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इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को हिस्टीरिया की बीमारी है, जिसके दौरे समय-समय पर पड़ते रहते हैं

भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया हिस्टीरिया नामक बीमारी से ग्रसित है। टीआरपी के चक्कर में इस बीमारी के दौरे समाचार चैनलों को अक्सर पड़ते रहते हैं। अन्ना का आंदोलन रहा हो या क्रिकेट की कोई घटना, दिल्ली में निर्भया के साथ हुई शर्मनाक घटना हो या शोभन सरकार का सुनहरा सपना, विजुअल मीडिया को हिस्टीरिया का दौरे पड़ने का कोई न कोई कारण मिलता रहा है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के तमाम धुरंधर लाभ  के लिए इस प्रकार के दौरों को पसंद करते हैं। फिलहाल तरूण तेजपाल और गुजरात सरकार द्वारा एक लड़की की जासूसी और आप का स्टिंग इन दौरों का कारण बने हुए हैं।
भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया हिस्टीरिया नामक बीमारी से ग्रसित है। टीआरपी के चक्कर में इस बीमारी के दौरे समाचार चैनलों को अक्सर पड़ते रहते हैं। अन्ना का आंदोलन रहा हो या क्रिकेट की कोई घटना, दिल्ली में निर्भया के साथ हुई शर्मनाक घटना हो या शोभन सरकार का सुनहरा सपना, विजुअल मीडिया को हिस्टीरिया का दौरे पड़ने का कोई न कोई कारण मिलता रहा है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के तमाम धुरंधर लाभ  के लिए इस प्रकार के दौरों को पसंद करते हैं। फिलहाल तरूण तेजपाल और गुजरात सरकार द्वारा एक लड़की की जासूसी और आप का स्टिंग इन दौरों का कारण बने हुए हैं।
 
विजुअल मीडिया में टीआरपी का खेल बेहद निराला और रोचक है। मीडिया को गहराई से समझने वाले कहते हैं कि खबरें शून्य से ईजाद नहीं होती हैं, लेकिन यह भी सच है कि टीआरपी के चक्कर में खबरों का तिल से ताड़ बना दिया जाता है। इस प्रक्रिया में राष्ट्र व समाज हित की बहुत सी आवश्यक खबरें टीवी के दृश्य पटल से गायब रहती हैं। भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया बीबीसी व अल जजीरा से इतर ब्रेकिंग न्यूज प्रणाली पर अधिक निर्भर है। कोस्ट कटिंग के दौर में यह प्रणाली भारतीय विजुअल मीडिया को भी अधिक रास आ रही है। बीबीसी और अल जजीरा जैसे चैनलों में किसी प्रोग्राम को तैयार करने से पहले लंबी चौड़ी प्लानिंग के साथ गंभीर शोध कार्य किया जाता है। जबकि, ब्रेकिंग न्यूज सिस्टम में घट रही घटना को सनसनी व सबसे पहले की होड़ के साथ कवर करना होता है, जिसके लिए चैनल को केवल रिपोर्टर या स्ट्रिंगर की आवश्यकता होती है। खबर के मुताबिक यदि अधिक जरूरत महसूस हुई तो ओवी वैन भेज दी जाती है। इसके लिए न तो अधिक योजना बनाने की और न ही किसी प्रकार के शोध की आवश्यकता होती है।
 
दर्शकों ने टीन एज में चल रहे भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को पड़ने वाले इन हिस्टीरिया के दौरों का अक्सर सामना किया है। चलिए इसकी जांच-पड़ताल के लिए हालिया इतिहास को टटोलने की कोशिश करते हैं। सन 2011 में अन्ना आंदोलन को लेकर मीडिया ने अनियंत्रित उत्साह दिखाया था। दिल्ली के रामलीला मैदान के आंदोलन को देशभर का आंदोलन बना दिया था। अन्ना आंदोलन के उद्देश्य निर्विवाद रूप से श्रेष्ठ थे। इसके बाद रामदेव के आंदोलन को भी जमकर हवा दी गई। दिल्ली में निर्भया के साथ हुई शर्मनाक घटना के बाद मीडिया द्वारा ऐतिहासिक पैरवी। आइपील और आइपीएल में स्पॉट फिक्सिंग का खुलासा। मीडिया हिस्टीरिया पैदा करने वाली आगे की घटनाएं हैं, आसाराम व उसके बेटे के काले राजों का सामना आना। शोभन सरकार का सोने का सपना देखना और खुदाई का महाकवरेज। अब तरुण तेजपाल का स्कैंडल।
 
उपरोक्त सभी मामलों में 24 गुणा 7 चैनलों ने टीआरपी के चक्कर में एक घटना को इतना पीटा कि बाकि सभी खबरें दरकिनार हो गईं। एक ही खबर को लगातार हफ्तेभर या उससे भी ज्यादा समय तक दिखाया जाता रहा। मीडिया के इस व्यवहार की पैरवी करने वालों का कहना है कि इलैक्ट्रॉनिक मीडिया ने लोगों के अंदर सामूहिक चेतना (कलेक्टिव कांसियसनेस) लाने का काम किया है। विजुअल मीडिया के कारण ही निर्भया मामले के दोषियों को बेहद कम समय में सजा दिलाई जा सकी। लेकिन सच यह भी है कि निर्भया के बाद सैकेड़ों महिलाओं के साथ अत्याचार हुए, लेकिन मीडिया कितने मामलों में संजीदा हुआ यह सब जानते हैं। आंकड़ों के अनुसार देशभर में ऐसे मामलों में कोई कमी नहीं आई। विजुअल मीडिया का व्यवहार एक पृष्ठीय (केवल एक ही खबर को पूरे दिन दिखाना) हो या बहुपृष्ठीय (सभी महत्वपूर्ण खबरों को तरजीह देना) को लेकर गंभीर व स्वस्थ बहस की आवश्यकता है। वैसे इस संबंध में प्रिंट मीडिया को धन्यवाद दिया जा सकता है कि वह बहुपृष्ठीय होता है। टीआरपी प्रणाली से बाहर निकाल कर या सुधार कर ही मीडिया को हिस्टीरिया नामक बीमारी से बचाया जा सकता है।
 
साथ ही, मैं तहलका की महिला पत्रकार के साहस को नमन करता हूं, जिसने तरुण तेजपाल की घिनौनी हरकत को उजागर करने में वीरता दिखाई। मुख्यधारा मीडिया का रूख भी इस मामले में प्रशंसनीय रहा है, मीडिया को धन्यवाद। अन्य मीडिया संस्थानों में जारी ज्ञात-अज्ञात शोषण भी उजागर होना चाहिए और बंद होना चाहिए।
 
आशीष कुमार पत्रकारिता एवं जनसंचार के शोधछात्र हैं. इनसे संपर्क 09411400108 पर किया जा सकता है.
 
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