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आई नेक्‍स्‍ट, बरेली में हस्‍ताक्षर न करने वाले आशु, प्रभात एवं तृप्ति का तबादला

: प्रताडि़‍त करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहा प्रबंधन : अपनी नैतिक-अनैतिक बातें मानने के लिए जागरण प्रबंधन किस स्‍तर तक गिर सकता है, इसके उदाहरण हैं आई नेक्‍स्‍ट, बरेली में हस्‍ताक्षर से इनकार करने वाले तीन रिपोर्टर. प्रबंधन ने तीनों का अलग-अलग जगहों पर तबादला कर दिया है ताकि ये खुद बाहर चले जाएं, पर सराहना करनी होगी तीनों पत्रकारों की कि उन्‍होंने जागरण प्रबंधन के इस कुकृत्‍य के सामने झुकने से इनकार कर दिया है.

: प्रताडि़‍त करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहा प्रबंधन : अपनी नैतिक-अनैतिक बातें मानने के लिए जागरण प्रबंधन किस स्‍तर तक गिर सकता है, इसके उदाहरण हैं आई नेक्‍स्‍ट, बरेली में हस्‍ताक्षर से इनकार करने वाले तीन रिपोर्टर. प्रबंधन ने तीनों का अलग-अलग जगहों पर तबादला कर दिया है ताकि ये खुद बाहर चले जाएं, पर सराहना करनी होगी तीनों पत्रकारों की कि उन्‍होंने जागरण प्रबंधन के इस कुकृत्‍य के सामने झुकने से इनकार कर दिया है.

उल्‍लेखनीय है कि मजीठिया आयोग मामले में जागरण के गुलामी बांड पर आई नेक्‍स्‍ट, बरेली में कार्यरत आशु प्रज्ञ मिश्र, तृप्ति शुक्‍ल एवं प्रभात तिवारी ने हस्‍ताक्षर करने से इनकार कर दिया था. पहले तो प्रबंधन ने तीनों को समझाने की कोशिश की, जब तीनों हस्‍ताक्षर करने को तैयार न हुए तो इन्‍हें हड़काया गया. इसके बाद भी ये नहीं माने तो इन्‍हें कार्यालय आने से मना किया गया, पर इन पत्रकारों ने कहा कि न आने का लिखित आदेश दिया जाए, तब प्रबंधन ने नई रणनीति बनाते हुए तीनों को आई नेक्‍स्‍ट के अलग-अलग एडिशनों में भेज दिया.

खबर है कि तृप्ति को तो पहले ही रिपोर्टर से सीनियर रिपोर्टर बनाकर आई नेक्‍स्‍ट, जमशेदपुर भेज दिया गया था. उसके बाद बचे आशु एवं प्रभात को भी प्रबंधन ने अंतत: किनारे लगाने की रणनीति बनाई, जिसके तहत आशु प्रज्ञ को कानपुर तथा प्रभात तिवारी को रांची भेजा गया. प्रबंधन को उम्‍मीद थी कि तीनों नए जगहों पर जाने से इनकार करते हुए इस्‍तीफा दे देंगे, पर ये तीनों पत्रकार भी पक्‍के खिलाड़ी निकले. तीनों ने प्रबंधन की इच्‍छानुसार नए शहरों में ज्‍वाइन कर लिया. अब देखने वाली बात होगी कि प्रबंधन इनसे कैसे निपटता है. वैसे समझा जा रहा है कि इन तीनों को प्रताडि़त किए जाने की पूरी कोशिश की जाएगी ताकि ये खुद ही इस्‍तीफा दे दें.

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