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लखनऊ

इस संस्‍था ने नागरिकों का जीना मुहाल कर रखा है!

समाजिक कामों का दावा करने वाली एक संस्था के खिलाफ नागरिकों की गम्भीर शिकायतों पर लखनऊ में 21 अप्रैल, 2013 को एक सभा एवं जन सुनवाई आयोजित की गयी। इस सभा में उक्त संस्था के उत्पीड़न के शिकार कई नागरिकों ने सबके सामने प्रमाण सहित अपनी व्यथा रखी।

समाजिक कामों का दावा करने वाली एक संस्था के खिलाफ नागरिकों की गम्भीर शिकायतों पर लखनऊ में 21 अप्रैल, 2013 को एक सभा एवं जन सुनवाई आयोजित की गयी। इस सभा में उक्त संस्था के उत्पीड़न के शिकार कई नागरिकों ने सबके सामने प्रमाण सहित अपनी व्यथा रखी।

इन नागरिकों की बातों में मुख्य रूप से श्री शशि प्रकाश, सुश्री कात्यायनी, श्री राम बाबू और श्री सत्यम का नाम लिया गया। यह भी तथ्य सामने आया कि ये लोग जन चेतना, राहुल फाउण्डेशन तथा कई अन्य नामों से ट्रस्ट एवं सोसाइटी चलाते हैं। इन पर नागरिकों के मकानों पर अवैध कब्जा करने, लोगों को झूठे मुकदमों में फंसाने, सामाजिक कामों में लगे लोगों की एकता तोड़ने और सामाजिक कामों को व्यवसाय बना देने के बारे में लोगों ने बातें कहीं।

सभा में उपस्थित सामाजिक कार्यकर्ताओं ने नागरिकों की इन बातों को बहुत गम्भीरता से लिया। इन कार्यकर्ताओं ने अपनी बातों में कहा कि इनके गलत कामों से सामाजिक कार्यों में लगे सभी लोगों की छवि को नुकसान पहुंचा है और समाज में उनकी विश्वसनीयता पर प्रश्न पैदा हो रहा है। यह प्रवृत्ति सामाजिक कार्यों के लिये बेहद नुकसानदेह है और इससे समाज विरोधी शक्तियों को ताकत मिल रही है। अगर यह काम शहीद भगत सिंह, शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी, प्रेमचन्द्र, गोर्की, टाल्सटाय, बालजाक, राहुल सांकृत्यान, निराला आदि के नाम पर किया जा रहा है, तो और भी खतरनाक मामला है। मानव जाति के इन महान नामों के नाम पर गलत काम करना एक समाज-विरोधी कार्य है। हम इसका पुरजोर विरोध करते है। सभा ने आम सहमति से निम्नलिखित प्रस्ताव लिये :

1.    उक्त लोगों ने आम नागरिकों के खिलाफ जो पुलिस केस और मुकदमे कर रखे हैं, उन्हे वापस लें।

2.    दिवंगत शालिनी, जो इनकी संस्था में काम करती थी, जिनकी समय पर इलाज न होने के कारण असामयिक मृत्यु हो गयी, उनका पिछले दो वर्षों का मेडिकल रिपोर्ट उनके माता-पिता को उपलब्ध करायें।

3.    सुश्री अंजुलिका, सुश्री मधुलिका (डी-68, निराजा नगर, लखनऊ), सुश्री अर्चना सुश्री अंजना (515/69, बाबा का पुरवा, पेपर मिल रोड, लखनऊ), सुश्री अंजू (69ए, बाबा का पुरवा, पेपर मिल रोड लखनऊ), सुश्री प्रीति (69बी, बाबा का पुरवा, पेपर मिल रोड, लखनऊ) के मकानों पर से ये अपना अवैध कब्जा तुरन्त हटाये, और इससे सम्बन्धित मुकदमों को वापस लें।

4.    इनके विश्वासघात से दिवंगत कमला पाण्डे, दिवंगत बीडी सक्सेना, दिवंगत शालिनी, दिवंगत विश्वनाथ मिश्र को जो तकलीफ पहुंची है, उसके लिये सार्वजनिक तौर पर माफी मांगें।

5.    दिवंगत शालिनी के नाम से जारी तथा अन्य द्वारा लिखित वसीयतनामा, इनकी बेहद संवेदनहीन एवं अमानवीय कुकृत्य है। यह एक समर्पित कार्यकर्ता के मृत्यु पर की जाने वाली कुटिल राजनीति है, और सभी संवेदनशील नागरिकों का अपमान है। इसके लिए ये सार्वजनिक तौर पर माफी मांगे।

हम लखनऊ नगर के सामाजिक कार्यकर्ता इस बात से परिचित हैं कि ये गलतियां करने वाले लोग उच्च शिक्षा प्राप्त हैं और वे आसानी से अपनी कमजोरियों को समझ कर उसे सुधार सकते हैं। हम उनसे आग्रह करते हैं कि वे खुद की गलतियों को सुधारने के लिये खुले मन से आगे बढ़ेंगे और समाज के सामने एक अच्छी मिसाल कायम करेंगे। यह सब हम सभी सामाजिक कार्यकर्ताओं के व्यापक उद्देश्यों के हित में होगा।

एक नयी शुरूआत की उम्मीद के साथ,

निवेदक : लखनऊ नगर के सामाजिक कार्यकर्ताओं का हस्ताक्षर
सत्येन्द्र कुमार, मृदुल कुमार सिंह, बी0एस0 कटियार, अरूणा सिंह, विनोद कुमार उपाध्याय, नवीन सिंह, राम अवतार सिंह खंगार, पुरूषोत्तम शुक्ल, मनोज जोशी, के0के0 शुक्ल, अनमोल, आदियोग, संगीता शर्मा, अंशुमाली शर्मा, राम किशोर, शिवानी, ए0के0 सक्सेना, अर्चना सक्सेना, प्रीति सिंह, अंजू खरे, मो0 अजीज, विमलेश कुमार शुक्ल, देवी दत्त पाण्डे, मो0 मसूद, मो0 मशहूद, समृद्धि, शिव कुमारी, शैब्या शुक्ला, राजीव कुमार पाण्डे, रितेश, राजकुमार दीक्षित, डी0एस0 रावल, संजय शर्मा, उर्वशी शर्मा, लता राय, महेश देवा, श्वेता, होमेन्द्र कुमार मिश्रा, ओ0पी0 सिन्‍हा, डॉ0 डी0बी0 लाल, ताहिरा हसन, ए0एच0 परवेज, एस0एस0 वर्मा, राम कृष्ण, डॉ0 नरेश कुमार, के0एन0 शुक्ला, सी0एम0 शुक्ला, के0एच0 सिद्दीकी, श्याम अंकुरम, कौशल किशोर, बह्म्र नारायण गौड।

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