समाचार प्लस यूपी-उत्तराखंड चैनल अगर कम समय में नम्बर एक बनने की तरफ अग्रसर है तो यह केवल खबरें दिखाने से ही संभव नहीं हुआ है, बल्कि इस संस्थान ने पत्रकारिता के मानकों का भी पूरा ख्याल रखा है. उमेश कुमार के नेतृत्व में यह चैनल और इसकी टीम जवाबदेह भी है. अन्य संस्थानों की तरह कंबल ओढ़ कर घी पीने की बजाय समाचार प्लस प्रबंधन पत्रकारिता की पारदर्शिता और सुचिता का भी उतना ही ख्याल रखता है. यह सिद्ध हुआ है प्रबंधन की एक त्वरित कार्रवाई से.
एक अखबारनुमा कटिंग के आधार पर भड़ास4मीडिया पर समाचार प्लस के सुल्तानपुर संवाददाता के बारे में एक खबर प्रकाशित की गई थी. भड़ास पर खबर पढ़ते ही प्रबंधन ने तत्काल संबंधित रिपोर्टर नितिन श्रीवास्तव से पूरा सच जानने के लिए स्पष्टीकरण मांग लिया. हालांकि जांच के बाद पता चला कि कुछ लोग नितिन और समाचार प्लस की तरक्की से खुश नहीं हैं, लिहाजा वे लोग साजिशन इस तरह की गतिविधियां चला रहे हैं. भड़ास ने भी पीडित बताए जा रहे शख्स से इस बारे में सच्चाई जानना चाहा परन्तु उन्होंने नितिन पर लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद करार दिया.
पीडि़त ने नितिन के पक्ष में एक शपथ पत्र भी प्रबंधन को भेजा. उमेश कुमार के अलावा इनपुट हेड प्रवीण साहनी भी पत्रकारों पर रहने वाले आरोपों को लेकर काफी संजीदा रहते हैं तथा तत्काल मामले में निर्णय लेते हैं. प्रवीण ने अपने स्रोतो से भी पूरे मामले की जांच कराई, जिसके बाद प्रबंधन ने नितिन को क्लीन चिट दिया. चैनल को आगे ले जाने के साथ पत्रकारिता के मानकों को भी काफी हद तक बचाए रखने के लिए उमेश कुमार और उनकी टीम को बधाई दी जानी चाहिए. नीचे प्रबंधन द्वारा नीतिन से मांगा गया स्पष्टीकरण…
सेवा में,
श्री प्रवीण साहनी
इनपुट हेड
समाचार प्लस
महोदय,
आज दिनांक पंद्रह मई २०१३ को दोपहर में मुझे नॉएडा आफिस से फ़ोन पर बताया गया की मेरे खिलाफ वेब-पोर्टल भड़ास4मीडिया पर कोई एक खबर प्रकाशित की गयी है जिसपर मुझसे स्पष्टीकरण माँगा गया है। इस सन्दर्भ में मुझे कुछ बातें आपको अवगत करानी है।जिले में फरवरी माह में एक दैनिक अखबार के फोटोग्राफर को पुलिस अधीक्षक के कार्यालय में पुलिस कर्मियों द्वारा पीटा गया था जिसे लेकर जिले के लगभग सभी प्रिंट-इलेक्ट्रानिक मीडिया के पत्रकार एसपी के विरोध में चल रहे है।एसपी द्वारा दोषी मातहतो पर किसी तरह की कोई कार्यवाही न किये जाने से उनके विरोध की लडाई लम्बी खिचती जा रही है।जैसा की आप सभी को ज्ञात भी होगा की मै भी इस विरोध में शामिल हूँ। विरोध की लडाई लम्बी खिचती देख जिले के पत्रकारों में इस बात को लेकर वैचारिक मतभेद उत्पन्न हो गया है,जिसकी वजह से कुछ पत्रकार पुलिस अधीक्षक के पक्ष में आ गए है और कई बार मुझपर भी विरोध ख़त्म करने का दबाव निरंतर बनाया जा रहा है।लिहाजा मुझे लगता है की मुझे किसी साजिश का शिकार बनाया जा रहा है।
जहाँ तक बात भड़ास4मीडिया में मेरे बारे में छपी खबर की है,मैंने भी इस खबर को आपकी जानकारी देने के बाद पढ़ा है।मैंने इस मामले की अपने स्तर से पूरी तहकीकात भी की है,जिले में या फिर सूचना कार्यालय में मुझे ऐसा कोई अख़बार नहीं मिला जिसमे इस तरह की किसी खबर के बारे में कुछ प्रकाशित हुआ हो।जहाँ तक मेरी बात है मेरा उस हास्पिटल के संचालक/डाक्टर से दूर-दूर तक किसी भी तरह का कोई वास्ता नहीं है,रही बात पीड़ित पक्ष की तो उससे मेरे बारे में आप स्वयं तहकीकात कर सकते है बतौर अपनी सफाई मै उस पीड़ित व्यक्ति द्वारा अपने निर्दोस होने के सम्बन्ध में दिया गया शपथ पत्र के साथ उसका रिकार्डेड बयान और अन्य अखबारों में प्राकशित खबरों की कटिंग भी आपको भेज रहा हूँ,उम्मीद है की आप खुद की तहकीकात के बाद मुझे इस मामले में निर्दोष पायेंगे।जहाँ तक मेरी बात है मैंने जबसे इस संस्थान को ज्वाइन किया है अबतक ऐसा कोई कार्य नहीं किया है जिससे मेरी व्यक्तिगत व मेरे संस्थान की बदनामी हो।
अतः आपसे विनम्र निवेदन है की मामले की पूरी पड़ताल कर खुद मेरे निर्दोष होने का प्रमाण दे। जिस साफ़ सुथरे छवि के साथ मैने अबतक की पत्रकारिता की है,मै विश्वास दिलाता हूँ की भविष्य में भी मै पत्रकारिता के माप दंड और अपने सम्मान को बनाये रखते हुए संस्थान के प्रति उत्तरदायी रहूँगा और हमेशा संस्थान के हित में कार्य करता रहूँगा ।
मोबाईल नम्बर -9473747557-पीड़ित असरारुल हक़
मोबाईल नंबर -9838786555-डाक्टर सादिक अली
आपका शुभाकांक्षी
नितिन श्रीवास्तव
mob-9415794130






