देश के सबसे प्रतिष्ठित कहे जाने वाले भारतीय पत्रकारिता संस्थान यानी आईआईएमसी में एडमिशन की प्रक्रिया आखिरी चरण में है और डायरेक्टर की मनमानी की चर्चा भी पूरे शबाब पर है। खबर है कि 28 जून से होने वाले इंटरव्यू से ऐन पहले न्यूज़ जर्नलिज्म के विभागाध्यक्ष शिवाजी सरकार को ही बोर्ड से हटा दिया गया है। इंटरव्यू बोर्ड में अब एक दूसरे सदस्य हेमंत जोशी को रख दिया गया है। ग़ौरतलब है कि हेमंत जोशी शुरुआत से ही जुगाड़ के भरोसे इस संस्थान में आए बताए जाते हैं। पिछले साल उन्हें ऐतिहासिक ढंग से बिना किसी प्रक्रिया के प्रमोशन भी दे दिया गया था।
बताया जाता है कि हेमंत जोशी को रखे जाने का आदेश अचानक मंगलवार को जारी हुआ है जिसमें ऐडमिशन कमेटी की अध्यक्ष जय चंदीराम की बजाय डायरेक्टर सुनीत टंडन के हस्ताक्षर हैं। ये इंटरव्यू 28, 29 और 30 जून को होने हैं, जिसमें आईआईएमसी के चार केंद्रों दिल्ली, ढेंकानाल, हरिद्वार और अमरावती के लिए 160 विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा। आईआईएमसी में यह चर्चा जोरों पर है कि संस्थान को मिले करोड़ों के बजट को मनमाने ढंग से खर्च कर देने वाली लॉबी अब एडमिशन में भी मनमानी चाहती है। शिवाजी सरकार से इस लॉबी का पुराना विवाद रहा है और पिछले साल भी ऐन ऐडमिशन से पहले उन्हें इंटरव्यू बोर्ड से हटा दिया गया था।
शिवाजी सरकार से संपर्क करने पर उन्होंने कोई प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया। बताया जाता है कि हाल ही में आईआईएमसी में योजना आयोग से करीब 48 करोड़ रुपए आए थे जिनके इस्तेमाल में भारी गड़बड़ियों के आरोप हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चित डायरेक्टर सुनीत टंडन का करोड़ों का टॉयलेट भी है जिसपर योजना आयोग की तर्ज़ पर ही कई करोड़ रुपए फूंके गए हैं। लोगों के बीच यह चर्चा जोरों पर है कि ऑफिस के टॉयलेट में जकूज़ी बाथ और ऑटोमेटिक शावर्स क्यों लगाए गए है?





