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अरुण खरे और कुमार आनंद का इस्तीफा, मीडिया से संबंधित कई अन्य खबरें

अरुण खरे ने हरिभूमि से इस्तीफा दे दिया है. वे दिल्ली ब्यूरो में कार्यरत थे. अरुण खरे के इस्तीफा देने पर वरिष्ठ पत्रकार अरविंद कुमार सिंह ने फेसबुक पर लिखा है-  

अरुण खरे ने हरिभूमि से इस्तीफा दे दिया है. वे दिल्ली ब्यूरो में कार्यरत थे. अरुण खरे के इस्तीफा देने पर वरिष्ठ पत्रकार अरविंद कुमार सिंह ने फेसबुक पर लिखा है-  

''वरिष्ठ पत्रकार भाई अरुण खरे ने हरिभूमि से 14 साल की सेवाओं के बाद इस्तीफा दे दिया…मैने उनके साथ काम किया दो सालों स अधिक तक कनाट प्लेस आफिस में…बात राजनीति की है, या फिर कला संगीत की उनकी प्रतिभा और ज्ञान अनूठा था…बुंदेलखंड के तो वो इंसाइक्लोपीडिया…उनके सारे साथी अच्छे पदो पर बैठे थे..लेकिन वो पद और कुरसी के बजाय खांटी पत्रकारिता करते रहे…संघर्ष जैसे उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया… जबलपुर में संपादक रहे तो मैने एक यात्रा की थी…वो यादगार यात्रा..हम दोनों ने भेड़ाघाट से लेकर रानी दुर्गावती की समाधि और जाने क्या-क्या देखा…खूब गपशप की…काश हिंदी पत्रकारिता में ऐसे खांटी पत्रकारों को सही जगह मिले..आलोचना में मैं यकीन नहीं करता…हरिभूमि में संपादक रहने के दौरान उनकी प्रतिभा को देख कर मुझे यही लगा था कि यह उनका वनवास काल है…आज भी मैं मानता हूं कि त्यागपत्र देकर उन्होंने अपना वनवास काट लिया है..आगे जो होगा अच्छा होगा…मेरी शुभकामनाएं और समर्थन हमेशा उनके साथ है…''


कानपुर के रिपोर्टर कुमार आनंद ने श्री न्यूज़ से काम छोड़ा

श्री न्यूज़ से सूचना है कि कानपुर के रिपोर्टर कुमार आनंद ने इस्तीफा दे दिया है. खुद कुमार आनंद कहते हैं: श्रीन्यूज के हालात अब बद से बदत्तर है डेस्क में बैठे कुछ बेवकूफ लोगो को यह  तक नहीं मालूम है की खबर क्या होती है वह सिर्फ और सिर्फ मालिकान की  चापलूसी कर अपना उल्लू सीधा कर रहे है कुछ ऐसा ही कानपुर रिपोर्टर कुमार आनंद यानी की मेरे साथ भी हुआ ……. ११ .०१.२०१४ दिन रविवार को जब शाम को मैंने एक खबर के लिए फोन किया तो डेस्क में बैठे महाशय को यह तमीज  नहीं थी की किस्से कैसे बात की जाती है शायद श्री न्यूज़ अब गर्त की तरफ जा रहा है तभी ऐसे गधो से डेस्क पर काम ले रहा है मै अपने इस कालम के माध्यम से उन महाशय को सिर्फ इतना बताना चाहता हूँ की डेस्क में काम करने से गधा कभी भी इंसान नहीं बन सकता है और शायद इंसान गधो के बीच काम  नहीं कर सकता है इसलिए मैंने श्री न्यूज़ चैनल से काम छोड़ दिया है


स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार रैनन मुखर्जी का निधन

वयोवृद्ध स्वतंत्रता सेनानी और प्रसिद्ध पत्रकार रैनन मुखर्जी का मंगलवार को निधन हो गया। यह जानकारी उनके परिवार के एक सदस्य ने दी। मुखर्जी 86 वर्ष के थे और उनके परिवार में एक बेटी है। महात्मा गांधी के संपर्क में आने के बाद वह एक स्कूली छात्र के रूप में स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े थे। उन्हें राशिद अली दिवस मनाने के दौरान 1946 में गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके बाद वह आल इंडिया फारवर्ड ब्लाक से जुड़े थे और दो बार विधानसभा का चुनाव लड़ा था। वह 1959 में पश्चिम बंगाल में खाद्य आंदोलन से भी जुड़े थे। उन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत फारवर्ड ब्लॉक के बंगाली मुखपत्र लोकसेवक से की थी। वह लोकमत, गनबार्ता, दैनिक बसुमती, भारतकथा, सतजुग, बर्तमान और सम्बाद प्रतिदिन से भी जुड़े थे। उन्होंने बांग्लादेश मुक्ति संग्राम को कवर किया था और बंगबंधु शेख मुजिबुर रहमान के संपर्क में आए थे। उन्होंने उनकी जीवनी मुजिबुर रहमान 'आमी मुजिब बोल्ची' लिखी थी, जिसे काफी सराहना मिली थी। उन्होंने लगभग 30 किताबें लिखी थी जिसमें शहीद खुदीराम बोस, फारवर्ड ब्लाक नेता हेमंत कुमार बसु और मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता प्रमोद दासगुप्ता की जीवनी शामिल है। उनका पार्थिव शरीर फारवर्ड ब्लॉक राज्य समिति के दफ्तर में ले जाया गया जहां पार्टी के राज्य सचिव अशोक घोष ने उन्हें पुष्प अर्पित किया। इसके बाद प्रेस क्लब में पत्रकारों और माकपा पोलितब्यूरो के सदस्यों बिमान बोस और सूर्यकांत मिश्रा ने उन्हें पुष्प अर्पित किया। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तरफ से भी पुष्प अर्पित किया गया। उनके पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि मुखर्जी ने मरणोपरांत शरीर दान करने का वादा किया था। उनका शव एनआरएस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल को दान कर दिया जाएगा।


पत्रकार पर हमला करने वाले पर मामला दर्ज

संगरूर : दैनिक जागरण के पत्रकार पर सोमवार को हुए हमले को लेकर आज प्रेस क्लब संगरूर द्वारा इमरजेंसी बैठक बुलाई गई। बैठक दौरान प्रेस क्लब संगरूर व पंजाब यूनियन आफ जर्नलिस्ट ने दैनिक जागरण के पत्रकार सचिन धनजस पर हुए हमले के आरोप के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया। थाना इंचार्ज राजविंदर सिंह ने कहा कि दोषी को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। दूसरी तरफ पंजाब भर में इस हमले की निंदा की जा रही है। बैठक दौरान प्रेस क्लब के प्रधान गुरदीप सिंह लाली ने कहा कि पत्रकार पर किए गए ऐसे हमले को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि पुलिस प्रशासन ने आरोपी के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई न की तो राज्य स्तरीय संघर्ष आरंभ किया जाएगा। मामले के प्रति पंजाब यूनियन आफ जर्नलिस्ट को भी सूचित कर दिया गया है। इस मौके पर अजायब सिंह मोरांवाली, रूपक शर्मा, बलदेव सिंह जनूहा, राजिंदर सिंगला, कर्मचंद शर्मा, नवल गर्ग, हरविंदर सिंह खालसा, संदीप कुमार, मनदीप सिंह, लखदीप सिंह अटाल, पुनीत गर्ग, भूपिंदर सुनामी, जेपी गोयल, भूपिंदर सिंह वालिया, राजेश कोहली, नरेश कुमार, हरजिंदर भोला, राज कुमार वर्मा, संजय वर्मा, बेअंत कौर आदि उपस्थित थे।


जर्नलिस्ट क्लब मालेरकोटला ने की निंदा

मालेरकोटला (संगरूर) : संगरूर में दैनिक जागरण के पत्रकार सचिन धनजस पर हुए हमले की सख्त शब्दों में निंदा करते हुए जर्नलिस्ट क्लब मालेरकोटला ने पुलिस प्रशासन से मांग की कि आरोपी को तुरंत गिरफ्तार किया जाए, अन्यथा प्रदेश स्तरीय संघर्ष किया जाएगा। यह मांग मंगलवार को जर्नलिस्ट क्लब के प्रधान पारस जैन की अध्यक्षता में हुई बैठक दौरान पत्रकारों ने एसएसपी संगरूर से की। पत्रकारों ने कहा कि फील्ड में काम करने वाले पत्रकारों की जान हमेशा जोखिम भरी होती है। इसलिए पत्रकारों की सुरक्षा को यकीनन बनाने की खातिर ठोस कदम उठाए जाएं। पत्रकारों की मांग को नजरंदाज करने का नतीजा यह निकला कि दैनिक जागरण के पत्रकार पर हमला हुआ। बैठक में क्लब के सीनियर उपप्रधान प्रदीप सिंगला, जहूर अहमद चौहान, भूपेश जैन, मुंशी फारुक, वरिंदर जैन, परमजीत कुठाला, एसके हुसैन, सिराजद्दीन दिउल, डा. राकेश शर्मा, अखिलेश जैन, जनेश कुमार जैन, गौरव खुल्लर, महेन्द्र गुप्ता आदि उपस्थित थे।


बमियाल-पड़ोसी ने किया पत्रकार पर हमला

बमियाल : बमियाल में शादी समारोह की तैयारी के लिए गली में अपने घर के बाहर सफाई  करवा रहे हिन्दी दैनिक अखबार के पत्रकार मुनीश गुप्ता के पड़ोसी ने तेजधार हथियार से हमला कर घायल कर दिया। जिसे उपचार के लिए नरोट जैमल सिंह के सरकारी अस्पताल में सुबह भर्ती करवाया गया। इस संदर्भ में जानकारी देते हुए घायल मुनीष ने बताया कि उनके चाचा के घर शादी की तैयारियां चल रही थी। सुबह घर में कीर्तन व लंगर का अयोजन था जिसके लिए वह घर के बाहर सफाई करवा रहा था कि पड़ोसी ने बिना वजह गाली गलौच करना शुरू कर दिया। जब उसने रोका तो पड़ोसी ने किसी तेजधार हथियार से उस पर हमला कर घायल कर दिया। जिससे उनके कान में गंभीर चोट लग गई है, उसके बाद उसके परिजनों ने उपचार के लिए नरोट जैमल सिंह सरकारी अस्पताल में ले जायगा। मुनीष का इलाज करने वाली डाक्टर रुचि शर्मा ने बताया कि कान के भीतर गंभीर चोट लगने के चलते मरीज को शुरुआती उपचार के बाद पठानकोट सिविल अस्पताल रेफर कर दिया गया है। उधर मुनीष के चाचा ने बताया कि मामले की शिकायत पुलिस थाना नरोट जैमल सिंह में दर्ज करवा दी गई है। इस संबंध में संपर्क करने पर डीएसपी विर्क ने कहा कि पुलिस चौकी बमियाल व नरोट जैमल सिंह को घटना स्थल पर ब्यान लेने व जांच के लिए भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नही जाएगा।


तीन मीडिया संस्थानों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा

नई दिल्ली: पूर्व न्यायाधीश स्वतंत्र कुमार ने तीन मीडिया संस्थानों टाइम्स नाउ,  इंडियन एक्सप्रेस और सीएनएन आईबीएन के खिलाफ हाईकोर्ट में मानहानि का  केस दायर किया है। मानहानि के इस मामले में तीनों मीडिया संस्थानों से 5 करोड़ रुपए देने की बात कही गई है। गौरतलब है कि जस्टिस स्वतंत्र कुमार पर एक इंटर्न ने यौन शोषण का आरोप  लगाते हुए कोर्ट में याचिका दायर की थी। हालांकि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस स्वतंत्र कुमार को राहत दे दी है।


तो इस वजह से मीडिया से बात नहीं करती हैं मायावती

अकसर ही ये सवाल उठता है कि बीएसपी सुप्रीमो मायावती मीडिया से बात क्यों नहीं करतीं. इसका जवाब खुद मायावती ने दिया है. उनका कहना है कि मीडिया में कई लोगों की सोच दलित विरोधी है इसीलिए वह इंटरव्यू से बचती हैं. सावधान रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, 'मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और मैं इसका बहुत सम्मान करती हूं. मगर मीडिया में अभी भी कई लोग ऐसे हैं, जिनकी सोच दलित विरोधी है. इसीलिए जब मीडिया के लोग मेरा अलग-अलग इंटरव्यू लेना चाहते हैं, तो मैं काफी बचती हूं.' मीडिया पर तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने  कहा, 'जब भी मैंने अलग-अलग इंटरव्यू दिया तो उन्होंने जो खबर छापी, वो ज्यादातर तोड़ मरोड़कर छापी. अब अगर मैं उस पर सफाई भी दूं कि मैंने ऐसा नहीं वैसा कहा था, तो आप नहीं मानेंगे आसानी से. क्योंकि आप लोग उसके गवाह नहीं है. जब भी इंटरव्यू दिया तो तोड़ मरोड़ कर छापा. ये मेरा पुराना तजुर्बा रहा है.' बसपा सुप्रीमो ने कहा, 'इसीलिए मैं लिखित सवाल जवाब के जरिए बात करना ज्यादा पसंद करती हूं, इसमें गड़बड़ी होने की थोड़ी कम गुंजाइश होती है.'


नबान्न में मीडिया के प्रवेश पर प्रतिबंध

कोलकाता : पश्चिम बंगाल सरकार ने आज राज्य सचिवालय नबान्न में मीडियाकर्मियों की आवाजाही पर रोक लगा दी जिससे पत्रकारों के बीच कड़ा आक्रोश है। कोलकाता पुलिस के पुलिस उपायुक्त : रिजर्व फोर्स : अशोक कुमार विश्वास द्वारा जारी एक सरकारी सकरुलर में संचालन प्रक्रिया के मापदंडों की व्याख्या की गयी है जिसमें नबान्न परिसर में मीडियाकर्मियों के प्रवेश को सीमित करना तथा साथ ही सचिवालय में प्रेस कार्नर से अतिरिक्त अन्य जगहों पर उनकी आवाजाही पर रोक लगाना शामिल है।

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