Yashwant Singh : दिल्ली के एक ओल्ड एज होम की लीज खत्म हो जाने से वहां पर रह रहे सैकड़ों बुजुर्ग सड़क पर आ गए हैं. हिंदुस्तान अखबार के रिपोर्टर ने जब इनमें से कुछ से बात की तो ये रो पड़े. किसी की तीन बेटियां, तीनों की शादी कर दी, और अब तीनों में से कोई मुड़ कर नहीं देख रही… कोई लंदन में पढ़ा-लिखा और भारत में जज रहा.. अब उसके बेटे के पास वक्त नहीं, वह कह रहा कोई और एनजीओ देख लो… ऐसी ही कहानी है ढेर सारे बुजुर्ग बापों की…
ये वो बाप हैं जिनने दारू की बजाय परिवार को ज्यादा प्राथमिकता दिया… जिन्होंने समाज-देश की बजाय अपने परिजनों के भले के लिए ज्यादा धन व समय संचय किया.. इन्होंने अपने हिसाब से खूब सीख-संस्कार दिए.. पर नतीजा क्या हुआ… उसी परिवार ने इन्हें त्याग दिया है… इसलिए पार्टनर, अपनी जिंदगी अपने हिसाब से जी लो.. किसी से उम्मीद मत रखना, किसी से उम्मीद मत करना और किसी को खुद से उम्मीद भी मत रखने दो… चीयर्स…
भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.






