Annu Anand : किसी भी बदलाव की पहली सीढ़ी जनून है. यह बात सच हो गई. दस साल पहले २००३ में दिल्ली से बस के रास्ते ब्यावर जाते हुए Arvind Kejriwal ने मुझसे कहा था कि वो पूरी तरह से अपनी सरकारी नौकरी छोड़ कर देश में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन करना चाहते हैं तो मैंने इसे एक क्रांतिकारी युवा का फितूर माना.
मैंने उन्हें ऐसा न करने की सलाह दी. उस समय मुझे लगा कि सरकारी दफ्तरों के नकारापन और भ्रष्टाचार से आतंकित सूचना के अधिकार का एक बेहद ईमानदार सिपाही भावुकता में बह रहा है. लेकिन आज अरविंद का जुनून सबके लिए सबक बन गया है. मेरा सलाम, बधाई और भविष्य के लिए ढेरों शुभ कामनाएं.
वरिष्ठ पत्रकार अन्नू आनंद के फेसबुक वॉल से.






