Shambhunath Shukla : मैं आमतौर पर सारे अखबारों को आनलाइन पढ़ ही लेता हूं। अभी कल तक आगरा का हर अखबार लिख रहा था कि आगरा के एसएसपी सुभाषचंद्र दुबे ने हर केस को सुलझा दिया और पेंडिंग केस भी हल कर लिए। उनके कार्यकाल में कोई अनहोनी नहीं हुई फिर भी शासन ने कल उन्हें डीजीपी आफिस से संबद्ध कर दिया यानी एक बेहतर और तेजतर्राक अफसर से जिला छीन लिया।
इसके पीछे समाजवादी पार्टी की क्या राजनीति हो सकती है? आगरा के सारे अखबार इस पूरे प्रकरण पर चुप साध गए। तो क्या अखबार और पत्रकार महज एक खबरची होता है? उसकी अपनी कोई जिम्मेदारी नहीं होती है?
वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ला के फेसबुक वॉल से.





