आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर के एसपी गोंडा कार्यकाल (2003-2004) में एक शस्त्र जांच प्रकरण में कुछ पुलिस अधिकारियों द्वारा उन्हें फर्जी तरीके से गंभीर आपराधिक मुकदमे में फंसाने के लिए एक जांच आख्या उत्तर प्रदेश शासन को भेजी गयी थी. जांचकर्ता अधिकारी ने बिना साक्ष्य के स्वतः यह निष्कर्ष निकाल लिया था कि ठाकुर की सीधे-सीधे शस्त्र रैकेट में संलिप्तता है. यह जांच आख्या कई समाचार पत्रों में भी प्रकाशित हुई.
बाद में इस सम्बन्ध में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एके बिश्नोई ने जांच की और 28 जुलाई 2005 की अपनी आख्या में ठाकुर को किसी भी प्रकार दोषी नहीं पाया. ठाकुर पिछले कई सालों से उन्हें गलत ढंग से फंसाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्यवाही की मांग कर रहे हैं पर डीजीपी, उत्तर प्रदेश कोई जांच नहीं करा रहे हैं. हाल में उन्होंने इस प्रकरण के सम्बन्ध में अपनी सेवा नियमावली के तहत मीडिया के माध्यम से लोगों तक अपनी बात रखने की अनुमति मांगी और इस लिए 18 जनवरी 2013 तय किया, लेकिन 17 जनवरी को अचानक यह आदेश जारी कर दिया गया कि वे प्रेस वार्ता नहीं करेंगे.





