यूपी के प्रमुख सचिव (गृह) आरएम श्रीवास्तव एवं डीजीपी पर कैट के अवमानना आचरण और न्यायिक कार्यों में असहयोग के सम्बन्ध में आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर द्वारा दायर याचिका में इलाहाबाद हाई कोर्ट, लखनऊ बेंच ने आज सरकार से जवाब तलब किया है.
जस्टिस देवी प्रसाद सिंह और जस्टिस अशोक पाल सिंह की बेंच ने कहा कि ऐसे मामलों में कैट को भी सारे अधिकार हैं और उन्हें अपनी शक्ति का पूरा उपयोग करना चाहिए चाहे आदेशों की अवज्ञा करने वाला अधिकारी कितना भी बड़ा क्यों ना हो. कोर्ट ने 14 मई को सुनवाई की अगली तिथि नियत की है.
ठाकुर ने अपनी याचिका में कहा था कि पहले तो उन्हें नियमविरुद्ध तरीके से प्रोन्नति से वंचित किया गया और जब उन्होंने इस सम्बन्ध में कैट, लखनऊ में याचिका दायर की तो इन अधिकारियों द्वारा लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया में असहयोग किया जा रहा है. कैट ने 09 अगस्त 2012 के अपने आदेश में इन अधिकारियों को अपना प्रतिशपथ पत्र चार सप्ताह में दायर करने को कहा जिसे आज तक इनके द्वारा दायर नहीं किया गया है.
इसी तरह कैट ने 16 जनवरी 2013 को प्रमुख सचिव गृह को इस मामले से सम्बंधित सभी अभिलेख अगली सुनवाई से पूर्व प्रस्तुत करने को कहा लेकिन कई सुनवाइयों के बाद भी इस आदेश का पालन नहीं हुआ है. कैट के बार-बार कहने के बाद भी लगभग छह माह तक राज्य सरकार की ओर से कोई वकील तक नहीं था. अतः ठाकुर ने अपनी याचिका में इन अधिकारियों पर जानबूझ कर न्यायिक प्रक्रिया में रुकावट बनने की बात कहते हुए उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की.






