Uday Prakash : आज दिल्ली की सड़कों पर जो हो रहा है, उसे देख कर लगता है कि शायद १९४७ से पहले जिस तरह हिंदुस्तान की जनता सड़कों पर निकल आई थी, अब फिर से इतने सालों बाद, उसे इसकी ज़रूरत महसूस हो रही है. इस बार का गणतंत्र दिवस पहले जैसा नहीं होगा, इसकी पूरी संभावना है. एक पथराई हुई भ्रष्ट व्यवस्था थी, जिसकी बुनियाद और गुंबदें, एक नयी लोकतांत्रिक, अहिंसावादी, विनम्र, सत्याग्रही जन-आंदोलन के कारण हिल रही हैं. यह भी लगता है कि यह आंधी व्यापक हो जायेगी. मौसम बदलेगा !
शंभूनाथ शुक्ल : यह लड़ाई अरविंद बनाम बस्सी नहीं बल्कि एक चुनी गई राज्य सरकार की अस्मिता की लड़ाई है। एक मुख्यमंत्री क्यों एक दरोगा के समक्ष हाथ बांधे घूमे। अरविंद केजरीवाल डट जाएं और दिल्ली को एक फौजदारी राज्य बनवा कर ही मानें। तब वे न तो बस्सी के गुलाम रहेंगे न उप राज्यपाल के। (सरकार दिल्ली की और दरोगा व सिपाहियों की भरती तथा उनको थाने बांटने में घूस खाए केंद्र का मंत्री!)
Prem Prakash : संवैधानिक प्रक्रिया से जनता के द्वारा चुना हुआ मुख्यमंत्री डंके की चोट पर आरोप लगा रहा है कि दिल्ली की पुलिस पूरी दिल्ली से वसूली करके देश के गृह-मंत्रालय को पैसा पहुंचाती है. दिल्ली की पूरी कैबिनेट सड़क पर है. भारत की राजधानी आज इतिहास लिखने बैठी है. ये है कांग्रेस की सच्चाई. भाजपा और उसके समर्थक संविधान, संस्था, लोकतंत्र, सिस्टम आदि साद-गल चुके शब्दों के साथ हाय-तोबा मचाये हुए हैं. सेक्स के रैकेट पुलिस चलाएगी. ड्रग्स के रैकेट पुलिस चलाएगी और गृहमंत्री के साथ खड़ी पूरी भाजपा २०१४ के सपने में खलल पड़ते देखकर चुने हुए मुख्यमंत्री को नक्सलाईट कहेगी. क्या मिला-जुला खेल है. इस सड़ांध के निहितार्थ अब साफ़ हैं. आज भाजपा ने फिर साबित किया कि वो हर पाप में कांग्रेस के साथ खड़ी है.. यह भ्रष्ट व्यवस्था तोड़ दो…. एक धक्का और दो…. अरविन्द केजरीवाल नाम का यह धूमकेतु भारत भाग्य-विधाता हो सकता है.. हिम्मत हो तो रुख मोड़ दो… वर्ना गद्दी छोड़ दो..
जाने माने साहित्यकार उदय प्रकाश, वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ला और प्रेम प्रकाश के फेसबुक वॉल से.





