लखनऊ। बस्ती में कमिश्नर अनुराग श्रीवास्तव और एसपी मोहित गुप्ता के बीच शुरू हुए विवाद ने तूल पकड़ लिया है. यूपी में आईएएस और आईपीएस अफसरों के बीच तनातनी काफी बढ़ गई है. हाल ये है कि मोहित गुप्ता के साथ हुए अभद्र व्यवहार के बाद अब तक राज्य के 24 आईपीएस अफसरों ने अपना इस्तीफा भेज दिया है. सारे इस्तीफे आईपीएस एसोसिएशन को भेजे गए हैं. इन अफसरों ने फतेह बहादुर को हटाने की मांग की है. राज्य सरकार ने इस विवाद पर संज्ञान लेते हुए मामले की जांच के आदेश दिए हैं. वरिष्ठ आईएएस वीएन गर्ग, आईपीएस अरुण कुमार की जांच समिति बनाई गई है, जिसको तीन दिन के अंदर जांच रिपोर्ट सौंपनी है.
इस्तीफा देने वाले अफसरों ने में गाजीपुर के एसपी मनोज कुमार, मैनपुरी के एसपी नितिन तिवारी, चंदौली के एसपी शलभ माथुर, संत कबीर नगर के एसपी धर्मेंद्र, सिद्धार्थनगर के एसपी मनोज गुप्ता, आकाश कुलकर्णी, एलआर कुमार, हैप्पी गुप्ता, विनोद कुमार समेत कुल 24 आईपीएस शामिल हैं. इन लोगों ने मोहित गुप्ता के तबादले के विरोध में अपने इस्तीफे दिए हैं. पर घटना के पीछे की असल वजह यह बताई जा रही है कि बीते पांच साल से आईपीएस अफसरों के साथ ही पीपीएस-पीसीएस अफसर भी राज्य में हाशिए पर कर दिए गए हैं. इस वक्त लगभग 153 ऐसे आईपीएस-पीपीएस अफसर हैं जिनपर भर्ती प्रक्रिया में धांधली संबंधित जांच चल रही है.
हालांकि नाराज आईपीएस अफसरों ने साफ कर दिया है कि पूर्व प्रमुख सचिव गृह फतेह बहादुर को हटाने के अलावा पूरी घटना के दोषी कमिश्नर और जिलाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो आईपीएस अधिकारी यूपी में नौकरी नहीं करेंगे. बवाल को देखते हुए सराकर और आयोग ने बस्ती मंडल के कमिश्नर अनुराग श्रीवास्तव से भी जवाब तलब किया है. उनसे इस मामले में कल तक जवाब देने के लिए कहा गया है कि क्यों कमिश्ननर ने चुनावी बैठक में डीएम की शिकायत पर एसपी मोहित गुप्ता को डांटते फटकारते हुए मीटिंग से बाहर कर दिया था. मोहित ने पूरी घटना की शिकायत आईपीएस एसोसियेशन से की तो कार्रवाई के तौर पर डीएम के साथ ही साथ उन्हें भी हटा दिया गया.
इसी कार्रवाई से नाराज यूपी आईपीएस एसोसिएशन के पदाधिकारी रविवार को सूबे के कैबिनेट सचिव शशांक शेखर के यहां जा पहुंचे. बातचीत शुरू हुई तो एसोसिएशन ने शर्त रखी कि इस पूरी बैठक में प्रमुख सचिव नियुक्ति फतेह बहादुर को ना शामिल किया जाए, क्योंकि इनके खिलाफ आईपीएस अधिकारियों की बजाए आईएएस अधिकारियों को बढ़ावा देने का आरोप लगता रहा है. चुनाव के चलते ब्यूरोक्रेसी में मचे तकरार के चलते सरकार के भी हाथ पांव फूल गए हैं. चुनाव आयोग की चिंताएं बढ़ गई हैं. आयोग जल्द से जल्द इस मसले को निपटाने की कोशिश में जुट गया है.






