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अमर उजाला ने इटावा में पत्रकारिता की हत्‍या कर डाली

यशवंतजी, नमस्कार. आप से निवेदन है कि इस पत्र को पूरा पढ़ने की कृपा करें. कुछ उचित लगे तो प्रसारित करें क्योंकि इटावा में पत्रकारिता की कलम से एक पूरे परिवार की हत्या कर दी गयी और ये कलमकार अमर उजाला, कानपुर संस्करण के वरिष्ठ संवाददाता और वर्तमान में इटावा ब्‍यूरो चीफ हैं. इटावा में काम कर रहे अमर उजाला के देवदास ने कलम की हत्या कर दी है.

यशवंतजी, नमस्कार. आप से निवेदन है कि इस पत्र को पूरा पढ़ने की कृपा करें. कुछ उचित लगे तो प्रसारित करें क्योंकि इटावा में पत्रकारिता की कलम से एक पूरे परिवार की हत्या कर दी गयी और ये कलमकार अमर उजाला, कानपुर संस्करण के वरिष्ठ संवाददाता और वर्तमान में इटावा ब्‍यूरो चीफ हैं. इटावा में काम कर रहे अमर उजाला के देवदास ने कलम की हत्या कर दी है.

आगरा के दयालबाग के रहने वाले युवक रंजीत की विगत 8 दिसम्बर को इटावा शहर के बीचोबीच भोर होते ही गोली मारकर हत्या कर दी गयी, लेकिन इटावा पुलिस पूरे मामले को आत्महत्या दिखाने पर आमादा है जबकि गोली रंजीत के सिर में लगी और मौके पर उसकी मौत हो गयी. मौके से कोई भी हथियार बरामद नहीं हुआ. जनपद के सारे अख़बार पुलिस की कहानी पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन मानवता उस वक्त शर्मसार हो गयी जब अमर उजाला के ब्‍यूरो चीफ की बाइलाइन छपी खबर (देवदास की राह चल पड़ा देशराज) ने पीड़ित परिवार को पुलिस के सामने घुटने टेकने को मजबूर करने का काम कर दिया. इन महाशय को ये भी नहीं दिखा कि एक पिता के पुत्र और एक पत्नी के पति व एक माँ के लाल की मौत पर देवदास से जोड़कर उनकी संवेदनाओ का मजाक उड़ाया जा रहा है.

रंजीत उर्फ़ देशराज नाम भी इन महाशय के दिमाग की उपज है. क्या यही पत्रकारिता है जब कि मृतक के पिता चार दिनों से अपने बेटे की हत्या की रिपोर्ट लिखाने को पुलिस कप्तान तक गुहार लगा रहा है और पुलिस आज तक कोई मुकदमा लिखने को तैयार नहीं है. जनपद के आज भी सारे अख़बार पुलिस की कहानी पर सवाल उठा रहे हैं लेकिन ये महाशय पुलिस के साथ मिल कर हत्या को आत्महत्या बताने का बचकाना खेल खेल रहे हैं. और वैसे ही इनके संपादक भी हैं, जो इस देवदास की कहानी को उसकी बाइलाइन खबर बना कर छाप दिए. इतना ही नहीं इन महाशय ने अपनी खबर को फेसबुक पर लगा कर वाहवाही लूटने का भी दुस्साहसिक काम भी किया है. शर्म आनी चाहिए ऐसे कलमकारों को जो पुलिस की चाटुकारिता करते करते इंसानियत की हत्या करने पर उतारू रहते हैं.

उस माँ-बाप और पत्नी से पूछो जिनका सब कुछ उजड़ गया. आखिर वह कौन है जिसके लिए देशराज ने जान दे दी. यह भी जानने की जहमत इन महाशय और पुलिस ने नहीं उठाई. शर्म करो अमर उजाला वालों और बाई लाइन खबर पर इतराने वालों, कहीं तुम्हारे घर में किसी चिराग की हत्या हो और पुलिस उसे आत्महत्या करार दे, तब भी शायद तुम्‍हें पुलिस की चाटुकारिता कर देवदास की कहानी लिखने में बहुत मजा आएगा. शर्म करो चाटुकारों ऐसी लेखनी से, किसी रंडी के कोठे पर भडुआई करने लगो तो कलम की हत्या होने से बच जाएगी. और  देवदास तुम बनना रंडी तुम्हारी पारो बन जाएगी तब इन कहानियों को अपनी प्रेम कहानी बनाना और फेसबुक पर डाल देना.

सुनील कुमार

इटावा    

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