Balendu Swami : समलैंगिकता को गैर कानूनी ठहराने वाला सुप्रीम कोर्ट का फैसला अफसोसजनक है! धार्मिक रुढियों से ग्रस्त देश में आप और क्या आशा रख सकते हैं और इन्हीं धार्मिक रुढियों की वजह से हमारे देश में समलैंगिक सम्बन्धों को अक्सर 'अप्राकृतिक' कहा जाता है! जबकि हर संस्कृति और सभ्यता में यह हजारों वर्षों से चला आ रहा है और आधुनिक (मेडिकल रिसर्च) वैज्ञानिक कहते हैं कि 8% मनुष्य आनुवांशिक (जीन) कारणों से समलैंगिक होते हैं, और स्वभावतः प्राकृतिक रूप से उन्हें समलिंगी के प्रति ही आकर्षण होता है!
अब बताइये कि जब यह जन्मजात उनके DNA (जीन) में है तो फिर कैसे अप्राकृतिक हो गया! रामदेव, शंकराचार्य, मुस्लिम इमाम और पोप जैसे बहुत से धार्मिक मूर्ख कहते हैं कि यह एक बीमारी है! सिवाय धार्मिक फर्नाटिकों के कभी किसी डाक्टर ने इसे बीमारी नहीं कहा! परन्तु धर्मान्धों को वैज्ञानिक शोध की आवश्यकता नहीं होती! उनके लिए तो धरती चपटी है! हालाँकि धार्मिक हमेशा अपने धर्म को और उसकी मूर्खतापूर्ण परम्पराओं को हमेशा वैज्ञानिक बताते जरुर नज़र आयेंगे! असल में समलैंगिकता अप्राकृतिक नहीं बल्कि प्राकृतिक काम इच्छाओं का दमन अप्राकृतिक है.
वात्स्यायन भी 'कामसूत्र' में गुदा मैथुन और मुख मैथुन की बात कहते हैं! दुनिया को 'कामसूत्र' जैसा ग्रन्थ उपहार में देने वाले देश में यह कौन निर्धारित करेगा कि मैथुन का कौन सा प्रकार प्राकृतिक है अथवा अप्राकृतिक? आप अपने बिस्तर पर सेक्स कैसे कर रहे हैं, क्या इसका निर्देश अब कोर्ट से लेंगे!
भाजपा नेता ने समलैंगिकता के विषय में बालिग़ व्यक्ति के अधिकार के हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी! इसी पार्टी के लोग अन्धविश्वास के खिलाफ कानून का भी विरोध करते हैं! इस मानसिकता के लोगों को अगर सत्ता की शक्ति मिली तो पता नहीं ये कहाँ ले जायेंगे देश को! जो मित्र विकास की बात कहकर इनके प्रति सॉफ्ट कॉर्नर रखते हैं उन्हें सोचना चाहिए कि ये विकास नहीं सत्यानाश कर देंगे! इस विषय पर पूर्व अनुभव के आधार पर संघी मानसिकता के लोगों से निवेदन है कि वो यहाँ उल्टी न करें, धार्मिक मूर्खों के प्रति मेरी सहनशीलता अब और भी कम हो गई है, धन्यवाद!
प्रगतिशीलता के पक्षधर बालेंदु स्वामी के फेसबुक वॉल से.






