आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर द्वारा प्रमुख सचिव (गृह), उत्तर प्रदेश को उत्तर प्रदेश पुलिस के विभिन्न रैंकों के समस्त पुलिस कर्मियों के लिए सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 की धारा एक के अंतर्गत “उत्तर प्रदेश पुलिस एसोसियेशन” नाम से एक ऐकिक पुलिस एसोशियेशन बनाए जाने हेतु पुलिस बल (रेस्ट्रिकशन ऑफ राइट्स) एक्ट 1966 की धारा 3(1) के अंतर्गत राज्य सरकार से अनुमति प्रदान करने हेतु पत्र भेजा गया है.
अमिताभ द्वारा पत्र में यह कहा गया है कि उत्तर प्रदेश और तमाम अन्य राज्यों एवं केन्द्रीय स्तर पर आईपीएस एसोशियेशन एवं पीपीएस एसोशियेशन हैं, जो पुलिस बल (रेस्ट्रिकशन ऑफ राइट्स) एक्ट 1966 की धारा 3(1) के अंतर्गत निहित प्रावधानों के अनुरूप सम्बंधित सक्षम प्राधिकारियों द्वारा अनुमति के बाद ही बने होंगे. लेकिन बदलते परिदृश्य में बेहतर पुलिसिंग के लिए यह आवश्यकता दिखती है कि उत्तर प्रदेश पुलिस में विभिन्न रैंकों के पुलिस कर्मी सामाजिक और अनौपचारिक प्लेटफोर्म पर एक साथ आयें और उनके मध्य मानसिक, सामाजिक और व्यवहार के स्तर पर नियमित सहभागिता बने.
उन्होंने प्रस्तावित संस्था के मुख्य कार्यों में पुलिस और पुलिसिंग से सम्बंधित समस्यायों, विचार और उपयोगी कार्य व्यवहार के विषय में वार्ता हेतु एक प्रोफेशनल प्लेटफोर्म प्रदान करना, पुलिस सेवा के सभी सदस्यों के हितों और सम्बंद्घित मुद्दों का प्रतिनिधित्व करना, बेहतर पुलिसिंग, पुलिस मैनेजमेंट और मानव संसाधन प्रबंधन की दिशा में योगदान देना, एसोशियेशन के सदस्यों के लिए बेहतर सेवा शर्तों और बेहतर सेवा-विषयक स्थितियां बनाने के लिए विभिन्न प्रकार के वैध और अनुमन्य प्रयास करना एवं पुलिस में लगातार आवश्यक अनुशासन बनाए रखना बताया है. उनके अनुसार इस प्रकार के ऐकिक पुलिस एसोशियेशन से वर्तमान में व्याप्त पावर-डिस्टेंस (शक्ति-विभेद) में व्यापक कमी आएगी एवं परस्पर बेहतर तालमेल और बंधुत्व का विकास होगा. उन्होंने इस सम्बन्ध में आईआईएम लखनऊ में मानव संसाधन प्रबंधन कोर्स और मिड कैरियर ट्रेनिंग प्रोग्राम में ब्रिटिश पुलिस से सीखे अनुभवों का विशेष उल्लेख किया है.





