किस कदर दोहरी जिंदगी जीते हैं लोग. बाहरी चेहरा झकझक सफेद तो असली चेहरा बिल्कुल स्याह, काला, भयावह. जिसकी सच्चाई सामने आ गई वह चोर, जिसकी नहीं आई वह शाह. यह खबर भी ऐसी ही दोहरी जिंदगी जीने वालों के पोल खोल सकती है. अब इसमें कितनी सच्चाई है यह तो जांच के बाद पता चलेगा, पर यह खबर ने सभ्य समाज में रहने वाले भेडियों का पोल खोलने के लिए काफी है.
रेनू, उम्र 42 साल, दो बच्चों की बिन ब्याही मां. बच्चों के बाप का नाम पता नहीं. अब रेनू बच्चों के बाप का नाम चाहिए ताकि वह अपने बच्चों की परवरिश कर सके. रेनू ने हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में अपने बच्चों के असली पिता का पता लगाने के लिए अर्जी दी है. अर्जी में रेनू ने कहा है कि उसके बच्चों के दस पिता है वो किसका नाम दे. उसने कोर्ट को जो नाम बताए हैं, उसमें राधेश्याम सिंह एवं संजय पांडेय समेत दस लोगों के नाम हैं. इसमें तो कई लोगों का तो हाल पता भी उसे नहीं मालूम हैं.
न्यायमूर्ति अब्दुल मतीन एवं न्यायमूर्ति एवं न्यायमूर्ति सुनील हाली की खंडपीठ ने रेनू को सभी लोगों का सही पता जानकार तीन सप्ताह में कोर्ट को जानकारी देने का समय दिया है. रेनू ने जिस संजय पांडेय का जिक्र अपनी अर्जी में किया है, वे इस समय डेक्कन हेराल्ड के यूपी हेड हैं. वह पीटीआई से भी जुड़े रहे हैं. संजय भी रेनू के इस आरोप से आवाक हैं. संजय पांडेय ने बी4एम से कहा कि मैं खुद शाक्ड हूं, मैं उस औरत को नहीं जानता फिर भी अर्जी में मेरा नाम दिया गया है.
अब पूरी सच्चाई तो अदालत के आदेश के बाद सामने आएगी, पर अगर इसमें तनिक भी सच्चाई है तो यह सभ्य समाज के लिए सही नहीं है. इससे यह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि क्या पुरुष की नजर में महिला मात्र एक सामान है कि जब जी चाहा इस्तेमाल किया और फिर छोड़ दिया. खैर, इस खबर को हिंदुस्तान ने भी अपनी लीड स्टोरी के रूप में प्रकाशित किया है.







