अंबेडकरनगर। वर्ष 2007 में करोड़पति थे और 2012 तक अरबपति हो गए। यह अप्रत्याशित समृद्धि बहुजन समाज पार्टी की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री रामअचल राजभर ने हासिल की है। कोई बड़ा उद्यम न लगाने के बावजूद पांच साल में इनकी संपत्तियों में जबर्दस्त इजाफा हुआ। अब लोकायुक्त जांच में फंसे राजभर की कुर्सी पर भी खतरा मंडराता दिखने लगा है। संभावना है कि मायावती बवाल से बचने के लिए उनके नीचे से प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी खींच सकती हैं।
वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में रामअचल राजभर ने अकबरपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था। तब उन्होंने शपथपत्र में आर्थिक स्थिति का जो ब्योरा दिया था उसके मुताबिक कुल संपत्ति एक करोड़ थी। निर्वाचित होने के बाद सूबे में बसपा की सरकार बनी और वह मंत्री बन गए। राजभर को परिवहन मंत्रालय मिला। बहनजी के खास कृपापात्र रामअचल खुद को पाक-साफ बताते हैं लेकिन वर्तमान हैसियत छिपाने से नहीं छिप रही। कारण छह साल पूर्व के चुनाव में इन्होंने करीब 37 लाख रुपये का मकान, 25 लाख की कृषि योग्य भूमि दर्शायी थी। इसके अलावा स्टेट बैंक, अकबरपुर में करीब 20 हजार, नैनीताल बैंक की लखनऊ शाखा में 32 हजार 951 रुपये होने की जानकारी थी। वाहन के नाम पर एक बोलेरो और असलहे के नाम पर सवा लाख कीमत की रिवाल्वर का जिक्र शपथपत्र में था।
अब लोकायुक्त जांच में राजभर के पास वर्तमान में 10 अरब 33 करोड़ 97 लाख 50 हजार रुपये की संपत्ति होना बताया गया है। दोनों आंकड़ों से ही बसपा प्रदेश अध्यक्ष की हैसियत का अंदाजा स्वयं लगाया जा सकता है। इतना ही नहीं जांच में सैकड़ों ऐसे दानदाताओं के नाम प्रकाश में आए जो, गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। उनसे राजभर ने 20 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक दान में लिए हैं। बताते हैं कि राजभर के परिवारीजनों के पास ही दो करोड़ से अधिक मूल्य के वाहन हैं, जिसका इस्तेमाल निजी तौर पर चलने के लिए किया जा रहा है। बुधवार को सतर्कता अधिष्ठान की फैजाबाद शाखा द्वारा रामअचल के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। जांच गोरखपुर इकाई करेगी।
अब यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा कि पांच साल में करोड़पति से अरब पति कैसे हो गए रामअचल राजभर, लेकिन उनके जानने वाले बताते हैं कि कभी चूहामार दवाई बेचने वाले राजभर बिना कोई फैक्ट्री लगाए जिस तरीके से अरबपति हो गए हैं, उसका खुलासा होने के बाद मुश्किल में आना संभव है। इसके साथ उनके बसपा प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर भी खतरा मंडरा रहा है। माना जा रहा है कि मायावती लोकसभा चुनाव में भ्रष्टाचार के आरोपों के हमले से बचने के लिए राजभर की बलि ले सकती हैं।





