उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी के साथ सरकार अपने विपक्ष में उठने वाली हर आवाज को दबाने के लिए येन-केन-प्रकारेण जुट गयी है। पूर्वमंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के बगावती बोल के बाद उनको पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने के साथ बंगला खाली करने की नोटिस भी थमा दी गयी है। मीडिया में मनमाफिक खबर न छपने पर प्रदेश सरकार का नजरिया किस तरह बदल जाता है, इसका नमूना है अमर उजाला के प्रदेश के सभी संस्करणों के भवन व दफ्तरों की जांच-पड़ताल का।
21 नवबंर को विधानसभा के सत्र में प्रदेश के बंटवारे को लेकर अमर उजाला ने जो लीड की हेडिंग बनाने के साथ अंदर जो सामग्री लखनऊ में परोसी गयी उसको लेकर सरकार का नजरिया टेढ़ा हो गया है। सोलह मिनट में बीस करोड़ की किस्मत तय हेडिंग के साथ अंदर के पेज नंबर 2 व 3 पर जो सामग्री परोसी गयी, उसको लेकर सरकार का मानना है कि अमर उजाला खुद विपक्ष बन गया है। शशि शेखर जब अमर उजाला के समूह संपादक थे तो प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती से संबंध इतने मधुर थे कि अपना नया बंगला देखने के लिए आमंत्रित किया था। अब वही मुख्यमंत्री अमर उजाला के प्रदेश में मौजूद सभी संस्करणों के भवनों की पड़ताल कराने में जुट गयी है।
नगर विकास, औद्योगिक विकास महकमे से जुड़े पदाधिकारी इसके लिए प्रदेश के विभिन्न संस्करणों के मुख्यालय पर जाकर कागजों की जांच-पड़ताल करने में लगे हैं। बनारस के चांदपुर इंड्रीस्टियल एस्टेट में बने भवन का पर्याप्त नक्शा न होने का मामला सामने आया है, वहीं लखनऊ में तीसरी मंजिल के निर्माण को गैरकानूनी ठहराया जा रहा है। आगरा में विकास प्राधिकरण के अधिकारी तो भरतपुर हाउस (इसमें अशोक अग्रवाल) रहते हैं, उनके घर की जांच-पड़ताल करने पहुंच गए है। अमर उजाला के खिलाफ चल रही इस कार्रवाई को रोकने के लिए प्रबंधन सरकार के नुमाइंदों को मैनेज करने में जुट गया है। फिलहाल इस घटनाक्रम को लेकर तरह तरह की कानाफूसी जारी है।
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित. कानाफूसी कैटगरी में प्रकाशित खबरों जरूरी नहीं सच हो, इसलिए पढ़ने के बाद तथ्यों की पड़ताल खुद के स्तर पर करें और तभी भरोसा करें. अगर कोई कुछ नई जानकारी देना चाहता हो तो नीचे दिए गए कमेंट बाक्स का सहारा ले सकता है या फिर [email protected] पर मेल कर सकते हैं.






