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आम आदमी पार्टी की दिल्ली पुलिस से लड़ाई बिल्कुल दुरुस्त है, उसने सही मोर्चा खोला है

Mukesh Kumar : आम आदमी पार्टी की दिल्ली पुलिस से लड़ाई बिल्कुल दुरुस्त है। उसने सही मोर्चा खोला है। अगर आप को लेकर दुराग्रहों से ग्रस्त नहीं हैं तो पूरे घटनाक्रम की तह में जाकर उसे समझिए और तब प्रतिक्रिया कीजिए। इस व्यवस्था के तहत चलने वाले ढेर सारे धतकरम पुलिस की छत्रछाया में ही चलते हैं। वह अपने आप में माफिया बन चुकी है या फिर राजनीतिक माफिया का ही एक्संटेंशन है। इसलिए उससे लड़ना बेहद ज़रूरी है।

Mukesh Kumar : आम आदमी पार्टी की दिल्ली पुलिस से लड़ाई बिल्कुल दुरुस्त है। उसने सही मोर्चा खोला है। अगर आप को लेकर दुराग्रहों से ग्रस्त नहीं हैं तो पूरे घटनाक्रम की तह में जाकर उसे समझिए और तब प्रतिक्रिया कीजिए। इस व्यवस्था के तहत चलने वाले ढेर सारे धतकरम पुलिस की छत्रछाया में ही चलते हैं। वह अपने आप में माफिया बन चुकी है या फिर राजनीतिक माफिया का ही एक्संटेंशन है। इसलिए उससे लड़ना बेहद ज़रूरी है।

मुझे नहीं लगता कि इस लड़ाई का मक़सद दिल्ली पुलिस को अपने मातहत लाना भर है। इसका उद्देश्य उसे जवाबदेह बनाना भी है। राजनीति तो है ही मगर राजनीति तो कण-कण में है। अच्छा है जो एक सही मसले पर राजनीति हो रही है। इस पर भी गौर किया जाना चाहिए कि पूरा तंत्र जिसमें राजनीतिक दल से लेकर प्रशासन और मीडिया तक शामिल हैं, आप सरकार के प्रयोग को विफल होते देखना चाहता है और इसके लिए प्रयासरत भी होगा ही।

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार के फेसबुक वॉल से.


Manish Sisodia : गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस जितनी ताकत हमें रोकने में लगा रही है उसका एक अंश भी जमीन पर लगाती तो न बलात्कार होते, न ड्रग्स-सेक्स रैकेट चलते और न ही एक महिला को सरेआम जलाने वाले खुले घूमते। दिल्ली के इतिहास में, और शायद देश के इतिहास में भी, पहली बार होगा कि किसी राज्य सरकार का मुख्यमंत्री अपने तमाम मंत्रियों समेत, रायसीना हिल में सिमटी सत्ता को चुनौती देने के लिए, ठीक उसके दरवाजे पर धरने पर बैठेगा. अगर दिल्ली में महिला के बलात्कार होने के बाद, इलाके के एस.एच.ओ. से पूछा तक नहीं जाता, एक महिला सरेआम जला दी जाती है लेकिन पुलिस दोषियों को गिरफ्तार नहीं करती और ड्रग-सेक्स रेकेट को पकडने की जगह, उसे संरक्षण दे रही है, और कोई उसकी जवाबदेही तय करने वाला नहीं है, तो फिर ऐसी पुलिस के होने का फायदा क्या है? लगता है पिछले गृह सचिव आर के सिंह जी ठीक कह रहे थे. जब देश के होम मिनिस्टर के यहां से, पर्चियां भेजकर, एस.एच.ओ. के ट्रांसफर पोस्टिंग का धंधा चलेगा तो भला उनसे कैसे उम्मीद की जा सकती है कि किसी एस.एच.ओ. के खिलाफ आसानी से एक्शन ले सकें…. आज का धरना मूल रूप से यह सवाल उठाने के लिए ही है कि रायसीना हिल पर बैठी सरकार, दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा के मुददे तक पर बेहद संवेदनहीन है. सारी दिल्ली की जनता पुलिस की लापरवाही से दुखी है लेकिन केंद्र सरकार एक एस.ए.च.ओ. को सस्पेंड करने तक को तैयार नहीं है.

'आप' और दिल्ली सरकार में मंत्री मनीष सिसोदिया के फेसबुक वॉल से.

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