अखबार वालों को मुगालता रहता है कि वे जो चाहें लिखें करे, जनता तो चिरकुट है, रियेक्ट न करेगी. पर ऐसा नहीं है बाबू. जनता जब रिएक्ट करती है तो बड़े बड़ों की हवा सरक जाती है. बिहार के कैमूर जिले के रामगढ़ में ऐसा ही कुछ हुआ. दैनिक जागरण और हिंदुस्तान वालों की ताकतवरों के पक्ष वाली पत्रकारिता के खिलाफ जनता उठ खड़ी हुई और इन दोनों अखबारों का जुलूस निकालते हुए हजारों अखबार जला डाले.
कैमूर जिले के रामगढ़ में 30 जुलाई को राजद कार्यकताओं और स्थानीय लोगों पर पुलिस द्वारा फायरिंग, आंसू गैस और पथराव किया गया. इसको लेकर वहां पर तनाव व्याप्त हो गया. इस पूरे घटनाक्रम का कवरेज दैनिक जागरण और हिंदुस्तान वालों ने प्रशासन के पक्ष में किया. पुलिस प्रशासन को बचाते हुए और बर्बरता की शिकार जनता को ही दोषी बताते हुए की गई रिपोर्टिंग से लोग नाराज हो गए.



इन लोगों ने गुरुवार की शाम को पटना से प्रकाशित होने वाले हिन्दी दैनिक हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण अखबार की हजारों प्रतियों को आग के हवाले कर अपने गुस्से को प्रकट किया. जनता के लोगों ने एक सभा कर कहा कि यहां के दो महत्वपूर्ण हिन्दी अखबार के दो पत्रकार प्रशासन के हाथों में बिक चुके हैं. ये जनता के हित में खबर न छापकर प्रशासन के पक्ष में खबरें छापते हैं. जस्टिस काटजू ने पहले ही कहा था कि यहां के अखबार सरकार के पक्ष में खबरें छापते हैं, ये सच बात रामगढ़ में देखने को मिला. ये अखबार जनता के हित की बात नहीं करते हैं बल्कि नीतीश सरकार और जिला प्रशासन के पक्ष में कार्य करते हैं.






