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आईएएस शशि भूषण प्रकरण : बड़े आईएएस बच गए, बलि का बकरा बन गए जीआरपी इन्स्पेक्टर अनिल राय!

मानवाधिकार के क्षेत्र में कार्यरत डॉ नूतन ठाकुर द्वारा मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश को पत्र लिख कर कहा गया है कि शशि भूषण कुमार, आईएएस द्वारा कथित छेड़छाड़ वाली घटना में अनिल राय, इन्स्पेक्टर, जीआरपी को अकारण निलंबित किया गया प्रतीत होता है. उन्होंने कहा है कि जब घटना की सूचना मिलने के कुछ ही देर बाद जीआरपी के डीआईजी और एसपी थाना जीआरपी पहुँच गए थे तथा इन्स्पेक्टर ने काफी विचार-विमर्श के बाद इन अधिकारियों की मौजूदगी में ये धाराएँ लगायी थी, तो अकेले इन्स्पेक्टर को निलंबित किया जाना उचित नहीं दिखता.

मानवाधिकार के क्षेत्र में कार्यरत डॉ नूतन ठाकुर द्वारा मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश को पत्र लिख कर कहा गया है कि शशि भूषण कुमार, आईएएस द्वारा कथित छेड़छाड़ वाली घटना में अनिल राय, इन्स्पेक्टर, जीआरपी को अकारण निलंबित किया गया प्रतीत होता है. उन्होंने कहा है कि जब घटना की सूचना मिलने के कुछ ही देर बाद जीआरपी के डीआईजी और एसपी थाना जीआरपी पहुँच गए थे तथा इन्स्पेक्टर ने काफी विचार-विमर्श के बाद इन अधिकारियों की मौजूदगी में ये धाराएँ लगायी थी, तो अकेले इन्स्पेक्टर को निलंबित किया जाना उचित नहीं दिखता.

उन्होंने यह भी निवेदन किया है कि मुख्यमंत्री स्तर से इस बात की गहन जांच कराएं कि कौन-कौन से आईएएस अधिकारी आरोपित अधिकारी को बचाने के लिए नीली बत्ती लगी सरकारी वाहन का प्रयोग कर जीआरपी थाने पहुंचे थे और इनमे किन्होंने पुलिस पर गलत दबाव बनाने की कोशिश की थी.  डॉ ठाकुर ने निवेदन किया है कि यदि इन्स्पेक्टर जीआरपी किसी प्रकार से दवाब में आने के दोषी हैं तो कार्यालय समय में सरकारी वाहन का प्रयोग पूर्णतया गैरसरकारी कार्य करने हेतु मौके पर पहुँच कर दबाव बनाने वाले आईएएस अधिकारी भी निश्चित रूप से दण्डित किये जाने चाहिए.

पत्र की प्रति-
सेवा में,
श्री अखिलेश यादव,
मा. मुख्यमंत्री,
उत्तर प्रदेश,

लखनऊ

विषय- श्री शशि भूषण कुमार, आईएएस द्वारा कथित छेड़छाड़ विषयक समाचारों के सम्बन्ध में

महोदय,

कृपया निवेदन है कि मैं डॉ नूतन ठाकुर, मानवाधिकार के क्षेत्र में कार्यरत इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च एंड डोक्यूमेंटेशन इन सोशल साइंसेज (आईआरडीएस), लखनऊ की कन्वेनर हूँ. मैं यह पत्र श्री शशि भूषण कुमार, आईएएस द्वारा कथित छेड़छाड़ विषयक समाचार दिनांक 02/10/2012 के सम्बन्ध में पांच समाचारों की प्रति संलग्न कर प्रेषित कर रही हूँ.  उक्त समाचारों के अनुसार दिनांक 01/10/2012 को श्री कुमार के विरुद्ध थाना जीआरपी, चारबाग, लखनऊ पर धारा 354, 294 आईपीसी के अंतर्गत मुक़दमा पंजीकृत हुआ तथा इसमें बाद में धारा 376/511 आईपीसी जोड़ी गयी. समाचारों के अनुसार इस घटना में एफआईआर दर्ज करने में तीन घंटे से अधिक समय लगा और हलकी धाराओं में मुक़दमा दर्ज हुआ. शाम में आपके आदेशों के बाद धारा 376/511 आईपीसी जोड़ी गयी. इस मामले में श्री अनिल राय, इन्स्पेक्टर, जीआरपी को लापरवाही बरतने के आरोप में पहले स्थानांतरित और बाद में निलंबित कर दिया गया जबकि समाचारों के अनुसार इस घटना की सूचना मिलने के कुछ ही देर बाद जीआरपी के डीआईजी और एसपी थाना जीआरपी पहुँच गए थे तथा इन्स्पेक्टर ने काफी विचार-विमर्श के बाद इन अधिकारियों की मौजूदगी में ये धाराएँ लगायी थी. समाचारों के अनुसार शाम में धाराएँ बढ़ाई गयी और इन्स्पेक्टर को निलंबित कर दिया गया. समाचारों के अनुसार श्री अनिल राय ने हलकी धाराएँ लगाई थी, इसीलिए उन्हें निलंबित किया गया.

इन्ही समाचारों में यह भी कहा गया कि श्री कुमार, आईएएस के समर्थन में कई अन्य आईएएस अधिकारी भी थाना जीआरपी आये अथवा उन्होंने फोन कर पुलिस अधिकारियों को आदेशित किया. खबरों के अनुसार श्री कुमार के समर्थन में करीब डेढ़ दर्जन आईएएस अफसर सरकारी गाड़ियों से कार्यालय समय में जीआरपी थाने आये. एक समाचार के अनुसार आईएएस अफसर को नहीं बचा पाने की नाराजगी श्री अनिल राय को झ्लेनी पड़ी और उन्हें निलंबित होना पड़ा. श्री राय पर यह आरोप लगाया  गया कि उन्होंने पीडिता का मामला दर्ज कराने में कोताही बरती जबकि पीडिता की माँ सुश्री नीरू सक्सेना ने साफ़ कहा कि श्री राय ने उन पर कोई दवाब नहीं बनाया था. इस खबर के अनुसार पीडिता के जाने के बाद भी तमाम आईएएस अफसर जीआरपी थाने आते रहे और श्री राय पर कई प्रकार से दवाब बनाते रहे.

पीड़िता के साथ घटित यह घटना अत्यंत लोमहर्षक तथा जघन्य है और उस पर कठोरतम कार्यवाही की जानी चाहिए. किन्तु जिस प्रकार से श्री अनिल राय को लापरवाही बरतने के आरोप में पहले स्थानांतरित और बाद में निलंबित कर दिया गया वह किसी भी प्रकार से न्यायोचित नहीं दिखता. मैं समाचार पत्रों की खबरों के परिप्रेक्ष्य में आपसे निम्न निवेदन करती हूँ-

1. कृपया अपने स्तर से इस बात की गहर जांच कराने की कृपा करें कि कौन-कौन से आईएएस अधिकारी श्री कुमार को बचाने के लिए नीली बत्ती लगी सरकारी वाहन का प्रयोग कर जीआरपी थाने पहुंचे थे?

2. जो आईएएस अधिकारी उस दिन जीआरपी थाने गए थे उनमे कितने अधिकारियों द्वारा इस मामले में पुलिस पर गलत दवाब बनाए जाने की बात जांच में सामने आती है

3. कृपया यह दिखवाने की कृपा करें कि क्या मुक़दमा पंजीकृत किये जाने की प्रक्रिया के दौरान अथवा/तथा  उस समय थाने पर श्री अनिल राय, इन्स्पेक्टर, जीआरपी के अलावा जीआरपी के डीआईजी तथा एसपी भी मौजूद थे? यदि हाँ तो फिर मात्र श्री राय को निलंबित किये जाने का क्या आधार तथा तर्क था?

4. इसके अतिरिक्त भी कृपया यह दिखवाने की कृपा करें कि श्री अनिल राय को स्थानांतरित और निलंबित किये जाने का क्या कोई कारण तथा आधार था अथवा मात्र मनमर्जी से अधिकारियों द्वारा उन्हें निलंबित कर दिया गया?

5. कृपया यह भी दिखवाने की कृपा करें कि यदि श्री राय किसी प्रकार से दवाब में आने के दोषी हैं तो कार्यालय समय में सरकारी वाहन का प्रयोग पूर्णतया गैरसरकारी कार्य करने हेतु मौके पर पहुँच कर दवाब बनाने वाले आईएएस अधिकारी भी निश्चित रूप से दण्डित किये जाने चाहिए.  

मुझे पूर्ण विश्वास है कि इस मामले में आप द्वारा न्याय किया जाएगा और ऊपर के अधिकारियों द्वारा अपने आप को बचाने के लिए अकारण अधीनस्थ अधिकारी को दण्डित किये जाने की प्रक्रिया पर विराम लगेगा.

भवदीय,

(डॉ नूतन ठाकुर)

5/426, विराम खण्ड,
गोमती नगर, लखनऊ
094155-34525
पत्रांक- IRDS/IAS/News/01
दिनांक- 03/10/2012                                 

प्रतिलिपि- मा० मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ को कृपया सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु

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