Vineet Kumar : आजतक के सरोकारी मीडियाकर्मियों से पूछा जाना चाहिए कि आसाराम की पुरानी स्टिंग को लेकर अभी तक उसकी आरती उतार रहे थे, संध्यावंदन कर रहे थे…और जो आपके तारे, एस्ट्रो अंकल उपाय बताते हैं क्या उससे पाखंड के बजाय जागरुकता अभियान को बढावा मिलता है?
आसाराम के बहाने चैनल लगातार पाखंड और अंधविश्वास पर चोट कर रहे हैं. ऐसे में कुछ लोगों के बीच मीडिया को लेकर फिर से आस्था का संचार शुरू होने लगा है. भैय्याजी, आप आस्था की पोटली बांधे घूमिए लेकिन ये तो बताइए कि ये अंधविश्वास और पाखंड की फसल का फरटीलायजर कौन बनकर काम कर रहा है ? बाबा चैनल पैदा करतै है,पोसता है,उसे ताकतवर बनाता है. इतना ताकतवर कि खुद वो मीडिया को नचाना शुरु कर देता है.
आपके तारे, कालचक्र, निर्मल दरबार, लाल किताब, यस आई कैन चेंज जैसे अंधविश्वास और पाखंड से जुडे कार्यक्रमों और विज्ञापनों के दिखाए जाने के पीछे चैनल के क्या तर्क हैं, अगर ये कि लोग देखना चाहते हैं तो ये तर्क तो आसाराम जैसे के पास भी है तो फिर चैनल उससे किस स्तर पक अलग है.
युवा मीडिया विश्लेषक विनीत कुमार के फेसबुक वॉल से.






