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आंसुओं के बीच आजतक से विदा हुए कमर वहीद नकवी

31 मई कई बदलावों का साक्षी बना. स्‍टार न्‍यूज इस दिन आखिरी बार प्रसारित हुआ तो आजतक से न्‍यूज डाइरेक्‍टर कमर वहीद नकवी रिटायर हो गए. न्यूज डायरेक्टर के रूप में लंबे समय से कार्यरत कमर वहीद नकवी वो शख्स हैं जिन्होंने आजतक नाम को जन्म दिया था. वे एसपी सिंह के सहायक हुआ करते थे. नकवी ने आजतक के साथ पहली पारी जून 1995 में शुरू की. एसोसिएट एडिटर उनका डिजीगनेशन था. नंबर टू पोजीशन पर थे. एसपी सिंह संपादक थे.

31 मई कई बदलावों का साक्षी बना. स्‍टार न्‍यूज इस दिन आखिरी बार प्रसारित हुआ तो आजतक से न्‍यूज डाइरेक्‍टर कमर वहीद नकवी रिटायर हो गए. न्यूज डायरेक्टर के रूप में लंबे समय से कार्यरत कमर वहीद नकवी वो शख्स हैं जिन्होंने आजतक नाम को जन्म दिया था. वे एसपी सिंह के सहायक हुआ करते थे. नकवी ने आजतक के साथ पहली पारी जून 1995 में शुरू की. एसोसिएट एडिटर उनका डिजीगनेशन था. नंबर टू पोजीशन पर थे. एसपी सिंह संपादक थे.

नकवी ने नवंबर 2000 में आजतक को विदा कह दिया था. तब उनका पद चीफ एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर था. वे इब्राहिम द्वारा लाए जा रहे उर्दू न्यूज चैनल फलक के कर्ताधर्ता बने. लेकिन कई वजहों से यह चैनल लांच नहीं हो सका. फरवरी 2004 में नकवी जी ने आजतक में फिर वापसी की, न्यूज डायरेक्टर के पद पर. नकवी ने करियर की शुरुआत नवभारत टाइम्स, मुंबई से की थी. नकवी जी को उनके साथियों ने विदाई दी.

गुरुवार को आयोजित विदाई समारोह में 'दादा' के प्‍यार की दादागिरी को याद किया गया. कई मौके पर भावनाओं का ज्‍वार बहा. कई मौके मुस्‍कराने के भी आए. कुछ प्‍यारी यादें, कुछ अच्‍छी यादों को ज्‍यादातर लोगों ने साझा किया. टीवी टुडे समूह के साथ कुल तेरह साल का साथ छोड़कर विदा होने इतना आसान नहीं था. कर्मचारियों में प्‍यार से 'दादा' कहे जाने वाले नकवी साहब के आंखों में कभी आंसू के बूंद झलके तो कुछ यादों ने चेहरे पर मुस्‍कान भी खिलाया.

अरुण पुरी ने नकवी साहब के योगदान को याद किया तथा उनके कार्यक्षमता की सराहना की. बहुत लोगों को बोलने का मौका मिला. सुमित अवस्‍थी, आलोक श्रीवास्‍तव, श्‍वेता सिंह, अभिसार सबने प्‍यार भरी 'दादागिरी' को याद किया. पर सुप्रिय प्रसाद कुछ बोल ही नहीं पाए. नम्‍बर एक न्‍यूज चैनल के शीर्ष पर बैठे इस शख्‍स के मन के भीतर छिपा देशज बच्‍चा आखिरकार बाहर निकल आया. मतलब की दिल्‍ली में सुप्रिय प्रसाद शायद दुमका का संस्‍कार नहीं भूल पाए हैं.

यही कारण रहा कि जब दादा विदा हो रहे थे तो सुप्रिय के आंखों से आंसू बह रहे थे. दादा ने खूब समझाया पर सुप्रिय के आंसू बंद नहीं हुए. दादा भी भावुक हो उठे तथा एक दूसरे के गले मिलकर एक दूसरे के कंधों को गिला किया. इस दौरान माहौल बहुत भावुक हो गया था. विदाई के समय देखकर प्रतीत हो रहा था कि एक बेहतर टीम लीडर कैसा होता है. किस तरह से अपनी टीम को लीड करता है. आजतक के साथ अपने कई सालों के साथ को दादा ने भी बढि़या अनुभव बताया.

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