मुंबई निवासी तथा प्रशस्ति ग्रुप के लीगल हेड प्रवीण कुमार जैन ने टीवी टुडे के विधि प्रमुख पुनीत जैन को एक पत्र लिखा है. प्रवीण ने आपत्ति जताई है कि आजतक चैनल पर हिंदी की बजाय अंग्रेजी और रोमन लिपि का इस्तेमाल बढ़ रहा है. हिंदी चैनलों पर अंग्रेजी और रोमन लिपि के अनावश्यक बढ़ते प्रयोग को लेकर प्रवीण कई अन्य चैनलों को भी पत्र लिख चुके हैं. प्रवीण का कहना है कि अंग्रेजी और रोमन लिपि का प्रयोग आजतक पर बढ़ जाने से उनको खीझ होने लगी है. उन्होंने निराशा जताई है कि हिंदी के पैराकार ही बाजार के नाम पर हिंदी को कमजोर करने में जुटे हुए हैं. नीचे प्रवीण द्वारा लिखा गया पत्र.
दिनांक: १२ जून २०१२
प्रति,
श्री पुनीत जैन,
विधि प्रमुख एवं कंपनी सचिव
टीवी टुडे नेटवर्क लिमिटेड
वीडियोकॉन टॉवर, ई-1, झंडेवलान एक्सटेंशन
नई दिल्ली 110055
विषय: आपके चैनल में अग्रेज़ी और रोमन लिपि के बढ़ते इस्तेमाल के सम्बन्ध में शिकायत.
महोदय,
पिछले कई वर्षों से आपका चैनल नियमित रूप से देखता आ रहा हूँ. १ साल पहले तक कई अन्य चैनल भी देखता था पर वह इसलिए बंद किये क्योंकि उसमें अंग्रेजी और रोमन लिपि का इतना अधिक प्रयोग शुरू हो चुका है कि उन्हें हिंदी चैनल कहने में भी शर्म आती है. मैंने उनके संपादकों को लिखा भी कि हिंदी चैनल को अर्द्ध-अंग्रेजी चैनल (सेमी-इंग्लिश) मत बनाइये पर उनकी सोच ही दयनीय है.
दादाजी जो ९६ वर्ष के हैं उनको हिंदी चैनल देखने के लिए भी बीच- बीच में आने वाले अनावश्यक अंग्रेजी और रोमन शब्दों के लिए हमारा मुंह ताकना पड़ता था जैसे कि वे अनपढ़ बना दिए गए जबकि वे हिंदी के अच्छे जानकार रहे हैं, पर अंग्रेजी कभी पढ़ी नहीं थी. हमने और हमारे साथियों ने तभी से अन्य चैनल देखना बंद करने का निश्चय किया.
पर समस्या फिर खड़ी हो गयी है अब हमारे आजतक को भी अंग्रेजी और रोमन में लिखने की बीमारी लग गयी है. हमारी खीज और गुस्सा बढ़ गया है, दुःख भी हो रहा है कि हमारी भाषा के पैरोकार की उसे दयनीय और हीन बना रहे हैं, वो भी बेतुके बाज़ारवाद के नाम पर. आप लोग क्यों नहीं समझ रहे कि हिंदी का चैनल हिंदी में समाचार देखने/सुनने के लिए होता है ना कि अंग्रेजी के लिए? उसके लिए अंग्रेजी के चैनल हैं.
हिंदी में न्यूज़ और खबर के लिए एक बहुत सुन्दर शब्द है ‘समाचार’ जिसका प्रयोग दूरदर्शन के अलावा किसी भी निजी चैनल पर वर्जित जान पड़ता है ऐसे ही सैकड़ों हिंदी शब्दों को डुबाया/कुचला जा रहा है, नये-नये अंग्रेजी के शब्द थोपे जा रहे हैं.
मैं यह पत्र अपने अंतिम प्रयास के रूप में लिख रहा हूँ और आपसे हाथ जोड़कर विनती करता हूँ कि हमारी माँ हिंदी को हीन और दयनीय बनाना बंद कर दीजिये, उसे आगे बढ़ने दीजिये.
मेरा विनम्र निवेदन, अपने समस्त हिन्दीभाषी साथियों की ओर से :
१. आजतक में अंग्रेजी के अनावश्यक शब्दों का प्रयोग बंद कर दीजिये.
२. अंग्रेजी के शब्दों को सिर्फ देवनागरी में लिखा जाए रोमन में नहीं.
३. फूहड़ और अश्लील विज्ञापनों (कोंडम,परफ्यूम, जोशे जवानी आदि )पर रोक लगायें ताकि आजतक अपनी परंपरा को बाजारू चैनल परंपरा में ना ढाल दे और उसका अस्तित्व बना रहे.
४. अपने चैनल में हिंदी संक्षेपाक्षरों के प्रयोग को बढ़ावा दीजिये.
आशा है आप हमारी शिकायत/सुझाव पर शीघ्र कारवाही करेंगे ताकि हम जैसे हिंदी के दर्शक हिंदी समाचार चैनल देखते रहेंगे वर्ना अधकचरा हिंदी चैनल के बदले हम अंग्रेजी चैनल देखने को मजबूर होंगे.
धन्यवाद सहित,
प्रवीण कुमार जैन
विधि प्रमुख एवं कंपनी सचिव, प्रशस्ति समूह
Legal-Head & Company Secretary, Prashasti Group
बी-६, इमारत क्र. जेएन २-६९, सेक्टर ९, वाशी, नवी मुंबई