बलिया। किसी चुनाव को सम्पन्न कराने में शासन व प्रशासन का अहम योगदान रहता हैं। वहीं मीडिया की भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका रहती हैं। लेकिन इस बार के निकाय चुनाव में समाचार संकलन के लिए प्रशासन ने जो प्रेस पास जारी किया वह पत्रकारों के लिए गले के पट्टे की कहावत चरितार्थ कर रहा है। साथ ही एक बारगी यह सोचने पर भी विवश कर रहा है कि कहीं चुनाव में गड़बड़ी करने या गड़बड़ी होने की आशंका तो प्रशासन को नहीं थी। कहीं इसीलिए प्रशासन ने पत्रकारों को जो प्रेस पास जारी उस पर बूथ पर जाने पर रोक लगा दिया।
मीडिया के कवरेज के लिए प्रशासन ने पास तो जारी किया लेकिन उस पर स्पष्ट रूप से यह भी लिख भी दिया कि 'बूथों के अन्दर प्रवेश वर्जित है'। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या जनपदीय प्रशासन सत्ता के पक्ष कुछ गड़बड़ी करना चाहता था? अगर ऐसा नहीं है तो पत्रकारों को ऐसा पास जारी क्यों किया गया? क्यों प्रशासन पत्रकारों के साथ इतना क्रूर मजाक किया? आखिर प्रशासन को कौन सा डर सता रहा था या प्रशासन किसके इशारे पर यह कार्य किया?
गौरतलब हैं कि जब पत्रकार बूथों के अन्दर की रिर्पोटिंग नहीं कर पाएगा या फोटो नहीं दे पायेगा तो फिर उसको प्रशासन द्वारा दिए गए पास का क्या मतलब है? पास तो इसीलिए जारी किया जाता हैं कि मीडिया स्वत्रंत होकर सच्चाई को जनता के सामने लाये। लेकिन जनपदीय प्रशासन ने जो गन्दा व क्रूर मजाक किया है। इसके पीछे भी कोई राज हैं। और यह राज प्रशासन के अलावा और कोई नहीं जान सकता। एक तो पास जारी करते-करते 23 जून की रात्रि को पास जारी किया गया। उसके बाद पास के ऊपर सीधे व स्पष्ट शब्दों में मोटे अक्षरों में लिख दिया कि अन्दर जाना मना हैं। ऐसे में सवाल उठता हैं कि उस पास का मतलब क्या? जब पत्रकार अन्दर नहीं जायेंगे तब सच्चाई कैसे सामने आयेगी? यह एक महत्तवपूर्ण प्रश्न हैं। इतना तो जरूर हैं कि प्रशासन ने यह पास जारी कर साफ तौर पर जाहिर कर दिया कि मतदान में गड़बड़ी होगी। इसके साथ ही यह भी जाहिर कर दिया कि प्रशासन सकुशल व निष्पक्ष चुनाव कराने के पक्ष में नहीं हैं। आखिर इतना बड़ा मजाक वो भी चौथे स्तम्भ से कुछ समझ में नहीं आता।

लेखक गणेशजी वर्मा बलिया में कैनवीज टाइम्स से जुड़े हुए हैं.





