कोई सिपाही मीडिया में बयान देता है तो इसे विभागीय अनुशासनहीनता मानते हुए उस पर मुकदमा दर्ज करा दिया जाता है, लेकिन जब कोई आईपीएस अफसर मीडिया में बयान देता है या सामूहिक इस्तीफे की बात कहकर दबाव बनाकर अपनी मांग मनवाता है तो उसे अनुशासनहीनता क्यों नहीं माना जाता, उसे गलत मानते हुए मुकदमा दर्ज क्यों नहीं कराया जाता. यह सवाल उठाया है पुलिस वेलफेयर एसोसिएशन के नरेंद्र सिंह यादव ने.
नरेंद्र ने कहा है कि अगर आईपीएस अफसर सामूहिक इस्तीफे की धमकी देकर अपनी मांग मनवा सकते हैं तो इसी तरह का काम अब यूपी के सिपाही भी उठाने जा रहे हैं. लाखों पुलिस वाले इस्तीफा देकर अब अपनी मांग मनवाएंगे. अगर यूपी सरकार चाहती है कि ऐसा न हो तो उसे उन आईपीएस अफसरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करना चाहिए जिन्होंने सामूहिक इस्तीफे की धमकी दी थी. नरेंद्र सिंह यादव ने जो पत्र शासन को भेजा है, वह इस प्रकार है…







