Amitabh Thakur : एक न्यायिक विजय का उत्साह… प्रत्येक विजय अपने आप में प्रसन्नता देती है, चाहे वह छोटी सी विजय ही क्यों ना हो. फिर यदि इस विजय पर न्यायिक मुहर लगी हो तो खुशी दुनी हो जाती है. आज एक बार फिर मेरे साथ ऐसा हुआ जब कथित रूप से कोई जांच या अन्य कार्यवाही लंबित नहीं होने के बावजूद पदोन्नति रोके जाने के विरोध में मेरे द्वारा दायर याचिका पर मा० इलाहाबाद उच्च न्यायालय, लखनऊ बेंच कई बिंदुओं पर मुझसे सहमत दिखी और उन के द्वारा मा० कैट, लखनऊ को दो माह में सुनवाई कर निर्णय देने का आदेश दिया गया.
मेरे द्वारा अपनी बहस किये जाने पर मा० जस्टिस उमानाथ सिंह और मा० जस्टिस अनिल कुमार की बेंच ने कहा कि चूँकि वादी द्वारा कहा जा रहा है कि बिना कारण सतही आधार पर उनकी पदोन्नति रोकी जा रही है और मा० कैट में भी मुक़दमा दायर हुए एक साल से अधिक बीत गया है, अतः मा० कैट दो माह में मुकदमे की सुनवाई पूरी करे और वादी के साथ न्याय करे. उन्होंने यह भी कहा कि यदि दो माह में वहाँ सुनवाई पूरी नहीं होती है तो मैं इस मामले में मा० हाई कोर्ट पुनः आ सकता हूँ. एक लंबे समय से प्रतीक्षित पदोन्नति, जो मेरी दृष्टि में मेरा विधिक अधिकार है, के सम्बन्ध में इस निर्णय से मुझे वास्तव में बहुत खुशी मिली है जिसे मैंने अपनी न्यायिक लड़ाई की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानता हूँ. इसमें कोई शक नहीं कि यदि आप कोई काम ह्रदय से करें और उसमे कुछ सफलता मिलती रहे तो अच्छा लगता है.
यूपी कैडर के आईपीएस अमिताभ ठाकुर के फेसबुक वॉल से.





