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आईआईएमसी नवप्रवेशी छात्रों ने छात्रावास के लिए निर्णायक लड़ाई लड़ने का ऐलान किया

भारतीय जनसंचार संस्थान में छात्रावास से वंचित छात्रों को छात्रावास मिले, इसकी मांग पिछले 17 फरवरी 2013 से निरंतर की जा रही है. 5 अगस्त, सोमवार को भारतीय जनसंचार संस्थान के नवप्रवेशी छात्रों ( 2013-14) को इस बाबत जागरूक करने के लिए कैंपस में नए छात्रों छात्रावास की अहमियत और इसके अभाव में होने परेशानियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई. छात्रों के बीच सैंकड़ों पर्चे बांटे गए, जिसमें छात्रावास न होने से पैदा होने वाली समस्याओं के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी मौजूद थी. इसके अलावा,छात्रों से मांग-पत्रों पर दस्तख़त करने के लिए आग्रह किया गया. 

भारतीय जनसंचार संस्थान में छात्रावास से वंचित छात्रों को छात्रावास मिले, इसकी मांग पिछले 17 फरवरी 2013 से निरंतर की जा रही है. 5 अगस्त, सोमवार को भारतीय जनसंचार संस्थान के नवप्रवेशी छात्रों ( 2013-14) को इस बाबत जागरूक करने के लिए कैंपस में नए छात्रों छात्रावास की अहमियत और इसके अभाव में होने परेशानियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई. छात्रों के बीच सैंकड़ों पर्चे बांटे गए, जिसमें छात्रावास न होने से पैदा होने वाली समस्याओं के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी मौजूद थी. इसके अलावा,छात्रों से मांग-पत्रों पर दस्तख़त करने के लिए आग्रह किया गया. 

सभी नए छात्र चाहे वे अंग्रेजी पत्रकारिता के छात्र रहे हों या हिंदी के. कोई रेडियो एवं टेलीविजन के छात्र थे, तो कोई विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग के, सबों ने छात्रावास की इस समस्या को बेहद गंभीर माना. यही वजह थी कि नवप्रवेशी छात्रों ने एक आग्रह पर न सिर्फ मांग-पत्रों पर अपने-अपने दस्तख़त किए, बल्कि दर्जनों की संख्या में मांग-पत्र और पर्चा अपने साथ भी ले गए, ताकि अपने नए सहपाठी से आईआईएमसी सभागार या क्लाम रूप में उनसे साइन लिए जा सकें.

नए छात्रों का यह उत्साह, वह भी शैक्षणिक-सत्र के पहले दिन एक नई उम्मीद जगा दी. नईदिल्ली कैंपस में छात्रों को हॉस्टल मिले, इसकी वक़ालत अंग्रेजी, हिंदी, रेडियो एवं टेलीविजन और एड एंड पीआर की छात्राओं ने भी किया. सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक कुल 175 मांग-पत्र पर छात्र-छात्राओं ने अपने दस्तख़त किए. इन सभी मांग-पत्रों को एकत्र कर उसकी एक प्रति शीघ्र ही नत्थी कर रजिस्टर्ड डाक से पावती (एकनॉलेजमेंट) सहित सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी को उनके कार्यालय ए विंग, शास्त्री भवन, नईदिल्ली कार्यालय भेजा जाएगा. मांग-पत्र की फोटो प्रतिलिपि एक प्रति महानिदेशक, आईआईएमसी श्री सुनित टंडन को प्रत्यक्ष रूप से सौंपा जाएगा.

मांग-पत्र की तीसरी प्रति संसद की स्थायी समिति (स्टैंडिंग कमेटी) को रजिस्टर्ड डाक से पावती संलग्न कर भेजी जाएगी. सोमवार 5 अगस्त को दोपहर क़रीब ढ़ाई बजे वर्ष 1993-94 सत्र ( हिंदी पत्रकारिता विभाग) के पूर्व छात्र और वरिष्ठ पत्रकार जितेंद्र कुमार के नेतृत्व में संस्थान के पूर्व छात्रों का एक शिष्टमंडल जिसमें स्वतंत्र पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव, नवीन कुमार, वेद प्रकाश और अभिषेक रंजन सिंह शामिल थे.

इन लोगों ने एक ज्ञापन भारतीय जनसंचार संस्थान के महानिदेशक सुनित टंडन को सौंपा. संस्थान के महानिदेशक ने हमेशा की तरह वही बात दोहराई कि संस्थान छात्रों के लिए छात्रावास बनाने के प्रति गंभीर है, लेकिन डीडीए और पर्यावरण विभाग से मंजूरी मिलना बाकी है. शिष्टमंडल की ओर से कहा गया कि इस तरह की बातें, पिछले कई वर्षों से कही जा रही है, लेकिन बाधाओं का अंत नहीं हो पा रहा है और छात्र छात्रावास के अभाव में जेएनयू के छात्रावासों में अनधिकृत रूप से भोजन करने को विवश हैं, जो संस्थान की गरिमा के लिए सही नहीं है. लिहाज़ा संस्थान के महानिदेशक अब यह तय करें और घोषणा करें कि छात्रावास निर्माण की प्रक्रिया कब शुरू होगी.

महानिदेशक महोदय ने एक अतार्किक वक्तव्य दिया, उन्होंने कहा कि आप लोग नज़दीक में कोई फ्लैट की तलाश करें, जिसे छात्रावास के रूप में इस्तेमाल किया जाए, इसपर शिष्टमंडल में शामिल संस्थान के पूर्व छात्रों ने कहा कि मकान खोजने का काम संस्थान का छात्रों का नहीं. इस मसले पर उन्होंने सुझाया कि भारतीय जनसंचार संस्थान को चाहिए कि एक-दो महीने में जिस स्थान पर छात्रावास बनना है, वहां शिलान्यास कर दे साथ ही छात्रावास बनने तक वह इसे लेकर एक ऑपेन टेंडर ( खुली निविदा) जारी करे, ऐसा करने से कई प्रस्ताव सामने आएंगे और संस्थान उनके से किसी एक का चयन करे. यह प्रक्रिया बेहद आसान है, क्योंकि ढेंकनाल कैंपस के अलावा अमरावती, आइजॉल, कोट्टयम और श्रीनगर कैंपस में संचालित अध्ययन केंद्र और छात्रावास भी फि़लहाल किराए के भवनों में संचालित हो रहे हैं. अगर वहां ऐसी व्यवस्था की जा सकती है, तो नईदिल्ली मुख्य परिसर में छात्रावास के लिए ऐसा क्यों नहीं किया जाता. हालांकि इस विषय में महानिदेशक महोदय संतोषप्रद उत्तर नहीं दे पाए.

बहरहाल, वार्ता खत्म होने का तुरंत बाद उन्होंने अपने ऑरिएनटेशन लेक्चर में नवप्रवेशी छात्रों को छात्रावास की समस्या और इसे लेकर संस्थान की ओर से किए जा रहे प्रयासों के बारे में ज़रूर बताया. बहरहाल, संस्थान के पूर्व छात्रों और नवप्रवेशी छात्रों के बीच हुई बातचीत में भी नए छात्रावास के निर्माण होने तक कोई वैकल्पिक उपाय संस्थान की ओर से करने की ज़रूरत महसूस की गई. 25 वर्षों से जारी इस ग़ैर-बराबरी के खि़लाफ़ नव प्रवेशी छात्रों को जागरूक करने के लिए जितेंद्र कुमार, अभिषेक श्रीवास्तव, नवीन कुमार, वरूण शैलेष, कामिनी पाटिल, संजीव कुमार साहू, केशव कुमार, नितिन गुलाटी, देवेश खंडेलवाल, वेद प्रकाश,योगेश कुमार शीतल, कुमार प्रशांत, प्रनव, राहुल आनंद, मुनिशंकर और अभिषेक रंजन सिंह ने अपना योगदान दिया.
 

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