहां कार्यरत कर्मी मन मानकर फालो करते रहते हैं.

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