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अमिताभ के मामले में कैट ने राज्‍य सरकार को दो सप्‍ताह में निर्णय लेने को कहा

कैट लखनऊ ने शुक्रवार को दिए गए अपने फैसले में कहा है कि राज्य सरकार आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की प्रोन्नति से सम्बंधित मामले में दो सप्ताह के अंदर निर्णय ले. जस्टिस आलोक कुमार सिंह एवं जस्टिस एसपी सिंह की दो-सदस्यीय पीठ ने प्रोन्नति को एक बुनियादी सिविल अधिकार बताते हुए केन्द्र एवं राज्य सरकारों द्वारा बिना कारण अपने कुछ कर्मचारियों की प्रोन्नति को रोके जाने की स्थिति को चिंताजनक बताया. कैट ने कहा कि केन्द्र एवं राज्य सरकारों को आदर्श नियोक्ता (मोडल इम्प्लायर) के रूप में कार्य करना चाहिए. कैट ने यह आदेश ठाकुर द्वारा दायर वाद संख्या 436/2011 में पारित किया.

कैट लखनऊ ने शुक्रवार को दिए गए अपने फैसले में कहा है कि राज्य सरकार आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की प्रोन्नति से सम्बंधित मामले में दो सप्ताह के अंदर निर्णय ले. जस्टिस आलोक कुमार सिंह एवं जस्टिस एसपी सिंह की दो-सदस्यीय पीठ ने प्रोन्नति को एक बुनियादी सिविल अधिकार बताते हुए केन्द्र एवं राज्य सरकारों द्वारा बिना कारण अपने कुछ कर्मचारियों की प्रोन्नति को रोके जाने की स्थिति को चिंताजनक बताया. कैट ने कहा कि केन्द्र एवं राज्य सरकारों को आदर्श नियोक्ता (मोडल इम्प्लायर) के रूप में कार्य करना चाहिए. कैट ने यह आदेश ठाकुर द्वारा दायर वाद संख्या 436/2011 में पारित किया.

ठाकुर के विरुद्ध एसपी देवरिया के रूप में एक विभागीय कार्यवाही 27 अक्टूबर 2004 को प्रारम्भ की गयी जो 22 मई 2007 को समाप्त कर दी गयी. इसके दो साल बाद 22 मई 2009 को वह विभागीय कार्यवाही पुनः प्रारम्भ कर दी गयी. ठाकुर ने इसके सम्बन्ध में कैट, लखनऊ में पूर्व में वाद संख्या 177/2010 दायर किया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि इस प्रकार दो साल बाद बंद हो चुकी विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ करना नियमों के खिलाफ है. कैट द्वारा अपने आदेश 08 सितम्बर 2011 में ठाकुर की बात सही मानते हुए उक्त विभागीय कार्यवाही को निरस्त कर दिया गया था.

राज्य सरकार ने कैट के उस निर्णय का अनुपालन नहीं करके इलाहाबाद उच्च न्यायालय में रिट याचिका संख्या 2078/2011 दायर किया था. 20 मार्च 2012 को उच्च न्यायालय द्वारा राज्य सरकार की यह याचिका खारिज कर दी गयी थी. इन तथ्यों के आधार पर कैट ने आज वाद संख्या 436/ 2011 में यह आदेश दिया कि ठाकुर के विरुद्ध कोई विभागीय कार्यवाही लंबित नहीं होने के कारण राज्य सरकार उनके प्रोन्नति विषयक मामले में दो सप्ताह में निर्णय ले.

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