Aam Aadmi Party : जैसे ही अरविन्द के उपवास ने 13वें दिन में प्रवेश किया, दिल्ली में बिजली पानी के नाजायज़ बिल न भरने की शपथ लेने वालों की संख्या 9,60,603 पहुँच गयी है! ये संख्या आज रात तक 10,00,000 पहुँचने की संभावना है! कल, 5 अप्रैल को 10 बजे बाद, सुन्दर नगरी में एक सर्वधर्म प्रार्थना आयोजित की जायेगी, दिल्ली के हर क्षेत्र से कार्यकर्ता इस प्रार्थना सभा में आयेंगे. 6 अप्रैल से सविनय अवज्ञा आन्दोलन का द्वीतीय चरण प्रारम्भ होगा. कार्यकर्ता और जनता उन कटे हुए तारों को जोड़ेंगे जो बिल न भरने के कारण काट दिए गए.
6 अप्रैल 1930 को ही गांधीजी ने डांडी में मुट्ठी भर नमक बनाकर, नमक कानून तोडा था,जिसे ब्रिटिश साम्राज्य की नीव पर पहला आघात मानते हैं. आज़ादी से पहले भारी करों के चलते नमक ऐसा उत्पाद हो गया था,जिसे खरीद पाना गरीबों के लिए मुश्किल हो था. आज बिजली पानी भी आम जनता के बूते के बाहर हो गयी है, जिसके बिल चुकाने के लिए उसे लोन तक लेना पड़ रहा है ! आज सुबह अरविन्द का रक्त चाप 111/73, पल्स 64 , शुगर 131 ,कीटोन 3+ और वज़न 56.5 था ! वो मंच परर तो आये,पर कमजोरी के कारण सुन्दरनगरी में आई जनता से बात नही कर पाए.
As Arvind Kejriwal's upwas enters the 13th day today, the number of people who have pledged not to pay the inflated bijli-pani bills in Delhi has swelled to 9,60,603. The figure is expected to cross the 10 lakh figure by today night. Tomorrow, i.e. April 5th, a sarva-dharma prarthna would be organized from 10am onwards in Sundar Nagri. Volunteers from all over Delhi would visit Sunder Nagri tomorrow for the prarthna.
From April 6th onwards, the second phase of Civil Disobedience movement would be launched. Volunteers and people would break the law to restore connections of households whose bijli-pani connections had been disconnected on non-payment of inflated bills. On April 6th, 1930, Gandhiji had broken the salt law in Dandi thereby indicating the downfall of the British Empire. During pre-independence period, due to heavy taxes, salt had become a commodity which the poor could not afford. Today, electricity and water have become out of reach for the common man, who is forced to take loans for paying the bills.
In the morning today, Arvind Kejriwal's blood pressure was 111/73, pulse 64, sugar 131, ketones 3+ and weight was 56.5 kgs. Due to weakness, though he came out on the stage, but restrained from addressing the people gathered at Sunder Nagri.

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इस उपवास पर अपने कुतर्को और बचकानी दलीलों को देकर अरविन्द की तपस्या पर ऊँगली उठाकर इसे महज़ राजनीतिक लालसा का नाम दे देने वाली नेट वीरों की अल्हड जमात आये और देखे कि 2013 में सुन्दर नगरी में 13 दिन से भूखे बैठे अरविन्द ने 2002 में भी इन्ही गलियों में यहाँ की बेबअस, लाचार जनता में अलख जगाने की लड़ाई लड़ी थी, तब न जनलोकपाल था और न पार्टी थी ! अगर था तो बस वही परिवर्तन का सपना देखने वाला नौजवान ! मखमली गलीचों पर से जिन्होंने नीचे कभी कदम नही रखा, जिन्होंने एक बार वोट लेकर कभी मुड़ कर नही देखा,ऐसे सूटेड- बूटेड गरिमामय नेता और आँख कान बन्द रखने वाले उनके स्वघोषित राष्ट्रवादी लड़ाका देख सकते हैं कि 2002 से 2013 तक अरविन्द की दलील भी वही है, जूनून वही है, जोश वही है ,हौसला वही है ,सादगी वही ……और हरे रंग का स्वेटर भी वही है !
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वो भगत सिंह ही थे जो फांसी पर चढ़ते हुए भी मुस्कुरा रहे थे और जीवन के आखिरी पलों में भी जिनके लबों पर देश का नाम था और जिसका एक एक कतरा इन्कलाब होकर "मेरा रंग दे बसंती चोला" गा रहा था" ! आज यही गीत जब मंच पर झुग्गी बस्ती के 2 छोटे छोटे बच्चों ने गुनगुनाया तो 13 दिन से भूखे अरविन्द के चेहरे पर मुस्कान झलक उठी !
ऐसा वक़्त बार बार नही आता जब आपको ऐसा मौका मिले कि आप अपनी धरती का क़र्ज़ चुका सकें ! अरविन्द आज इसी सौभाग्य से पुलकित हैं ! इन्कलाब जिंदाबाद ! जय हिन्द !
एक सूरज के छुपने से अँधेरा हो जाता है,
लाख दीये जला लो, छट नही पाता है !
भीड़ चल देगी ,जिधर ले जाएगा ज़माना,
जो क्रान्ति बन जाए,वो शख्स रोज़ नही आता है !
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अरविन्द केजरीवाल क्यों उपवास कर रहे हैं? इसका मकसद क्या है? क्या मिलेगा,इन सब सवालों का जवाब इन झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोग बेहतर दे सकते हैं ! एक मजदूर का 35 लाख का बकाया,50 गज के प्लॉट जिस पर सिर्फ दीवार बनी है ,उसका 26,000 रुपए बिजली बिल ,और अब 76 वर्षीय सुस्वतिदेवी जो 6/6 के एक कमरे में अकेली रहकर 1 बल्ब और 1 पंखा चलाती है,उनका बिल 18,100 रुपए आया है ! जब पैसे हैं ही नही, तो चुकाये कहाँ से? अब बिजली विभाग वाले मीटर काटने आ गए ! क्या ये कहना गलत है कि शीला सरकार इन गरीबों का खून चूस कर बिजली कम्पनियों की दलाली कर रही है ?
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जब आम आदमी सांसदों के भ्रष्टाचार पर बोलता है, तो संसद की गरिमा, संवैधानिक पदों के अपमान के नाम पर उसे चुप करा दिया जाता है. परन्तु जब सीएजी जैसी सम्मानजनक संवैधानिक संस्था पक्ष और विपक्ष के 2 मुख्यमंत्रियों 'शीला दीक्षित' और 'नरेन्द्र मोदी' के भ्रष्टाचार और कुशासन की पोल खोलती है तो, तस्वीर ही बदल जाती है! मोदी पर सीएजी की रिपोर्ट को कांग्रेस सही बताती है, और भाजपा गलत, वहीँ शीला दीक्षित पर सीएजी की रिपोर्ट को भाजपा सही बताती है, और कांग्रेस गलत! आखिर ये दोहरा मापदंड क्यों? एक तरफ अम्बानी तो दूसरी तरफ अदानी. दिल्ली से लेकर गुजरात तक देश का पैसा जमकर लूटा जा रहा है. खुद के स्वार्थ के लिए सीएजी की ईमानदारी और विश्वसनीयता पर ऊँगली उठाकर कांग्रेस और भाजपा अपने भ्रष्टाचार और चोरी के काले धन को सफ़ेद नही कर सकते!
When a common man speaks about corruption by politicians then it is said that he's demeaning the constitutional posts and is made silent. But when a constitutional agency like CAG questions the corruption and mis-governance by Sheila Dixit and Narendra Modi, the whole scenario changes. BJP says that the CAG report on Modi is wrong but cites the same for Congress. The vice-versa is true for Congress. Why this dual standard? On one side there is Ambani and on the other side is the Common Man. From Delhi to Gujarat, India's wealth is being looted. People who raise questions on CAG for their own vested interests can't hide the corruption and loot by Congress and BJP.
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संघ की वैचारिक प्रखरता के "चाणक्य" कहे जाने वाले, भारतीय राजनीती के इस दौर के सब से प्रकाण्ड अन्वेषी और बीजेपी को दो बार सत्ता तक पहुचने वाले के.एन.गोविन्दाचार्य जी अरविन्द की तबियत पूछने और मिलने आये थे ! उस से मिलने के बाद जो उन्होंने पत्रकारों को कहा वो वही है जो इस देश में इन दोनों दलों की निर्ल्लज खो-खो से दुखी हर आम-आदमी सोचता है ! अटल जी के मंत्रिमंडल के सबसे योग्य चेहरे अरुण शौरी के बाद गोविन्दाचार्य जी ने भी यही कहा कि अब मुझे तो लगता ही है कि अगला चुनाव बीजेपी और कांग्रेस "हाथ में कमल के फूल" निशान पर, मिल कर लड़ेंगी ! सत्य के इस संघर्ष में कोई तठस्थ नही रह सकता ! या तो आप भ्रष्टाचार के खिलाफ हैं ,या उसके साथ ! अब तो भ्रष्ट कुनबे से भी छनकर लोग व्यक्तिगत ईमानदारी का परिचय देंते हुए जनता के साथ आकर खड़े हो रहे हैं !
आम आदमी पार्टी के फेसबुक वॉल से.






