क्या आप बापू से सवाल नहीं करना चाहते…? असीम के साथ आइए…राजघाट…आज शाम 3 बजे…लोकतंत्र के लिए…आवाज़ की आज़ादी के लिए… मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक स्थानीय वकील की शिकायत पर कानपुर के युवा कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी की वेबसाइट 'कार्टून अगेंस्ट करप्शन डॉट कॉम’ पर प्रतिबन्ध लगा दिया है। असीम पर आरोप है कि उन्होंने अपने कार्टूनों के जरिए देश की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। मैंने असीम त्रिवेदी के भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम वाले कार्टून देखें हैं, वे भ्रष्टाचार पर तीखी और सीधी चोट करते है।
उनमें किसी का मजाक नहीं बल्कि आम आदमी की भावनाओं की, गुस्से की वास्तविक अभिव्यक्ति है। मेरी निगाह में यह सिर्फ कार्टूनिस्ट पर प्रतिबन्ध लगाना नहीं बल्कि मीडिया और सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर सुनियोजित तरीके से नियन्त्रण की शुरुआत है। आखिर कोई किस आधार पर किसी वेबसाइट, लेख, नाटक, पेन्टिंग या किताब पर प्रतिबन्ध लगा सकता है? सच कहना क्या कोई अपराध है?
हमारे नेता या सरकार इतनी कमजोर या डरपोक क्यो है? वे असलियत से क्यो डरते हैं? हमारे बोलने की, लिखने की, कहने की आजादी पर रोक क्यो लगाना चाहते हैं? ये केवल अभिव्यक्ति की आज़ादी का सवाल नहीं है, ये केवल लोकतांत्रिक हकों का हनन भर भी नहीं है, बल्कि ये एक चुनौती है। असल में ये हमारे संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है। असीम का आरोप है कि वेबसाइट को बैन करने की भी मुंबई पुलिस ने कोई जानकारी उन्हें नहीं दी। वेबसाइट की प्रोवाइडर कंपनी बिगरॉक्स.कॉम ने एक मेल द्वारा असीम को साइट बंद करने की सूचना दी। जब बिगरॉक्स कंपनी से बात हुई तो उन्होंने असीम को मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच से संपर्क करने को कहा। क्राइम ब्रांच में कोई बताने वाला नहीं कि वेबसाइट को बैन क्यों किया गया? या साइबर एक्ट की किन धाराओं में केस दर्ज किया गया है? अब पता चला है कि महाराष्ट्र के बीड़ जिला अदालत ने स्थानीय पुलिस को असीम पर राष्ट्रद्रोह का केस दर्ज करने का आदेश भी दे दिया है। ये और भी शर्मनाक हरकत है लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई, अब बॉम्बे हाईकोर्ट में भी असीम और अन्य के खिलाफ राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान की याचिका मंज़ूर कर ली गई है।
आरोप है कि उनके कार्टूनों मे संविधान और संसद का मजाक उड़ाया गया है। पर सवाल ये भी है कि जब सांसद संसद में हन्गामा करते हैं, खुलेआम नोट लहराते हैं, लोकपाल बिल फाड़ते हैं, चुटकुलेबाजी करते हैं तब क्या वे संसद का मजाक नहीं उड़ाते? देश की जनता का अपमान नहीं करते? क्या सांसदों नेताओं का अपमान लोकतंत्र के अपमान से बड़ा है, जो हमारे नेता रोज़…हर घंटे करते हैं… मैं असीम त्रिवेदी को आश्वस्त करना चाहता हूँ कि वह अकेले नहीं हैं। सरकार की इस गैरलोकतांत्रिक कारवाई के खिलाफ, हम सब उनके साथ खड़े हैं…
असीम आज राजघाट पर कार्टून बनाएंगे…वो बापू की समाधि पर बापू से पूछने जा रहे हैं…कि क्या ऐसा ही मुल्क चाहते थे बापू…क्या ऐसी ही आज़ादी चाहते थे वो…जहां हमें जीने का अधिकार तो मिले, लेकिन सांसें लेने के लिए इजाज़ल लेनी पड़े…जहां अपनी बात कहने के लिए हम तरीकों और रिवाजों के बंधन में हो…जहां राज्य की हिंसा आज भी वैदिकी हिंसा हो…हम आज असीम के साथ शाम 3 बजे राजघाट पर इकट्ठा हो रहे हैं…क्या आप आ रहे हैं…असीम कार्टून बनाएंगे…और हम बापू से कुछ सवाल पूछना चाहते हैं…क्या आप बापू से कोई सवाल नहीं पूछना चाहते…कि बापू क्या आपके हिंद में यही स्वराज है…? याद रखें… जगह—राजघाट…बापू का समाधिस्थल दिन — आज, रविवार समय — शाम 3 बजे….
न्यूज24 में कार्यरत पत्रकार मयंक सक्सेना की रिपोर्ट.





