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आदिवासी इलाके से कवरेज कर लौटे तहलका के फोटोजर्नलिस्ट तरुण सेहरावत की मौत

आप सबके लिए, जो मल्टी नेशनल्स की नौकरी करके देश और दुनिया की सारी तकलीफों को भूल जाना चाहते हैं… आप सबको, जो अपने जीवन भर के संघर्ष के बाद बच्चों से कहते हैं कि अब तुम तो संघर्ष का रास्ता मत चुनो… वो एक लड़का था, महज 22 साल का… एक ड्राइवर का बेटा… तहलका नाम की एक मैगज़ीन में फोटोग्राफर हो गया… यूं तो वो बन सकता था सॉफ्टवेयर इंजीनियर… और एक दिन छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ में आदिवासियों की तकलीफों को कैमरे में सहेज कर लौटा तो शिकार हो गया उन्ही बीमारियों का जो आदिवासियों के बच्चों को न जाने कब से काल कवलित करती रहीं… तरुण सेहरावत फिर नहीं उठा… तरुण तुम्हारी याद उन तमाम के लिए भी एक डर है जो कहते रहे कि इस पीढ़ी में वो बात नहीं…वो आग नहीं..

आप सबके लिए, जो मल्टी नेशनल्स की नौकरी करके देश और दुनिया की सारी तकलीफों को भूल जाना चाहते हैं… आप सबको, जो अपने जीवन भर के संघर्ष के बाद बच्चों से कहते हैं कि अब तुम तो संघर्ष का रास्ता मत चुनो… वो एक लड़का था, महज 22 साल का… एक ड्राइवर का बेटा… तहलका नाम की एक मैगज़ीन में फोटोग्राफर हो गया… यूं तो वो बन सकता था सॉफ्टवेयर इंजीनियर… और एक दिन छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ में आदिवासियों की तकलीफों को कैमरे में सहेज कर लौटा तो शिकार हो गया उन्ही बीमारियों का जो आदिवासियों के बच्चों को न जाने कब से काल कवलित करती रहीं… तरुण सेहरावत फिर नहीं उठा… तरुण तुम्हारी याद उन तमाम के लिए भी एक डर है जो कहते रहे कि इस पीढ़ी में वो बात नहीं…वो आग नहीं..

तरुण से सिर्फ तीन-चार मुलाकातें थीं…बीट पर ही…और एक दो ईवेंट्स में…मिलो तो लगता था कि कितनी कम उम्र है लड़के की…और काबिलिय देखो…मुस्कान ऐसी थी कि हर बार खुद ही उसकी ओर कदम बढ़ जाते थे…जोश और आत्मविश्वास से लबरेज…तरुण तुमको नहीं पता है पर तुम हम में से कई के लिए प्रेरणा स्रोत बन गए हो…हिमांशु का नाम लेने पर बोले कि साथ चलिएगा अबकि लखनऊ तो आपका भी फोटो सेशन करूंगा…हाथियों पर बिठा कर….

मयंक सक्सेना के फेसबुक वॉल से.

जिन लोगों ने तरूण (Tarun) को देखा है वो जानते हैं कि उसकी एक मुस्कान मरते हुओं को ज़िंदा कर देने की ताकत रखती थी. वो मुस्कान हमारी रूह की ज़ीनत है लेकिन तरूण आखिर चला ही गया. अगर कहीं कोई भगवान है तो मेरा मन होता है कि उसका गिरेबान पकड़ कर पूछूं- कि आखिर ऐसा क्यों किया ?

हिमांशु बाजपेयी के फेसबुक वॉल से.

आज तहलका पत्रिका के पत्रकार तरुण सहरावत का देहांत हो गया ! उनकी उम्र मात्र बाईस साल थी ! बस्तर में अबूझमाड़ के आदिवासियों पर सरकारी हमले की रिपोर्टिंग करने तरुण सहरावत, पत्रकार तुषा मित्तल के साथ बस्तर गये थे ! जंगल में मच्छरों के काटने और तालाब का संक्रमित पानी पीने के कारण उन्हें टाइफाइड और सेरिब्रल मलेरिया हुआ और आज सुबह वो हमसे बिछुड गये ! तरुण एक शर्मीला, नम्र ,हंसमुख, और बहादुर नौजवान था ! उसकी मौत भी उसकी बहादुरी और उसकी पेशागत लगन की एक मिसाल है ! ये हम सब की व्यक्तिगत हानि है ! अलविदा साथी तरुण !

हिमांशु कुमार के फेसबुक वॉल से

कैमरे के साथ तरुण की जिंदगी का एक दृश्य

फेसबुक पर तरुण सेहरावत को उनके जानने चाहने वाले श्रद्धांजलि दे रहे हैं, याद कर रहे हैं, फेसबुक पर उन तक इस लिंक पर क्लिक करके पहुंचा जा सकता है… http://www.facebook.com/tarun17kumar

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