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आउटलुक हिंदी के एसोसिएट एडिटर रवींद्र शाह का निधन

रवींद्र शाह चले गए. सड़क हादसे ने उन्हें हमसे छीन लिया. इन दिनों वे आउटलुक हिंदी मैग्जीन में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत थे. उसके पहले कई न्यूज चैनलों और अखबारों में वरिष्ठ पदों पर रहे. पता चला है कि रवींद्र शाह कार से इंदौर से भोपाल जा रहे थे. कार किसी अधिकारी की थी. उसमें अधिकारी के परिजन भी बैठे थे. सिहोर के करीब कार पलट गई. बाकी लोगों को हलकी फुलकी चोटें आईं लेकिन रवींद्र शाह का देहांत हो गया. दुर्घटना के बारे में ज्यादा डिटेल नहीं मिल सका है.

रवींद्र शाह चले गए. सड़क हादसे ने उन्हें हमसे छीन लिया. इन दिनों वे आउटलुक हिंदी मैग्जीन में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत थे. उसके पहले कई न्यूज चैनलों और अखबारों में वरिष्ठ पदों पर रहे. पता चला है कि रवींद्र शाह कार से इंदौर से भोपाल जा रहे थे. कार किसी अधिकारी की थी. उसमें अधिकारी के परिजन भी बैठे थे. सिहोर के करीब कार पलट गई. बाकी लोगों को हलकी फुलकी चोटें आईं लेकिन रवींद्र शाह का देहांत हो गया. दुर्घटना के बारे में ज्यादा डिटेल नहीं मिल सका है.

इंदौर प्रेस क्लब के प्रेसीडेंट प्रवीण खारीवाल ने भड़ास4मीडिया से बातचीत में रवींद्र शाह के निधन की सूचना की पुष्टि की. उन्होंने बताया कि रवींद्र शाह ने करियर की शुरुआत इंदौर से ही की थी. रवींद्र शाह पत्रकारिता में 26 वर्षों से सक्रिय थे. रवींद्र ने करियर की शुरुआत नई दुनिया, इंदौर से की थी. नई दुनिया के साथ वे 10 वर्षों तक रहे. बाद में उन्होंने फ्री प्रेस जर्नल के इंदौर संस्करण को लांच किया. इसके बाद नवभारत के इंदौर एडिशन को लांच किया.

राजस्थान में जयपुर से जब दैनिक भास्कर शुरू हुआ तो रवींद्र ने एक्जीक्यूटिव एडिटर के रूप में ज्वाइन किया. जयपुर और उदयपुर एडिशन लांच करने के बाद रवीद्र शाह एक साल के लिए दैनिक भास्कर के दिल्ली ब्यूरो चीफ रहे. बाद में चीफ एडिटर के बतौर वेबदुनिया ज्वाइन कर लिया. वर्ष 2002 में प्रिंट को बाय बोल इलेक्ट्रानिक मीडिया की पारी शुरू की. वे सहारा समय के साथ जुड़े. पहले एमपी चैनल की लांचिंग से जुड़े रहे. बाद में राजस्थान चैनल का हेड बनाया गया, जो किन्हीं कारणों से लांच नहीं किया जा सका.

इसके बाद वे कुछ दिनों तक जागरण ग्रुप के नोएडा स्थित पत्रकारिता इंस्टीट्यूट में शिक्षक रहे. फिर उन्होंने एस1 न्यूज चैनल ज्वाइन कर लिया जहां डिप्टी न्यूज हेड और चैनल प्रभारी के पद पर रहे. वहां से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने आजाद न्यूज ज्वाइन कर लिया था. रवींद्र ने एस1 दिसंबर 2006 में ज्वाइन किया था. रवींद्र ने इन दिनों आउटलुक हिंदी मैग्जीन में कार्यरत थे. रवींद्र शाह ने 'हरसूद 30 जून' नामक किताब का संपादन भी किया जिसे सरकार की तरफ से भारतेंदु हरिश्चंद्र पुरस्कार मिल चुका है.

यकीन नहीं हो रहा कि रवींद्र शाह इस दुनिया से विदा ले चुके हैं. पर कड़वे यर्थाथ को न चाहते हुए भी स्वीकार करना ही होगा. अगर आपके पास रवींद्र शाह से जुड़े संस्मरण व तस्वीरें हों तो भड़ास4मीडिया के पास [email protected] पर भेज सकते हैं.

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