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अशोक पांडेय की पॉलिसी से डूब गया नेटवर्क 10, प्रसारण बंद

यशवंतजी, देहरादून से ऑन एयर होने वाले नेटवर्क 10 न्यूज चैनल का बाजा बज गया है। पहले से बैसाखियों के सहारे चल रहा नेटवर्क 10 न्यूज चैनल अपनी आखरी सांसे ले रहा है। इस वक्त चैनल का प्रसारण बंद पड़ा हुआ है। अब उम्मीद कम ही है कि यह चैनल फिर से ऑन एयर हो पाएगा। पहले से ही इस चैनल में गिने चुने कर्मचारी बचे हुए थे। इस चैनल के साथ काम कर रहे कर्मचारियों की सबसे बड़ी परेशानी अपनी बकाया सैलरी को चुकता कराने की है।

यशवंतजी, देहरादून से ऑन एयर होने वाले नेटवर्क 10 न्यूज चैनल का बाजा बज गया है। पहले से बैसाखियों के सहारे चल रहा नेटवर्क 10 न्यूज चैनल अपनी आखरी सांसे ले रहा है। इस वक्त चैनल का प्रसारण बंद पड़ा हुआ है। अब उम्मीद कम ही है कि यह चैनल फिर से ऑन एयर हो पाएगा। पहले से ही इस चैनल में गिने चुने कर्मचारी बचे हुए थे। इस चैनल के साथ काम कर रहे कर्मचारियों की सबसे बड़ी परेशानी अपनी बकाया सैलरी को चुकता कराने की है।

चैनल के कर्मचारियों से पता चला है कि एक कर्मचारी की 40 से 50 हजार की सैलरी अभी तक पेंडिंग पड़ी है। चैनल प्रबंधन बकाया रकम चुकता करने को तैयार नहीं है। ऐसे में कर्मचारियों का कहना है कि अगर चैनल पर ताला लगता है तो सैलेरी लेकर ही यहां से जाएंगे अन्यथा आंदोलन का रास्ता इख्तियार किया जाएगा। कर्मचारी चैनल के बंद होने के लिए सीधे तौर पर एक्‍जीक्‍यूटिव एडिटर अशोक पांडेय को जिम्‍मेदार मानते हैं। उनका कहना है कि उन्‍होंने अपना भला तो कर लिया लेकिन चैनल और कर्मचारियों को गड्ढे में ढकेल दिया।

आपको एक बार फिर से याद दिलाते हैं कि नेटवर्क 10 कैसे खड़ा हुआ और इसके डूबने के पीछे कौन लोग जिम्मेदार है। विधानसभा चुनाव 2012 के दौरान उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से नेटवर्क 10 नाम से एक चैनल की लॉंन्चिंग की तैयारी शुरू हुई। उस वक्त इस चैनल की कमान बसंत निगम को सौंपी गई थी। शिमला बाईपास के पास एक बड़ी से बिल्डिंग में चैनल का ऑफिस खोलने की तैयारी की गई। देहरादून में नेटवर्क 10 के बडे बड़े पोस्टर लगाए गए। इस तरह का माहौल बनाया गया कि मीडिया जगत में नेटवर्क 10 कोई बड़ा करिश्मा करने वाला हो।

इसके बाद इस चैनल के साथ अशोक पांडेय एक्‍जीक्‍यूटिव एडिटर के रूप में जुड़ गए। चैनल प्रबंधन से नेटवर्क 10 को 'सच की हद' तक ले जाने के दावे के साथ भारी रकम खर्च कर आधुनिक मशीनें भी लगवाई गईं। पीसीआर, से लेकर एडिटिंग, एडीटोरियल और कैमरा यूनिट तमाम सामान पर खूब पैसा खर्च किया गया। यानी मालिक को शुरू में ही दूह लिया गया। अशोक पांडे की अगुवाई में विधानसभा चुनाव 2012 से पहले ही इस चैनल को जैसे तैसे ऑन एयर कर दिया गया। बाद में अशोक पांडेय ने बसंत निगम को किनारे करके चैनल पर अपना एकाधिकार कर लिया।

यशवंतजी, आपको बताना चाहूंगा कि शुरुआत में इस चैनल ने अपने स्ट्रिंगर तक को मोटी सैलरी पर रखा था। सैलरी के लालच में आकर ही दूसरे चैनल के साथ काम कर रहे रिपोर्टरों नेटवर्क 10 का दामन थाम लिया। जैसे ही विधानसभा चुनाव निपटे और कांग्रेस की सरकार बनी चैनल की हालत पतली होने लगी। चैनल के कर्ताधर्ता अशोक पांडे और इनकी टीम की पॉलिसी इस चैनल को ले डूबी। मुश्किल दरअसल इस बात की थी कि चैनल ने इन लोगों पर आंख मूंदकर भरोसा कर लिया था। और इन लोगों ने आंख खोलकर चैनल को लूट लिया।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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