Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal

प्रिंट-टीवी...

आशुतोष के ‘एजेंडे’ में मीडिया – एनके पर भारी पड़े पुण्य (देखें वीडियो)

ये मीडिया के डेमोक्रेटाइजेशन का दौर है. यह वक्त हर संस्था, हर शासक, हर एलीट पर सवाल खड़े किए जाने का है. जो मीडियावाले मदमस्त होकर पेड न्यूज और भूत-पिशाच तक को अपने निजी फायदों व निहित स्वार्थों के लिए करने-दिखाने लगे थे, उन्हीं मीडिया वालों की अब घिग्घी बंधने लगी है. क्योंकि उनकी आंखों में आंखें डालकर सवाल किए जाने लगे हैं और उनसे उनके मीडिया होने की प्रासंगिकता को साबित करने को कहा जा रहा है. एक तरफ मारकंडे काटजू जैसा शख्स मीडिया वालों को आइना दिखाकर अपनी सेहत-सीरत दुरुस्त करने के लिए चाबुक चला रहा है, जो बिलकुल उचित है.

ये मीडिया के डेमोक्रेटाइजेशन का दौर है. यह वक्त हर संस्था, हर शासक, हर एलीट पर सवाल खड़े किए जाने का है. जो मीडियावाले मदमस्त होकर पेड न्यूज और भूत-पिशाच तक को अपने निजी फायदों व निहित स्वार्थों के लिए करने-दिखाने लगे थे, उन्हीं मीडिया वालों की अब घिग्घी बंधने लगी है. क्योंकि उनकी आंखों में आंखें डालकर सवाल किए जाने लगे हैं और उनसे उनके मीडिया होने की प्रासंगिकता को साबित करने को कहा जा रहा है. एक तरफ मारकंडे काटजू जैसा शख्स मीडिया वालों को आइना दिखाकर अपनी सेहत-सीरत दुरुस्त करने के लिए चाबुक चला रहा है, जो बिलकुल उचित है.

और दूसरी तरफ पुण्य प्रसून बाजपेयी जैसे लोग हैं जो मीडिया में रहते हुए मीडिया को जनता के पास फिर से ले जाने और मीडिया में नेतृत्वकारी स्थिति में आ गए पेजमेकरों-वीडियोएडिटरों-मैनेजरों-चापलूसों को भगाने के लिए अपने स्तर पर जोरशोर से लिख-बोल कर प्रयास कर रहे हैं. न्यू मीडिया वेब ब्लाग आदि के लोगों ने टीवी-प्रिंट के संचालकों-संपादकों की गलती, फिसलन पर तगड़ी नजर बना रखी है और उनकी हर एक चूक, सायास पतन, फ्राड, हिप्पोक्रेसी, दर्शकों से धोखाधड़ी को खबर बनाकर बड़े पैमाने पर नेट के जरिए प्रचारित प्रसारित करते रहते हैं.

हर तरफ से पड़ने वाले इन दबावों का असर न्यूज चैनलों के संपादकों पर देखा जा सकता है. तभी तो सुधरने के वास्ते इन संपादकों ने एक संगठन बनाया और उस संगठन के जरिए समय समय पर अपने लिए 'नियमन' सरीखे निर्देश-आदेश-गाइडलाइन जारी करते रहते हैं. अभी हाल में ही इन लोगों ने खुद के लिए एक अनुशासन लागू किया कि वे लोग एश्वर्या राय की डिलीवरी कराने में संयम बरतेंगे. इसी पूरे प्रकरण को आईबीएन7 के मैनेजिंग एडिटर आशुतोष ने अपने एजेंडे में लिया और बहस के लिए अन्य लोगों के साथ एनके सिंह (न्यूज चैनलों के संपादकों की संस्था बीईए के महासचिव) और पुण्य प्रसून बाजपेयी (जाने माने एंकर और पत्रकार) को भी बुलाया. एनके और पुण्य के बीच की बहस, बातचीत मीडिया के हर शख्स को जरूर देखना-सुनना चाहिए. पुण्य इस बहस में सब पर भारी पड़ते दिखे. एक खांटी पत्रकार का तेवर दिखता रहा.

एनके सिंह के कंधों पर दूसरे न्यूज चैनलों के संपादकों का भी दायित्व था, बीईए का महासचिव होने के वास्ते, सो, जाहिर है कि उन्हें डिफेंसिव मुद्रा में रहना था, बावजूद इसके उन्होंने अपने ज्ञान-अध्ययन के जरिए सबको करारा जवाब देने की कोशिश करते हुए बोलती बंद कराने का प्रयास किया. इस मजेदार बहस को आईबीएन7 की वेबसाइट पर देख सुन सकते हैं. नीचे दिया जा रहा है लिंक, जिस पर क्लिक कर आप संबंधित बहस के वीडियो के देख-सुन सकते हैं. हां, देखने के बाद जरूर बताएं कि पूरी बहस में आपको क्या समझ में आया और इस मुद्दे पर आपको क्या लगता है.

एजेंडा – न्यूज चैनलों पर सेल्फ रेग्यूलेशन का डंडा


(सुनें)

 

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadas … मोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia  …

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...