अरविंद केजरीवाल ने मीडिया के मालिकों को कांग्रेस और भाजपा खेमे में बंटा बताते हुए निशाना साधा था तो अब गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने आरोप लगा दिया है कि अधिकतर राष्ट्रीय समाचार चैनलों को कांग्रेस से मदद मिलती है. एक जनसभा में पर्रिकर ने कहा- ''मैं दिल्ली के इन समाचार चैनलों से पूछना चाहता हूं कि आपको लाभ कहां से मिलता है? मुझे पता है कि उन्हें सारा धन कांग्रेस से मिलता है. वित्तीय रूप से कोई भी चैनल लाभ में नहीं चल रहा है.''
उल्लेखनीय है कि मीडिया में कुछ दिनों पहले भाजपा की दिल्ली में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भाजपा के दो विधायकों के शराब पीकर लड़ने की खबर प्रकाशित-प्रसारित हुई थी. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर गोवा के अखबारों ने दो विधायकों के कथित झगड़े पर लिखकर अपना वक्त क्यों जाया किया? पर्रिकर ने कहा, कि क्या उनके पास प्रकाशित करने के लिए अच्छा कुछ भी नहीं है? कोई निहित स्वार्थ है. इस सरकार के सत्ता में आने पर निहित स्वार्थ समाप्त हो गए हैं. मुझे आश्चर्य होता है कि पिछली सरकार को बिना कोई काम किए अखबारों में कितनी जगह मिली.
उधर, लखनऊ से खबर है कि विधायकों के विदेश के स्टडी टूर से वापस लौटे दल के नेता व संसदीय कार्यमंत्री आजम खां ने मीडिया पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि एक मीडिया घराने के बड़े अधिकारी की मांग पूरी करने से इंकार कर दिए जाने का नतीजा है कि स्टडी टूर को मुजफ्फ्फनगर दंगा से जोड़ दिया गया. विदेशी दौरे से वापस आने के कुछ ही देर बाद पत्रकारों से चर्चा करते हुए आजम खां ने कहा कि उनके दल में अन्य सदस्यों के साथ ही दो महिला सदस्य शामिल थीं. इसके बाद भी उनके दौरे पर कुछ मीडिया हाउस ने घटिया भाषा का इस्तेमाल किया. अय्याशी जैसे शब्द प्रयोग में लाए गए, जिन्हें सुनकर देश के लोग अचंभित हैं. जिस मुजफ्फरनगर दंगा के पीडितों को लेकर यह बखेड़ा किया गया वास्तव में ऐसे मीडिया हाउस की उन परेशान हाल लोगों से कोई हमदर्दी नहीं है, बल्कि यह मुस्लिमों को ही आपस में बांटने का गंदा खेल खेल रहे हैं जो देश के हित में नहीं है.
आजम ने कहा कि फासिस्ट ताकतें एक मुस्लिम मंत्री की तरक्की नहीं देखना चाहती हैं, अन्यथा अब तक कई दलों ने दौरे किए, लेकिन कोई विरोध नहीं हुआ, लेकिन इस बार दल का अगुवा एक मुस्लिम था इस नाते विरोध किया गया. दिल्ली में एक मीडिया घराने के बड़े साहब उनसे मिले थे और कुछ डिमांड की थी, इस बात का खुलासा करते हुए आजम ने कहा कि मैंने डिमांड मांगने से इंकार कर दिया, इस कारण भी कुछ विरोध किया गया.
उन्होंने कहा कि जिस महंगे होटल में दल के सदस्यों की बात कही जा रही है वह व्यवस्था एम्बेसी ने की थी और उन्होंने विदेश में शॉपिंग नहीं की थी बल्कि वह साहित्य था जो विदेशी प्रतिनिधियों से वार्ता के बाद दिया गया था. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ चैनल और अखबार राजनीतिक व्यवस्था के प्रति नफरत फैलाकर देश में राजनीतिक अराजकता पैदा करना चाहते हैं. वे देश में परिवर्तन के नाम पर राजनीतिक व्यवस्था और नेताओं के विरुद्ध नफरत की भावना फैलाकर इस देश में भी अरब देशों और थाईलैंड की तरह जनता को बगावत के लिए उकसा रहे हैं. खां ने कहा कि मीडिया के कुछ लोगों ने दौरे में शामिल लोगों पर आपत्तिजनक टिप्पणियां कर फांसीवादी होने का सबूत दिया है.






