इंडिया टुडे के सीनियर एडिटर श्यामलाल यादव को लेकर पिछले काफी दिनों से चल रही चर्चाएं आखिर सच साबित हुई. उन्हों ने फाइनली इंडिया टुडे से इस्तीफा दे दिया है. अब वे इंडियन एक्सप्रेस में सीनियर असिस्टेंट एडिटर बन गए हैं. उन्होंने आज ही इंडियन एक्सप्रेस ज्वाइन किया है. अपनी खोजी पत्रकारिता के लिए अलग पहचान बनाने वाले श्यामलाल यादव का जाना इंडिया टुडे के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है.
मूल रूप से यूपी के प्रतापगढ़ जिले के रहने वाले श्यामलाल यादव ने माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से डिग्री लेने के बाद सन 93 में जनसत्ता से करियर की शुरुआत की. डेढ़ साल यहां काम करने के बाद वे इंडिया टुडे से जुड़ गए. पांच सालों तक इंडिया टुडे को अपनी सेवाएं देने के बाद वे 2000 में अमर उजाला के नेशनल ब्यूरो से जुड़े. तीन साल तक यहां रहे. इसके बाद 2003 में वे दोबारा इंडिया टुडे से जुड़ गए. आरटीआई लागू होने के बाद उन्होंने इंडिया टुडे के लिए कई ऐसी खबरें ब्रेक कीं, जिनकी गूंज पूरी दुनिया में सुनाई पड़ी. पिछले तीन सालों में उन्होंने कई बड़ी इनवेस्टीगेटिव खबरें लिखीं.
श्यामलाल यादव को बेहतरीन पत्रकारिता के लिए दर्जनों छोटे एवं बड़े अवार्ड मिले, जिनमें रुरल रिपोर्टिंग अवार्ड, इंडियन एक्सप्रेस का बेस्ट इनवेस्टिगेटिंग रिपोर्ट अवार्ड, यूरोपियन कमिशन का लारेंजो नटाली अवार्ड तथा यूनेस्को द्वारा चयनित बेस्ट स्टोरी अवार्ड शामिल हैं. बताया जा रहा है कि श्यामलाल को इंडियन एक्सप्रेस में बेहतर पैकेज का ऑफर था, जिसके बाद उन्होंने इंडिया टुडे को अलविदा कह दिया.






