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‘आजतक’ का अनैतिक स्टिंग, कांग्रेस की ‘आफ द रिकार्ड’ गालियां और केजरीवाल की बेचारगी

: चंद्रशेखर की याद और राजनीति, सिनेमा और अभिनय की यह काकटेल : खबरिया चैनल 'आज तक' पर कांग्रेस नेताओं का स्टिंग देख कर पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की याद आ गई जिन्होंने एक मामूली से आरोप पर कि वह राजीव गांधी की जासूसी करवा रहे हैं, के बिना पर बगैर एक क्षण की देरी किए इस्तीफा दे दिया था। राजीव गांधी कहते फिरें कि मेरा समर्थन जारी है और कि मैंने ऐसा कुछ भी नहीं कहा। लेकिन चंद्रेशेखर ने राजीव की सफाई पर बिलकुल गौर नहीं किया, न कान दिया। और कहा कि अब इस्तीफ़ा दे दिया है तो दे दिया है। बतर्ज़ जो कह दिया सो कह दिया!

: चंद्रशेखर की याद और राजनीति, सिनेमा और अभिनय की यह काकटेल : खबरिया चैनल 'आज तक' पर कांग्रेस नेताओं का स्टिंग देख कर पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की याद आ गई जिन्होंने एक मामूली से आरोप पर कि वह राजीव गांधी की जासूसी करवा रहे हैं, के बिना पर बगैर एक क्षण की देरी किए इस्तीफा दे दिया था। राजीव गांधी कहते फिरें कि मेरा समर्थन जारी है और कि मैंने ऐसा कुछ भी नहीं कहा। लेकिन चंद्रेशेखर ने राजीव की सफाई पर बिलकुल गौर नहीं किया, न कान दिया। और कहा कि अब इस्तीफ़ा दे दिया है तो दे दिया है। बतर्ज़ जो कह दिया सो कह दिया!

पर कांग्रेसी नेताओं ने अब आप सरकार और केजरीवाल के विरुद्ध जो-जो नहीं कहना चाहिए, सब कह दिया है और फुल बेशर्मी से कह दिया है। केजरीवाल के सारे फ़ैसलों को गैर कानूनी भी कह दिया। भ्रष्ट भी कहा और सीधे-सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया। 'आज तक' की यह स्टिंग भी हालांकि कटघरे में है। कांग्रेस नेता लवली लगातार कह रहे हैं कि वह सारी बात आफ़ द रिकार्ड कह रहे हैं। मतलब यह कि वह 'आज तक' के संवाददाता से जान-समझ कर बात कर रहे हैं और आफ़ द रिकार्ड बात कर रहे हैं, तो फिर पत्रकारिता की नैतिकता या शुचिता जो भी कह लें, उसके मुताबिक यह सब 'आज तक' को भी दिखाना नहीं चाहिए था। तकाज़ा तो यही है। पर पत्रकारिता भी अब चूंकि एक दुकान है तो जो वह पुराना मुहावरा है न कि प्यार और युद्ध में सब ज़ायज़ है, तो इसमें अब भाई लोगों द्वारा शायद एक और शब्द जोड़ लिया गया है कि प्यार, युद्ध और दुकानदारी में सब ज़ायज़ है!

पत्रकारिता के बाबत शायद इसी अर्थ का विस्तार दलाली, लायजनिंग आदि शब्दों में भी है। पर अभी तो मुद्दा इस नैतिकता या शुचिता का नहीं, कांग्रेस और केजरीवाल सरकार का है। लेकिन क्या कीजिएगा अरविंद केजरीवाल चंद्रशेखर नहीं हैं और न ही संसदीय मामलों के जानकार ! नैतिकता आदि शब्दों की तो खैर बिसात ही क्या ! कांग्रेस ने केजरीवाल को समर्थन दे कर अपने लिए तो गड्ढा खोद ही लिया है केजरीवाल भी कांग्रेस का समर्थन ले कर गले में फंदा डाले बैठे हैं। और भाजपा इन दोनों के बीच मज़ा ले रही है। दूसरी तरफ सलमान खान भी मोदी की पतंग अलग उड़ा गए हैं। बेस्ट मैन आफ़ द कंट्री कह कर ! अभी वह सैफई में समाजवाद के नाच में नाचे ही थे। धन्य है यह राजनीति भी ! राजनीति, सिनेमा और अभिनय की यह काकटेल भी !

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार दयानंद पांडेय का विश्लेषण.

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