समाचार पत्र आई-नेक्स्ट के लखनऊ संस्करण के दिनांक 20 अक्टूबर 2011 के अंक के कवर पेज पर एक लेख प्रकाशित हुआ- Lucky Khaki! इसमें कई सारे आईपीएस अफसरों के प्रोपर्टी के बारे में जानकारी दी गयी थी. यह जानकारी भारत सरकार के गृह मंत्रालय में आईपीएस अधिकारियों द्वारा दिये गए वार्षिक संपत्ति विवरण के आधार पर प्रस्तुत गयी थी. आई-नेक्स्ट में उत्तर प्रदेश के कुछ आईपीएस अधिकारियों के बारे में जानकारी थी.
इसमें पृष्ठ तीन पर “यह हैं property के सबसे बड़े शौक़ीन” शीर्षक के अंतर्गत मेरे पति अमिताभ के विषय में भी विवरण दिया गया था. विवरण इस प्रकार था- “एक और आईपीएस अफसर हैं जिनकी गिनती सबसे ईमानदार अफसरों में होती है. इन्हें प्रोपर्टी खरीदने का शौक है. शौक इतना कि रिश्तेदारों से कर्ज ले कर प्रोपर्टी खरीद ली. प्रोपर्टी भी ज्यादातर गोमतीनगर जैसे एरिया में. यह है 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर. इन्होने सर्विस में आने के बाद यानि अब तक 19 साल में दस प्रोपर्टी खरीदी. जिसमे आठ प्रोपर्टी उनके और उनकी पत्नी नूतन ठाकुर के नाम है. लखनऊ के गोमतीनगर का खरगापुर इलाका इनका सबसे पसंदीदा इलाका है. यहाँ इनके और इनकी पत्नी के नाम कुल पांच प्लाट और फ्लैट हैं. खरगापुर में एक फ्लैट 27200 स्क्वायर फीट में लिया गया पक्का घर है जिसकी वैल्यू सात लाख सतहत्तर हज़ार दो सौ तीस रुपये शो की गयी है. खरगापुर में ही 4940 स्क्वायर फीट जमीन की वैल्यू 4 लाख 32 हज़ार 940 रुपये बताई गयी है. वहीँ 4710 स्क्वायर फीट जमीन दो लाख 37 हज़ार 220 रुपये वैल्यू की है. खरगापुर में 2820 स्क्वायर फीट जमीन की वैल्यू 2 लाख 31 हज़ार तीस रुपये बताया गया है. खरगापुर गाँव में ही 4 हज़ार स्क्वायर फीट जमीन की वैल्यू दो लाख 20 हज़ार आठ सौ बीस रुपये शो की गयी है. गोमतीनगर के विराम खंड में 200 स्क्वायर मीटर में बने घर की वैल्यू 14 लाख 68 हज़ार 840 रुपये है. इसके अलावा बिहार के पटना में 4763 स्क्वायर फीट के मकान की वैल्यू छह लाख 95 हज़ार रुपये, यहीं 635 स्क्वायर फीट जमीन में बने फ़्लैट की वैल्यू सवा लाख रुपये, मुजफ्फरपुर में एक कट्टा जमीन की वैल्यू मात्र 36 हज़ार रुपये हैं. सीतामढ़ी में जमीन की वैल्यू 0.93 एकड़ जमीन की वैल्यू सिर्फ बाईस हज़ार रुपये हैं. इनमे से कुछ जमीन को रिश्तेदारों से कर्ज ले कर लिया गया है. और कुछ बैंक से लोन पर. यह सभी प्रोपर्टी 1992 से 2007 के बीच ली गयी है.”
कुछ लोगों के जरिये हमें इस खबर की जानकारी हुई. हमने समाचार पत्र पढ़ा और उसके बाद मैंने शाम में ही तुरंत आई-नेक्स्ट की संपादक शर्मिष्ठ शर्मा और आई-नेक्स्ट के वरिष्ठ पत्रकार राजीव ओझा से उनके मोबाइल नंबर पर बात की. मैंने उन्हें बताया कि उनके द्वारा प्रकाशित खबर में कुछ तथ्यात्मक त्रुटि है क्योंकि वस्तुतः मेरे पति के नाम से जो दस संपत्तियां बतायी जा रही हैं उन में से आठ संपत्ति/ भू-खंड उनकी नहीं मेरी संपत्ति है. मैंने उनसे निवेदन किया कि इस सम्बन्ध में मेरे द्वारा कही जा रही बात को भी समाचार पत्र में उसी प्रमुखता से प्रकाशित की जाए. फिर मैंने उन दोनों को ई-मेल पर एक पत्र भेजा जिसकी हार्ड कॉपी भी राजीव ओझा को दफ्तर में भेजी.
मैं अपना यह पत्र प्रस्तुत कर रही हूँ-
सेवा में,
संपादक,
आई नेक्स्ट,
लखनऊ
विषय- आपके समाचार पत्र के लखनऊ संस्करण के दिनांक 20 अक्टूबर 2011 के अंक में मुझसे सम्बंधित समाचार में कतिपय तथ्यपरक त्रुटियों विषयक
महोदय,
आपके समाचार पत्र आई-नेक्स्ट के लखनऊ संस्करण के दिनांक 20 अक्टूबर 2011 के अंक के मुखपृष्ठ पर प्रकाशित लेख Lucky Khaki! में पृष्ठ तीन पर “यह हैं property के सबसे बड़े शौक़ीन” शीर्षक के अंतर्गत अमिताभ ठाकुर, आईपीएस से सम्बंधित एक खबर प्रकाशित की गयी थी, जिससे मेरा भी सीधा सम्बन्ध है. कृपया निवेदन है कि इसमें कई ऐसी बातें हैं जो तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं.
मैं अपनी बात की शुरुआत यहाँ से करना चाहूंगी कि मैं एक आईपीएस अफसर की पत्नी होने के साथ-साथ आर्थिक रूप से स्वतंत्र एक ऐसी महिला भी हूँ जो पारदर्शी प्रशासन के निर्माण के अतिरिक्त स्वयं मानवाधिकार और महिला अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष करती रहती है. ऐसे में खुद मेरे मामले में मेरे द्वारा अपनी मेहनत और अध्यवसाय के बल पर खरीदी गयी संपत्ति को मेरे पति अमिताभ की संपत्ति बताए जाने से मैं काफी आहत हूँ. मुझे इस बात का बहुत कष्ट है कि एक महिला का अपना कोई स्वतंत्र व्यक्तित्व नहीं माना जाता और मात्र इसीलिए कि वह एक आईपीएस अधिकारी की पत्नी है, उसके द्वारा किये गए समस्त कार्यों का श्रेय उसके पति को दे दिया जाता है. आई-नेक्स्ट अखबार अपने आप को प्रगतिशील और नए जेनेरेशन के लिए बना अखबार कहता है लेकिन यह जान कर अफ़सोस हुआ कि यह अखबार भी पुरुष और महिला में भेद-भाव करता है.
मैं यह बताना चाहूंगी कि जहां मेरी शादी वर्ष 1993 में हुई वहीँ मैं एक व्यावसायिक परिवार की होने के नाते शादी के कई साल पहले से अपना निजी कार्य कर रही हूँ और लगातार इनकम टैक्स दे रही हूँ. शादी के बाद भी मैं अनवरत रूप से अपना स्वतंत्र कार्य कर रही हूँ. आप सहमत होंगे कि आर्थिक रूप से एक स्वतंत्र ईकाई के रूप में मुझे अपनी आय से अपने और अपने परिवार का भला सोचते हुए इस हेतु संपत्ति खरीदने का पूरा अधिकार है. इस रूप में मेरे द्वारा खरीदी गयी संपत्ति को मेरे पति के एक आईपीएस अधिकारी होने के नाते उनसे जोड़ने से मुझे काफी तकलीफ पहुंची है. मेरे पति के वर्ष 2007 की वार्षिक प्रोपर्टी रिटर्न की दस संपत्तियों में से आठ मेरी संपत्तियां जो मैंने खरीदी हैं उनके विषय में कुछ लिखने के पहले यदि किसी ने मुझसे बात कर ली होती तो मुझे ज्यादा खुशी होती और ये गलत तथ्य भी सामने नहीं आते.
एक अन्य बात अपने पति की तरफ से कहना चाहूंगी जिनके विषय में यह लिखा गया कि –“इन्हें प्रोपर्टी खरीदने का शौक है.” लेखक द्वारा अपनी मर्जी से इस तरह की बात लिखना संभवतः उचित नहीं है क्योंकि मात्र इस आधार पर कि मेरे और मेरे पति के पास कुल मिला कर दस संपत्तियां है, उन्हें प्रोपर्टी खरीदने का शौक़ीन बना देना सर्वथा अनुचित होगा. सच्चाई यह है कि उनकी रूचि संपत्ति खरीदने में नहीं बल्कि पढ़ने-लिखने और सामाजिक सारोकारों में है. स्वयं इस समाचार पत्र में उनके द्वारा लिखे गए कई सम्पादकीय लेख इस बात के जीते-जागते गवाह हैं. कमोबेश यही स्थिति मेरी भी है क्योंकि एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी की पत्नी होने के बावजूद मैं इतनी सादगी भरी जिंदगी जीती हूँ कि कोई भी देख कर हैरान हो जाए. क्या कोई यह विश्वास करेगा कि हम पति-पत्नी आज भी ज्यादातर सेकण्ड क्लास से रेल की यात्रा करते हैं.
इन बातों के मद्देनज़र मैं आपसे निवेदन करती हूँ कि चूँकि आपके समाचार पत्र में प्रकाशित इस लेख के गलत तथ्यों से मुझे मानसिक पीड़ा पहुंची है, अतः जिस प्रमुखता से मुझसे और मेरे पति से सम्बंधित समाचार आपके समाचारपत्र में प्रकाशित हुआ है, कृपया उसी प्रमुखता से आप मेरे द्वारा प्रेषित इस पत्र में लिखी गयी बातों को भी मूल रूप में प्रकाशित करने की कृपा करें.
भवदीया,
( डॉ नूतन ठाकुर )
5/426, विराम खंड,
गोमती नगर, लखनऊ
# 94155-34525
इसके बाद मैंने कई दिनों तक इस पत्र के प्रकाशित होने अथवा मेरी बात रखे जाने का इन्तज़ार किया किन्तु मेरी जानकारी के अनुसार ऐसा नहीं किया गया. उलटे अगले दिन कम से कम मेरठ संस्करण में तो बिलकुल वही खबर प्रकाशित की गयी, जिसमें मेरी जानकारी के अनुसार मेरी बात नहीं रखी गयी. ऐसे में पर्याप्त समय तक इंतज़ार करने के बाद मैंने अब प्रेस काउन्सिल ऑफ इंडिया को एक शिकायती पत्र प्रेषित किया है, जिसमे सारी बातें बताते हुए इस अखबार में मेरा पक्ष प्रकाशित करने और इस पूरी प्रक्रिया में दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई करने का निवेदन किया है. देखें आगे प्रेस काउन्सिल के स्तर पर कब तक कार्रवाई हो पाती है.
डॉ. नूतन ठाकुर
सचिव
आईआरडीएस, लखनऊ






