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आई नेक्‍स्‍ट, बरेली में अब प्रभात ने भी किया साइन करने से इनकार

: इसके पहले भी दो पत्रकार कर चुके हैं इनकार :  दैनिक जागरण ग्रुप का बड़े से बड़ा पत्रकार भले ही अनैतिक हस्‍ताक्षर अभियान के खिलाफ अपनी चोंच न खोला हो, पर आई नेक्‍स्‍ट, बरेली के युवा पत्रकारों ने प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. जाहिर है, इससे उनकी नौकरी पर तो खतरा है ही, आगे कोई मीडिया संस्‍थान उनको काम पर भी ना रखे. ऐसा भी नहीं है कि वो अपने साथ हो सकने वाली इस तरह घटनाओं से अनजान हैं, फिर भी उन्‍होंने जागरण ग्रुप की अनैतिक हस्‍ताक्षर अभियान के खिलाफ बगावत करके अपनी दिलेरी तो दिखाई ही है. तमाम भौकाली पत्रकारों को सोचने पर भी मजबूर किया है.

: इसके पहले भी दो पत्रकार कर चुके हैं इनकार :  दैनिक जागरण ग्रुप का बड़े से बड़ा पत्रकार भले ही अनैतिक हस्‍ताक्षर अभियान के खिलाफ अपनी चोंच न खोला हो, पर आई नेक्‍स्‍ट, बरेली के युवा पत्रकारों ने प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. जाहिर है, इससे उनकी नौकरी पर तो खतरा है ही, आगे कोई मीडिया संस्‍थान उनको काम पर भी ना रखे. ऐसा भी नहीं है कि वो अपने साथ हो सकने वाली इस तरह घटनाओं से अनजान हैं, फिर भी उन्‍होंने जागरण ग्रुप की अनैतिक हस्‍ताक्षर अभियान के खिलाफ बगावत करके अपनी दिलेरी तो दिखाई ही है. तमाम भौकाली पत्रकारों को सोचने पर भी मजबूर किया है.

कुछ समय पहले आई नेक्‍स्‍ट, बरेली में कार्यरत तृप्ति शुक्‍ल एवं आशु प्रज्ञ मिश्र ने बांड पर हस्‍ताक्षर करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद कानपुर से प्रबंधन के करिंदे पंकज पांडेय ने पहले दोनों को हड़काया, जब दोनों पत्रकार नहीं हड़के तो उन्‍हें कार्यालय आने से रोकने का आदेश सुनाया गया. अब नई खबर भी आई नेस्‍क्‍ट, बरेली से ही है. यहां पर क्राइम रिपोर्टर के रूप में कार्यरत प्रभात तिवारी ने भी साइन करने से इनकार कर दिया है. सूत्रों का कहना है कि प्रभात तिवारी अपनी शादी के लिए छुट्टी लेकर आजमगढ़ गए हुए थे. प्रभात जब शादी के बाद बरेली लौटै तो प्रबंधन ने उनसे हस्‍ताक्षर करने को कहा. प्रभात ने बांड पढ़ने के बाद हस्‍ताक्षर करने से इनकार कर दिया.

सूत्रों का कहना है कि सीजीएम एएन सिंह ने भी अपनी तरफ से भरसक कोशिश की, परन्‍तु प्रभात नहीं माने. इसके बाद प्रभात जब आफिस में अपना काम कर रहे थे तभी फिर जागरण के करिंदें पंकज पांडेय का फोन प्रभात की मोबाइल पर आया. उनके भी तमाम तरह के सवाल-जवाब हुए. प्रभात ने स्‍पष्‍ट किया कि उस पर मर्जी के अनुसार साइन करने या न करने को लिखा है तो मैंने नहीं किया. तो दूसरी तरफ से कहा गया कि हम तुम्‍हे ढो रहे हैं और तुम ऊपर से साइन नहीं कर रहे हो. साइन ना करना हो तो अगली सूचना तक कार्यालय मत आना. सूत्रों ने बताया कि इसके बाद प्रभात ने कहा कि पास में ही एडिटोरियल हेड सत्‍येंद्र सिंह बैठे हैं आप उन्‍हें बता दीजिए. इसके बाद प्रभात ने मोबाइल सत्‍येंद्र सिंह को पकड़ा दिया. सत्‍येंद्र बात करते बाहर निकल गए.

सूत्रों का कहना है कि ये सारा तमाशा न्‍यूज रुम के अंदर हुआ. प्रभात ने न्‍यूज रूम में ही कहा कि जब तक लिखित में या ऑफिसियली मेल पर कुछ नहीं आता है वो काम करना जारी रखेंगे. फिलहाल इन तीन युवाओं के तेवर के बाद प्रबंधन बौखलाया हुआ है. प्रभात को नई शादी होने के चलते समझौता करने का भी दबाव बनाया गया. धमकी भी दी गई नई शादी हुई है साइन नहीं करोगे तो नौकरी चली जाएगी, पर खबर है कि प्रभात ने साइन करने से इनकार कर दिया है. प्रभात तिवारी पिछले दो साल से आई नेक्‍स्‍ट के साथ जुड़े हुए हैं. प्रबंधन इन तीनों पत्रकारों को नौकरी से निकालने की जुगत में लग गया है. हालांकि इनमें से किसी की भी सेलरी दस से ज्‍यादा नहीं है, पर इन युवा पत्रकारों ने जिस तरह हिम्‍मत दिखाया वो काबिले तारीफ है. इन युवा पत्रकारों ने उन मठाधीशों के सामने एक मिसाल कायम की है, जो प्रबंधन की किसी भी अनैतिक बातों का आंख मूंदकर अनुपालन कर लेते हैं.

अपने पत्रकारों का खून पीने वाला जागरण समूह के खिलाफ छोटे स्‍तर पर ही सही बगावत शुरू हो चुकी है. अन्‍य संस्‍थानों में जहां सब एडिटर पंद्रह से पचीस हजार रुपये पा रहे हैं वहीं खून चूसने वाला जोंक जागरण ग्रुप कई जगहों पर आठ से लेकर पंद्रह हजार के बीच पैसे दे रहा है. स्ट्रिंगरों को तो हजार रुपये भी भुगतान नहीं करता. जाहिर है कि साइन करने से इनकार करने वाले पत्रकारों को भविष्‍य में अनेक मुश्किलों का सामना करना पड़े, इनकी नौकरी छीन ली जाए, इन्‍हें कोई और संस्‍थान नौकरी ना दे, इन्‍हें अपना पेशा बदलना पड़े, फिर भी ये खड़े हैं तो ये हम सभी का दायित्‍व बनता है कि हम इनके साथ नैतिक रूप से खड़ा रहें. कई पत्रकारों की मजबूरी होगी कि ना चाहते हुए भी साइन किए होंगे, वैसे पत्रकारों को भी कम से कम नैतिक रूप से इन युवाओं का साथ देना चाहिए ताकि यह जोंकी संगठन दूसरे तमाम पत्रकारों का खून ना पी सके.

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