कल देर रात जब भड़ास के एडिटर यशवंत ने आईबीएन7 के मैनेजिंग एडिटर आशुतोष को फोन कर यह कनफर्म करना चाहा कि क्या उन्होंने आईबीएन7 से इस्तीफा दे दिया है तो इस पर आशुतोष भड़क गए और समय का हवाला देने लगे. उन्हें यशवंत ने बताया कि आईबीएन7 से इस्तीफे से संबंधित कई फोन आए हैं और फेसबुक पर आईबीएन7 के कुछ लोग आशुतोष की फोटो यह कहकर शेयर कर रहे हैं कि ये आफिस में अंतिम मुलाकात है, इसलिए यह जानना जरूरी है कि आपने इस्तीफा दिया है या नहीं, इस पर भी आशुतोष यही कहते घुड़कते डांटते रहे कि यह कोई वक्त है फोन करने का.
यशवंत लगातार पूछते रहे कि आप हां या ना में जवाब दे दो कि इस्तीफा दिया है या नहीं. पर आशुतोष सिर्फ एक लाइन रटते रहे कि ये कोई टाइम है फोन करने का. उल्लेखनीय है कि भड़ास के एडिटर यशवंत ने आशुतोष को दिन में फोन किया पर आशुतोष ने फोन नहीं उठाया. तब एसएमएस किया. उसका भी जवाब नहीं आया. ऐसे में देर रात जब कई फोन आए कि आशुतोष का इस्तीफा फाइनली हो गया है, तब उन्होंने एक अलग नंबर से आशुतोष को फोन किया तो उन्होंने उठा लिया. पर ज्योंही आशुतोष ने सुना कि ये यशवंत का फोन है, वे भड़क गए और समय का हवाला देने लगे.
आज सुबह आशुतोष ने यशवंत को फोन कर रात के दुर्व्यवहार के लिए माफी मांगी और इस मामले को तूल न देने की अपील की. यशवंत ने उनसे कहा कि अगर देश दुनिया में कोई दूसरा नेता अफसर मंत्री इस्तीफा देता तो जाने कितने मीडिया वाले उसे कितनी बार फोन करते रहते और लगातार करते रहते, बिना रात दिन देखे, ये कहते हुए कि खबर तो खबर होती है, इसमें टाइम नहीं देखा जाता. लेकिन जब भड़ास ने मीडिया को एक बीट की तरह मानकर लगातार उसकी रिपोर्टिंग कर रहा तो मीडिया के संपादक लोग रात को फोन करने पर जाने क्यों भड़क जाते हैं. एक संपादक जो आजकल चिटफंडिया बन गया है, रात के फोन से इतना नाराज हुआ कि पुलिस में फर्जी कहानियां तक यशवंत के खिलाफ लिखवा दी और शासन सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों की सिफारिश लगवाकर यशवंत को जेल भिजवा दिया. पर यशवंत के लिए जेल क्या और बाहर क्या. जहां बैठे वहीं मंगल मंगल जय जय.
लेकिन सोचने की जरूरत संपादक लोगों को है. आखिर संपादक लोगों के पास इतना बड़ा सा इगो क्यों है. आखिर संपादक लोग इतने बड़े हिप्पोक्रेट क्यों हैं. आखिर संपादक लोग खुद को बेहद एलीट और सुपरस्टेटस वाला क्यों मानते हैं. आखिर संपादक लोग खुद को महामठाधीश क्यों मानते हैं. संपादक लोगों के पास क्या इतनी धैर्य अक्ल नहीं कि अगर वो दूसरों को खबर बना सकते हैं तो खुद को भी खबर बनने के लिए तैयार रखें. बहरहाल, यशवंत ने आशुतोष द्वारा गल्ती कुबूल किए जाने के बाद उनसे कहा कि उनका गुस्सा स्थायी नहीं होता और न है, लड़ाई विचारों व सरोकार की है, जो आगे भी चलती रहेगी.
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