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‘इंडिया न्यूज’ के एक स्ट्रिंगर का स्टिंग (सुनें)

यूपी के एक जिले में 'इंडिया न्यूज' चैनल के एक स्ट्रिंगर का दर्जनों आडियो टेप भड़ास के पास किसी शख्स ने भेजा है. जिन शख्स ने भेजा है, वो अपना नाम और पहचान किसी भी कीमत पर उजागर नहीं कर रहे. उन्होंने 'खोलपोलन्यूज' नामक मेल आईडी से भड़ास को मेल भेजा और फिर लगातार इस बात के लिए दबाव बनाते रहे कि इन आडियोज को चलाया जाए. चूंकि आडियो एक दो नहीं बल्कि दर्जनों थे, इसलिए उन सभी को सुन पाना और फिर एएमआर से एमपी3 फार्मेट में कनवर्ट कर पाना बड़ा काम था, सो इस काम को उचित समय के लिए टाला जाता रहा.

यूपी के एक जिले में 'इंडिया न्यूज' चैनल के एक स्ट्रिंगर का दर्जनों आडियो टेप भड़ास के पास किसी शख्स ने भेजा है. जिन शख्स ने भेजा है, वो अपना नाम और पहचान किसी भी कीमत पर उजागर नहीं कर रहे. उन्होंने 'खोलपोलन्यूज' नामक मेल आईडी से भड़ास को मेल भेजा और फिर लगातार इस बात के लिए दबाव बनाते रहे कि इन आडियोज को चलाया जाए. चूंकि आडियो एक दो नहीं बल्कि दर्जनों थे, इसलिए उन सभी को सुन पाना और फिर एएमआर से एमपी3 फार्मेट में कनवर्ट कर पाना बड़ा काम था, सो इस काम को उचित समय के लिए टाला जाता रहा.

अंततः आज जब कई आडियोज भड़ास की टीम ने सुने तो पाया कि यह तो वही सब कहानी है जो हर जिले में न्यूज चैनल के ज्यादातर स्ट्रिंगर करते फिरते हैं. स्ट्रिंगरों के साथ मजबूरी ये है कि उन्हें चैनल वाले पैसे नहीं देते. बस माइक आईडी थमा दिया और छोड़ दिया फील्ड में छुट्टा. कई न्यूज चैनल तो माइक आईडी देने के नाम पर अच्छी खासी रकम स्ट्रिंगरों से वसूलते हैं. ऐसे में ये स्ट्रिंगर माइक आईडी लेकर ब्लैकमेलिंग और उगाही करने के लिए अभिशप्त हो जाते हैं. स्ट्रिंगर किसी भी न्यूज चैनल का सबसे जमीनी और सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं.

इनकी नियुक्ति न्यूज चैनल वाले ठोक-बजा कर करते हैं पर लगता है कि बाजार के इस दौर में ज्यादातर चैनलों ने सिर्फ पैसे को ही माई-बाप मान लिया है, इसलिए स्ट्रिंगर नियुक्ति में किसी पैमाने का नहीं बल्कि सिर्फ रेवेन्यू और सेटिंग-पीआर को तवज्जो दिया जाता है. कहने को तो ये स्टिंग 'इंडिया न्यूज' चैनल के एक स्ट्रिंगर का है, लेकिन इन टेपों को सुनेंगे तो पाएंगे कि खेल में ज्यादातर स्ट्रिंगर शामिल हैं. नीचे जो टेप हैं, उन्हें समझने के लिए कुछ संदर्भ देना जरूरी है.

यूपी के जिस जिले की ये बात है, वहां इंडिया न्यूज का स्ट्रिंगर सेल टैक्स के अपने कुछ कथित रिश्तेदारों के साथ मिलकर रेलवे स्टेशन से चोरी का माल निकलवाने में लगा रहता है. जो लोग इसको पैसे नहीं देते तो ये उनके माल को पकड़वाने में अहम भूमिका निभाता है. इन टेपों में माल पकड़वाने, न पकड़वाने, सेटिंग करने, पैसा लेने… आदि की बातें हैं. फिलहाल दस टेप यहां अपलोड किए जा रहे हैं. -एडिटर, भड़ास4मीडिया


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