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आप धंधेबाज पाखंड़ी चैनलों से इससे ज्यादा कुछ और उम्मीद कर सकते हैं क्या?

Vineet Kumar : एबीपी और इंडिया न्यूज देश के उन महान चैनलों में से है जिसे बस चले तो उत्तराखंड की तबाही के नाम टी-सीरिज की भक्ति सीरिज वाले कैसेट्स लगाकर छोड़ दे. एबीपी जहां हजारों लोगों के फंसे होने, दर्जनों लोगों के मरने की खबर के बीच उत्साह से बता रहा है कि शिवजी का मंदिर बचा रह गया, चबूतरा नहीं बच सका, वही एबीपी न्यूज केदारनाथ और चारों धाम को लेकर पैकेज चला रहा है..आप धंधेबाज पाखंड़ी चैनलों से इससे ज्यादा कुछ और उम्मीद कर सकते हैं क्या?

Vineet Kumar : एबीपी और इंडिया न्यूज देश के उन महान चैनलों में से है जिसे बस चले तो उत्तराखंड की तबाही के नाम टी-सीरिज की भक्ति सीरिज वाले कैसेट्स लगाकर छोड़ दे. एबीपी जहां हजारों लोगों के फंसे होने, दर्जनों लोगों के मरने की खबर के बीच उत्साह से बता रहा है कि शिवजी का मंदिर बचा रह गया, चबूतरा नहीं बच सका, वही एबीपी न्यूज केदारनाथ और चारों धाम को लेकर पैकेज चला रहा है..आप धंधेबाज पाखंड़ी चैनलों से इससे ज्यादा कुछ और उम्मीद कर सकते हैं क्या?

Vineet Kumar : "लहर का कहर". आजतक पर उत्तराखंड़ में आयी भारी तबाही को लेकर स्टोरी चलती रही..स्टोरी तो ठीकठाक ही थी और वैसे भी रितुल जोशी जैसी टीवी की पुरानी और मैच्योर एंकर-संवाददाता से इतनी उम्मीद तो रहती है है लेकिन लहर का कहर इस तरह से स्क्रीन पर टंगा रहा कि ये खबर की संवेदना को भंग कर रहा था..वैसे भी विज्ञापन धीरे-धीरे हमारे भावों, संवेदना और मानवीय व्यवहार से जुड़ी अभिव्यक्ति को खींचकर अपनी तरफ कर ले रहा है और न्यूज चैनल तक उसमे बहे जा रहे हैं..ऐसे मौके पर शब्द अपने अर्थ खोते नजर आते हैं..संभव है कि अगर लहर चिप्स कंपनी की नजर इस पर गई हो तो आजतक से सवाल कर सकते हैं- आपने लहर का इस्तेमाल इस तरह कहर के लिए क्यों किया, हमारे प्रोडक्ट की बदनामी होती है इससे..फर्ज कीजिए अगर लोगो,नाम,ब्रांड के साथ-साथ एक-एक करके शब्दों की कॉपीराइट होने लगे तो कितना मुश्किल होगा मानवीय संवेदना को ठीक-ठीक व्यक्त कर पाना.

विनीत कुमार के फेसबुक वॉल से.

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