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इंडियन एक्‍सप्रेस एवं द संडे गार्जियन की खबरों की सच्‍चाई की जांच के लिए पीआईएल

डॉ. नूतन ठाकुर, कन्वेनर, नेशनल आरटीआई फोरम द्वारा दो समाचार पत्रों (इंडियन एक्सप्रेस तथा द संडे गार्जियन) में प्रकाशित भारतीय सेना के बिना बताए दिल्ली कूच करने तथा यह खबर केन्द्र सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री द्वारा साजिशन छपवाए जाने सम्बंधित अलग-अलग समाचारों के सम्बन्ध में उच्चस्तरीय जांच कराये जाने के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट, लखनऊ बेंच में पीआईएल दायर किया गया है. इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित समाचार में विवादास्पद खबर छपी थी. इसे तत्काल ही प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री ने पूरी तरह गलत बताया था. सेनाध्यक्ष ने इसे एक सोची समझी साजिश करार दिया था.

डॉ. नूतन ठाकुर, कन्वेनर, नेशनल आरटीआई फोरम द्वारा दो समाचार पत्रों (इंडियन एक्सप्रेस तथा द संडे गार्जियन) में प्रकाशित भारतीय सेना के बिना बताए दिल्ली कूच करने तथा यह खबर केन्द्र सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री द्वारा साजिशन छपवाए जाने सम्बंधित अलग-अलग समाचारों के सम्बन्ध में उच्चस्तरीय जांच कराये जाने के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट, लखनऊ बेंच में पीआईएल दायर किया गया है. इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित समाचार में विवादास्पद खबर छपी थी. इसे तत्काल ही प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री ने पूरी तरह गलत बताया था. सेनाध्यक्ष ने इसे एक सोची समझी साजिश करार दिया था.

द संडे गार्जियन के वेबसाइट पर इससे जुड़ी एक खबर प्रकाशित हुई. इस खबर में यह कहा गया था कि इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर एक केंद्रीय मंत्री के इशारे पर लिखी गई थी क्योंकि इस वरिष्ठ मंत्री के परिवार के लोग रक्षा सौदे की दलाली में संलिप्त हैं. खबर के मुताबिक़ मंत्री को यह विश्वास था कि इस खबर के कारण सेनाध्यक्ष को उनके पद से हटा दिया जाएगा और उनके परिवार वालों की दलाली का काम सुगम हो जाएगा. ठाकुर ने उच्च न्यायालय से यह प्रार्थना की है कि ये दोनों मामले बहुत ही गंभीर हैं और अतः इन दोनों मामलों की तुरंत उच्चस्तरीय न्यायिक जांच की जानी चाहिए.

उन्होंने इसमें प्रमुख सचिव, प्रधान मंत्री कार्यालय को प्रतिवादी बनाया है. उन्होंने यह कहा है कि चूँकि सेना की कूच से सम्बंधित खबर देश की अखंडता और एकता से सम्बंधित है, अतः यदि उच्च न्यायालय चाहे तो इस जांच की रिपोर्ट को गोपनीय रखे जाने का आदेश दे सकती है. लेकिन यदि यह बात सामने आती है कि सेना के कूच की बात बेबुनियाद थी तो खबर का खंडन करना मात्र पर्याप्त नहीं होगा बल्कि उस अखबार के खिलाफ इस तरह के अतिसंवेदनशील मामले पर झूठी खबर प्रकाशित करने के विषय में कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए.

इसी तरह से एक केन्द्रीय मंत्री द्वारा रक्षा सौदों में दलाली कर सकने के उद्देश्य से सेनाध्यक्ष को हटाये जाने हेतु खबर प्रकाशित कराने की बात सीधे-सीधे उच्चस्तरीय भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ है. यदि यह खबर सही है तो उस वरिष्ठ केन्द्रीय मंत्री के विरुद्ध तत्काल कार्यवाही होनी चाहिए और यदि वह खबर गलत है तो सम्बंधित अखबार के खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जानी
चाहिए. मामले में सुनवाई 10 मई 2012 (मंगलवार) को होगी.

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