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सुख-दुख...

इनसे मिलो, ये हैं मैडम सकीना, एक उर्दू अखबार की नुमाइंदा हैं

: थर्टी फर्स्ट की डर्टी मेमोरी पिक्चर : इकतीस दिसबंर की तारीख दुनिया में भले ही जश्न का पर्व हो, लेकिन अखबारवालों के लिए कैसी होती है? यह बताने से पहले मैं उन भाइयों को गाली नहीं खाना चाहता हूं, जो अपनी रात बर्बाद करके इस होटल से लेकर उस क्लब तक नए साल के स्वागत की मस्ती के सुरुर को देखने के बाद उसको खबर के पैमाने में भरते हैं, ताकि संपादक के साथ पाठकों को भी इसका नशा सबेरे अखबार में दिखे। जश्न की ऐसी कई रातों का खुद भी साक्षी रहा।

: थर्टी फर्स्ट की डर्टी मेमोरी पिक्चर : इकतीस दिसबंर की तारीख दुनिया में भले ही जश्न का पर्व हो, लेकिन अखबारवालों के लिए कैसी होती है? यह बताने से पहले मैं उन भाइयों को गाली नहीं खाना चाहता हूं, जो अपनी रात बर्बाद करके इस होटल से लेकर उस क्लब तक नए साल के स्वागत की मस्ती के सुरुर को देखने के बाद उसको खबर के पैमाने में भरते हैं, ताकि संपादक के साथ पाठकों को भी इसका नशा सबेरे अखबार में दिखे। जश्न की ऐसी कई रातों का खुद भी साक्षी रहा।

जम्मू-कश्मीर में भी वहीं मनहूस तारीख आ गयी, जब अखबार के साथियों को खबर लिखने और पेज फाइनल करने के बीच में अगर अपने किसी खास का फोन आ गया तो शुभकामना के दो बोल भी नहीं बोल पाते हैं। इकतीस दिसंबर की मीटिंग में नए साल में रियासत को क्या नया मिलेगा इसकी न्यूज प्लानिंग के साथ संपादक प्रमोद भारद्वाज, फोटोग्राफर अंकुर की तरफ मुखातिब हुए। फोटो क्या करोगे? सर जो प्रोग्राम होगा, उसकी अच्छी फोटो ले आऊंगा। मेरे दिमाग में एक शब्द गूंज रहा है – गुड ब्वाय और गुड बाय। इसको पिक्चर में कैसे ढाला जा सकता है? कई आइडिया सामने आए लेकिन पसंद नहीं आया। मैं इसको लेकर क्या आइडिया हो? इसी सोच में डूबा था, तभी प्रमोद जी ने कहा कि दिनेश तुम बताओ, क्या हो सकता है। जब तक वह अपनी बात पूरी करते, मेरे दिमाग में एक आइडिया आ गया था। मैंने कहा तवी नदी पत्थरों को चीरते हुए पत्थरों को लेकर बहती है। तवी के किनारे अंकुर किसी मासूम बच्चे को ले जाए और छोटे-छोटे पत्थरों से गुड ब्‍वाय और गुड बाय 2008 लिखने के बाद फोटो कर सकते हैं। यह आइडिया पसंद आते ही अंकुर को इसे करने का फरमान जारी होने के साथ शाम को अच्छी फोटो आने पर इनाम देने की घोषणा के साथ मीटिंग खत्म।

मीटिंग खत्म होने के बाद जम्मू के विक्रम चौक स्थित अमर उजाला दफ्तर से बिना लक्ष्य के रघुनाथ मार्केट की तरफ बढ़ चला। ठंड के मौसम में फर का जैकेट भी हल्का लग रहा था।  तवी नदी के पुल पर पहुंचने के बाद अचानक पैर थम गए। पत्थरों से टकराते हुए बह रही तवी की धारा देखकर सोचने लगा कि अपनी जिदंगी भी ऐसे छोटे-बड़े पत्थरों से टकराकर चलते जाने की भगवान ने लिख दी है। साल के आखिरी दिन सोचने लगा कि आखिर मैंने क्या पाया? क्या खोया? बहुत देर तक काशी से जम्मू-कश्मीर आने के बारे में सोचता रहा? अपनी कमियों को ऊंगली के सहारे गिनने लगा तो हाथ-पैर की अंगुलियां कम पड़ गई। कमियों को गिनना छोड़कर माता रानी से प्रार्थना की कि अगर जाने-अनजाने में कोई गलती हो गयी हो तो माफ कीजिएगा। जिन्होंने मेरे साथ बुरा किया हो उनका भी बुरा न कीजिएगा लेकिन अच्छा भी न कीजिएगा। बाबा विश्वनाथ से लेकर माता रानी तक गुजर रहे साल की गलतियों के लिए दिल से माफी मांगने के बाद रघुनाथ मार्केट की तरफ बढ़ चला।

बाजार में थर्टी फर्स्‍ट का सुरूर चढऩे से पहले की खूब चहल-पहल थी। चहल-पहल पता नहीं क्यों अच्छी लग रही थी। घर फोन किया तो कक्षा तीन में पढऩे वाली छोटी बेटी क्षमा ने फोन उठाते हुए कहा कि आप कब आएंगे। मुझे अपनी सहेलियों को ग्रीटिंग कार्ड देना है। जल्द आने की बात कही तो वह गुस्सा होकर बोली आप क्रिसमस में भी नहीं आए मेला दिखाने। पापा आप बहुत झूठ बोलते हैं। उसको गॉड प्रामिस किया कि जल्दी आएंगे। खबर की तलाश में सीबीआई एसपी आफिस पहुंच गया। सीबीआई के एसपी गौड़ साहब मौजूद थे। उनके साथ चाय की चुस्की लेकर जब एक साल में भ्रष्‍टाचार के कितने मामले दर्ज हुए? यह जानने की कोशिश की तो पता चला कि जम्मू-कश्मीर के रहने वाले अधिकांश इंस्पेक्टर भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज करने की बजाए बाहर ही डील कर लेते हैं। एक साल में दर्ज हुए आंकड़ों का लेखा-जोखा लेकर शाम को ऑफिस आ गया। सीबीआई की सालाना कुंडली के बाद दूसरे की खबरों की एडिट करने में लग गया।

इसी बीच अंकुर फोटो लेकर आ गया था, संपादक के दिमाग के हिसाब से वो फोटो खींचने में सफल रहा। तवी नदी के किनारे एक फटेहाल और एक खूबसूरत बच्चे को पत्थरों से गुड ब्वाय और गुड बाय लिखते हुए फोटो ले आया। फटेहाल बच्चे वाली फोटो यह कहकर खारिज हो गयी कि इसकी फोटो देखकर पाठकों के दिमाग में सवाल खड़ा होगा, क्या इसको अंग्रेजी आती है? मासूम बच्चे वाली फोटो फ्रंट पेज के लिए फाइनल हुई। अंकुर को सौ रुपए का नकद इनाम मिला। रात नौ बजे संपादक मुझे अपने कमरे में बुलाकर एक कार्ड थमाते हुए कहा कि दिनेश मैं चाहता हूं तुम थर्टी फर्स्‍ट को एंज्वाय करने के साथ इसकी एक खबर भी फाइल करो। अंकुर के साथ उस पार्टी में पहुंचा तो वहां का रंगीन माहौल देखकर लगा नहीं कि मंदिरों की नगरी जम्मू में हूं। अंकुर तो जाने के बाद अपने पीने के जुगाड़ में लग गया। सेना के रिटायर अफसर, नेताओं के साथ पत्रकारों की मस्ती देखने लायक थी। ऐसी पार्टियों में जुगाड़ से दूर रहने की आदत नहीं है, फिर भी पता नहीं क्यों आज मन नहीं कर रहा था। अकेले बैठकर सिगरेट के कश उड़ा रहा था कि तभी अंकुर सूप का बाउल लेकर आया। बोला सर आप सूप लीजिए। सूप का पहला स्पून हलक में जाते रम का जायका समझ में आ गया, लेकिन उससे कुछ कहा नहीं। एक बाउल खत्म होने के बाद अंकुर से दूसरा भी लाने को कहा।

इसी बीच जेके चैनल के एक रिपोर्टर एक खूबसूरत महिला के साथ नजदीक आए, इनसे एक बार सीबीआई आफिस में मुलाकात हो चुकी थी। मेरी और मुखातिब होते हुए कहा कि इनसे मिलो यह मैडम सकीना। एक उर्दू अखबार की नुमाइंदा है। तुम्हारी खबरों को पढ़ने के बाद मिलने की बात कई बार मुझसे की। आज तुम मिल ही गए। आउट आफ कंट्रोल हो चुकी मैडम सकीना हाथ मिलाने के बाद बगल में बैठ गयी। फारुख शेख से लेकर रुबिया सईद से तक दोस्ताना की बात कहते हुए ड्रिंक का आफर किया। सूप का दो पैग पहले ही ले चुका था, और लेने पर खुद आउट आफ कंट्रोल होने के डर से इनकार कर दिया। मैडम शकीना से बातचीत का सिलसिला चल रहा था, इसी बीच फ्लोर पर डांस स्टार्ट हो गया। मैडम शकीना ने डांस का चांस देते हुए कहा कम विथ मी। आफिस जाकर खबर लिखने का बयाना होने के कारण ..सारी बोला तो उसको बुरा लग गया। मेरे साथ डांस के लिए कितने लोग तरसते हैं तुम इनकार कर रहे हो। हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू में ढेरों बातें सुनने के बाद दिल कर रहा था कि मैडम शकीना का दुरुस्त कर दिया जाए, लेकिन माता रानी के आशीर्वाद से गुस्से पर कंट्रोल हो गया। अंकुर को वहीं छोडक़र बाहर निकल आया। नए साल के स्वागत में अभी एक घंटे का समय का बाकी था। पैदल ही आफिस पहुंचकर खबर फाइल की। खबर कम्पलीट होने तक बारह बज गए थे। हैप्पी न्यू ईयर ..हैप्पी न्यू ईयर की गूंज होने लगी। हैप्पी न्यू ईयर के बीच शेरावाली मां का जयकारा सब ने मिलकर लगाए। मां के जयकारा के बाद संपादक को गुड नाइट बोलकर चल दिया। विक्रम चौक से गांधीनगर तक की राह में माता रानी से नए साल का सूरज नई किरण लेकर आए यह प्रार्थना करता रहा।

जारी….

लेखक दिनेश चंद्र मिश्र जम्‍मू में अमर उजाला से जुड़े हुए हैं. उनका यह लेख उनके ब्‍लॉग रोमिंग जर्नलिस्‍ट से साभार लेकर प्रकाशित किया गया है. 

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