Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

सुख-दुख...

(आलोक स्मृति-चार) : नवीन कुमार ने सीधा और सधा निशाना साधा राहुल देव पर

प्रखर पत्रकार आलोक तोमर की दूसरी पुण्यतिथि पर 20 मार्च की शाम गांधी शांति प्रतिष्ठान में पत्रकारों का जबरदस्त जमघट ल। “मीडिया की भाषा” आयोजित विमर्श में संचालक राहुल देव काफी देर तक छाए रहे पर कार्यक्रम के आखिरी आधा घंटा राहुल देव पर भारी पड़ गया। ऐसा लगा कि भाषा पर चल रहे रोदन से आहत होकर आलोक तोमर प्रकट हो गए और तीखी नोंकझोंक से अचानक से सभागार का माहौल गरमा गया। विमर्श में शामिल गरिष्ठ वरिष्ठ संपादकों को कटघरे में खड़ा करते हुए आजतक के नवीन कुमार ने साफ अल्फाज में कह दिया कि भाषा के साथ व्याभिचार के असली कसूरवार आप सब हो, जो नौकरी देते वक्त भाषा के बजाय किसी और बात को ज्यादा महत्वपूर्ण मानते रहे हो।

प्रखर पत्रकार आलोक तोमर की दूसरी पुण्यतिथि पर 20 मार्च की शाम गांधी शांति प्रतिष्ठान में पत्रकारों का जबरदस्त जमघट ल। “मीडिया की भाषा” आयोजित विमर्श में संचालक राहुल देव काफी देर तक छाए रहे पर कार्यक्रम के आखिरी आधा घंटा राहुल देव पर भारी पड़ गया। ऐसा लगा कि भाषा पर चल रहे रोदन से आहत होकर आलोक तोमर प्रकट हो गए और तीखी नोंकझोंक से अचानक से सभागार का माहौल गरमा गया। विमर्श में शामिल गरिष्ठ वरिष्ठ संपादकों को कटघरे में खड़ा करते हुए आजतक के नवीन कुमार ने साफ अल्फाज में कह दिया कि भाषा के साथ व्याभिचार के असली कसूरवार आप सब हो, जो नौकरी देते वक्त भाषा के बजाय किसी और बात को ज्यादा महत्वपूर्ण मानते रहे हो।

नवीन का राहुल देव पर आरोप था कि अब मुख्यधारा से बाहर कर दिए गए हो तो पाप का ठिकरा किसी और के सिर फोड़कर बच निकलने के फिराक में लगे हुए हो। तल्खी के साथ कही गई बात राहुल देव को ऐसी चुभी कि वो मंच से आपा खोते नजर आए। आजतक के पूर्व न्यूज एडीटर कमर वाहिद नकवी को सफाई देनी पड़ी। सामने बैठे न्यूज नेशन के सीईओ शैलश भी तिलमिलाए नजर आए।

आलोक स्मृति विमर्श को तल्लीनता के साथ सुनतीं एक श्रोता.

आलोक स्मृति विमर्श में शिरकत करने पहुंचे अलग-अलग चैनलों के हेड दीपक चौरसिया और शैलेश एक साथ फोटो खिंचाते नज़र आए.

आयोजन में इंडिया न्यूज के एडीटर इन चीफ दीपक चौरसिया ने हिंदी को अंग्रेजी से बडा बताते हुए कहा कि जब अंग्रेजी के मंच से हिंदी के पत्रकारों की बात नहीं होती तो हम अंग्रेजी अंग्रेजी क्यों गाते रहते हैं। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी वाले खुद को और अपनी भाषा को प्रमोट करने, बढ़ाने के लिए एकजुट रहते हैं पर हिंदी वाले एक दूसरे की टांग खिंचाई में लगे रहते हैं, उनकी भाषा व खुद को प्रमोट करने के प्रति एकजुटता नहीं है।

विमर्श में समाचार प्लस के मंयक सक्सेना और न्यूज एक्सप्रेस के विवेक ने पत्रकारों के पिछली पीढी को आईना दिखाने में कोई कसर नहीं छोडी। मीडिया की भाषा जैसे गूढ मसले को दर्जन भर वक्ताओं ने अपने अपने आईने से समझाने की कोशिश की। तो भडास4 मीडिया के संपादक ने स्वर्गीय आलोक तोमर के लिखे उद्धरणों का हवाला देकर बताने की कोशिश की भाषा में सहजता और सरलता लाना सरोकार वाले पत्रकार के ही वश की बात है। यह सिर्फ वैचारिक प्रवाह से संभव नहीं है।

चौथी दुनिया के संपादक संतोष भारतीय ने दो शब्दों में अपनी बात रखी हो। मुख्य वक्ता के तौर पर कमर वाहिद नकवी ने भाषा को लेकर अपने अभियान का हवाला दिया।

जयपुर से आए ईटीवी के ईश मधु तलवार ने आलोक तोमर की लेखनी को सरोकार की लेखनी बताया तो राजस्थान पत्रिका के दुष्यंत ने आलोक तोमर से न्यूएज मीडिया पर हुई बातचीत की याद दिलाई। भारत सरकार के संयुक्त सचिव चितरंजन खेतान ने इंडिया टूडे में अपने नौकरी के दिनों की याद करते हुए कहा कि हिंदी के पत्रकारों में अंग्रेजी की तुलना में ज्यादा बडी पहुंच का गौरव होना चाहिए।

लगातार तीन घंटे विमर्श कार्यक्रम चलता और स्वर्गीय आलोक को चाहने वालों से प्रतिष्ठान का सभागार खचाखच भरा रहा। मंच से राजेश बादल, मुकेश कुमार, कुमार राकेश, शगुन टीवी के अनुरंजन झा ने आलोक तोमर से जुडे संस्मरण पेश किए तो सभागार में रामबहादुर राय, इंडिया टीवी के हेमंत शर्मा, कुमार संजॉय सिंह, नेशनल दुनिया के कुमार आनंद, कार्टूनिस्ट सुधीर तैलंग. प्रदीप सौरभ, संजीव आचार्य, कुशाल जेना, इरा झा, बिंदिया की संपादक गीताश्री, दिल्ली सरकार के मंत्री डॉ एके वालिया के निजी सचिव सतीश भट्ट समेत कई गणमान्य पत्रकार मौजूद रहे। 

इस मौके पर आलोक तोमर के नाम पर पत्रकारिता के दो पुरस्कारों की घोषणा की गई। पहला, पांच से सात साल के अनुभव वाले प्रखर और सरोकार वाले पत्रकार को चयनित कर आलोक तोमर पुरस्कार, तो दूसरा किसी महत्वपूर्ण पत्रकारिता संस्थान के प्रखर पत्रकार को आलोक तोमर फेलोशिप दी जाएगी। फेलोशिप के तहत चयनित पत्रकार के संस्थान का शुल्क वहन किया जाएगा।

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...