इंडिया न्यूज में भड़ास देखना मना है. ये आदेश दीपक चौरसिया की तरफ से दिया गया है. इसके बाद चैनल की आईटी टीम ने भड़ास4मीडिया डाट काम डोमेन नेम को आफिस के सभी कंप्यूटरों पर ब्लाक कर दिया है. इस कारण इंडिया न्यूज के मीडियाकर्मी भड़ास अपने मोबाइल या टैब पर देख रहे हैं, वो भी चोरी चोरी चुपके चुपके.
असल में जब भड़ास पर आम आदमी पार्टी के फर्जी स्टिंग का पोलखोल शुरू हुए और इस स्टिंग के पीछे की ताकतों के बारे में जानकारी विस्तार से दी जाने लगी तो इससे इंडिया न्यूज प्रबंधन बौखला गया. दांव उल्टा पड़ता देख खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे की तर्ज पर इंडिया न्यूज आफिस के अंदर भड़ास को ब्लाक करा दिया ताकि इंडिया न्यूज के कर्मचारी हकीकत न जान सकें. पर आज के सूचना संचार में जब कोई जानकारी छिप नहीं सकती, यह कवायद हास्यास्पद बनकर रह गया. इंडिया न्यूज से जुड़े सभी लोग अब अपने मोबाइल, आईपेड, लैपटाप आदि पर भड़ास खोलकर पढ़ रहे हैं.
इस बारे में एक पत्रकार का कहना है कि दीपक चौरसिया जैसे लोगों को समझना चाहिए कि अगर वो पूरी दुनिया को अपने हिसाब से तोड़-मरोड़कर दिखाने बताने का ठेका लिए हुए हैं तो उनकी भी खबरें बताने दिखाने का ठेका सोशल मीडिया और न्यू मीडिया ले चुका है. पत्रकारिता का मतलब यह कतई नहीं होता कि आप एजेंडा पत्रकारिता और सुपारी पत्रकारिता करिए. टीआरपी के लिए आप किसी भी ईमानदार आदमी के खिलाफ मीडिया ट्रायल शुरू कर देंगे तो एक दिन ऐसा जरूर होगा कि कोई आपको चैलेंज कर देगा और आपकी हकीकत सबके सामने ला देगा. आम आदमी पार्टी के लोगों ने इंडिया न्यूज के कांग्रेसी मालिक विनोद शर्मा, संपादक दीपक चौरसिया और अनुरंजन झा के खिलाफ फर्जी स्टिंग करने को लेकर मुकदमा कर दिया है. आने वाले दिन में कई और खुलासे किए जाने की तैयारी चल रही है.






