Sanjaya Kumar Singh : आईसी-814 का अपहरण भी ठीक नहीं था… पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के अभियुक्तों की फांसी की सजा कम करके उम्र कैद में बदलना कानूनी दृष्टि से भले सही हो, व्यावहारिक नहीं है। सोनिया गांधी ने भले ही अपने पति के हत्यारों को माफ कर दिया हो पर कानूनन इसका कोई मतलब नहीं होना चाहिए। फांसी की सजा ठीक नहीं है पर उड़ान संख्या आईसी-814 का अपहरण भी ठीक नहीं था, रुपेन कत्याल की हत्या भी ठीक नहीं थी और उसके हत्यारों पर तो मुकदमा भी नहीं चला। यह कहां ठीक था।
इस देश में बहुत कुछ ठीक नहीं है मी लॉर्ड। जे. जयललिता भले राजनीति कर रही हैं पर वो भी कहां ठीक हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हत्या अभियुक्तों की दया याचिका पर फैसला लेने में असामान्य देरी को गंभीरता से लिया है और एक तरह से सरकार को इसकी सजा दी है। भले ही यह राजनीति करने वालों और अभियुक्तों के लिए ईनाम है। राहुल गांधी ठीक कह रहे हैं कि प्रधानमंत्री की हत्या का आरोपी बच जाए, प्रधानमंत्री को न्याय नहीं मिले तो आम आदमी का क्या होगा।
पता नहीं इस मामले में कानूनी स्थिति क्या है और अदालत से कहा भी गया कि नहीं, प्रधानमंत्री के हत्यारों को फंसी की सजा होने के बाद उनकी दया याचिका पर निर्णय में देरी का कारण राजनैतिक हो सकता है। खासकर तब जब तीन में से दो अभियुक्ति पड़ोसी देश के नागरिक हैं। सरकार ने अगर राजनैतिक कारणों से फांसी नहीं दी या दया याचिका पर फैसले में देरी की तो अब अभियुक्तों की सजा कम करना एक राजनैतिक निर्णय के लिए सरकार को सजा देने जैसा है। किसी को राजनीति करने का मौका देना भी है। दूसरी ओर, ऐसे अपराधियों को जीवन भर जेल में रखना सुरक्षा की दृष्टि से भी ठीक नहीं है। खतरनाक अपराधियों को फांसी न देकर उम्र भर जेल में रखना खतरनाक और जोखिम भरा भी है।
वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह के फेसबुक वॉल से.






